भिलाईनगर। भिलाई इस्पात मजदूर संघ (बीएमएस) में एक बार फिर अंदरुनी घमासान मचा हुआ है। करीब दो दर्जन पदाधिकारियों ने ई फार्म में गोपनीय तरीके से बदलाव को लेकर बगावत कर दिया है। रविशंकर सिंह समेत 25 लोगों को कार्यकारिणी से हटा दिया गया है। इस पर उन्होंने अपने समर्थकों सहित रजिस्ट्रार को पत्र लिखकर ई फार्म में किसी भी तरह का संशोधन नहीं करने की अपील की है।
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वाइस प्रेसीडेंट रविशंकर सिंह सहित उनके करीब 2 दर्जन समर्थकों की लिखित शिकायत में रजिस्ट्रार व्यावसायिक संघ से भिलाई इस्पात मजदूर संघ के पुराने ई फार्म में कोई भी संशोधन न करने की अपील की गई है। रजिस्ट्रार को 3 जुलाई को पत्र लिखा गया है। इस पत्र को इन्द्रावती भवन नया रायपुर स्थित श्रमायुक्त कार्यालय के आवक-जावक विभाग में 7 जुलाई को प्राप्त किया गया है।

पत्र में रविशंकर सिंह और उनके गुट के लोगों ने कहा है कि वे यूनियन के पंजीकृत सदस्य हैं। लेकिन पंजीकृत ई फार्म के आधे सदस्यों को यूनियन की किसी बैठक की कोई सूचना मई 2024 से नहीं दी जा रही है। एक बार पुराने हस्ताक्षर का प्रयोग कर यूनियन में अध्यक्ष का परिवर्तन किया गया। साथ में दो उपाध्यक्ष को नियुक्त किया गया। दूसरी बार यूनियन के विधान में संशोधन का प्रयास किया गया। अभी जानकारी मिल रही है कि ई फार्म में पुनः कुछ परिवर्तन किया जा रहा है।
इँटक के वंशबहादुर सिंह बीएमएस में कार्यकारी अध्यक्ष बनाए गए !
यूनियन सूत्रों ने एक सनसनीखेज खुलासा किया है। उनके अनुसार ईंटक के वंशबहादुर सिंह को भिलाई इस्पात मजदूर संघ के ई फार्म में कार्यकारी अध्यक्ष बना दिया गया है। उनके नाम पर आपत्ति जताने वालों का कहना है कि ईंटक से वंश बहादुर सिंह ने इस्तीफा नहीं दिया है। इस्तीफा दिए बगैर उन्हें भिलाई इस्पात मजदूर संघ में इतना बड़ा पद क्यों दिया जा रहा है? हालांकि वंशबहादुर ने इस मामले में अनभिज्ञता जाहिर की।
बीएसपी की जमीनों से बड़ा राजस्व जनरेट करने कवायद शुरू
भिलाईनगर। देश के सार्वजनिक उपक्रमों ने अपनी अनुपयोगी पड़ी जमीनों के लिए डीपीआर बनाकर भेजना शुरु कर दिया है। सेल ने भी डीपीआर भेज दिया है। आगामी वर्षों में टाउनशिप का नक्शा बदल जाएगा। कम्पनी पर अपने पुराने आवासों को जल्द डिसमेंटल करने का दबाव बढ़ गया है।
असल में केन्द्र सरकार ने देश के सार्वजनिक उपक्रमों की जमीनों का ब्योरा मंगाया उसमें पाया कि जमीनों का बड़ा हिस्सा अनुपयोगी पड़ा है। उसमें लगातार अतिक्रमण कर कब्जा किया जा रहा है। यहां तक कि आवास तक बड़ी संख्या में बेजा कब्जे में हैं। सरकार को लगा कि खाली व अनुपयोगी पड़ी जमीनों से बड़ा राजस्व जनरेट किया जा सकता है। मानेटाइजेशन पॉलिसी उसी का नतीजा है। इस पालिसी पर तेजी से अमल करने के लिए ही सरकार ने नेशनल लैंड मोनेटाइजेशन कार्पोरेशन (एनएलएमसी) की स्थापना की है।
सूत्रों के अनुसार, सरकार ने पाया कि महारत्न कम्पनी के पास सभी यूनिटों को मिलाकर एक लाख करोड़ एकड़ जमीन है। यह जमीन प्लांट या फिर माइंस के नाम पर अधिग्रहित की गई थी। सरकार ने सेल की सभी यूनिटों से प्लांट व माइंस के बाहर की जमीन का ब्योरा मंगाया। सरकार के ध्यान में जब यह बात आई कि सेल की सभी यूनिटों में टाउनशिप के नाम पर हजारों एकड़ जमीन अनुपयोगी पड़ी तो इसे उसने गंभीरता से लिया।
सरकार को यह भी पता चला कि टाउनशिप पर बनाए गए आवास वर्षों पुराने हैं। इनमें से हजारों आवास खंडहर भी हो गए और इनमें अवैध कब्जे भी हो गए। इसके अलावा खाली पड़ी जमीनों में लगातार अतिक्रमण कर कब्जा किया जा रहा है। इस पर सरकार ने इन जमीनों के मोनेटाइजेशन (मुद्रीकरण) का निर्णय लिया।
सरकार ने सेल मैनेजमेंट से विभिन्न यूनिटों की टाउनशिप की जमीनों के बेहतर मोनेटाइजेशन के लिए डीपीआर बनाकर मांगा जो कि सेल मैनेजमेंट ने दे दिया है। इस्पात मंत्रालय का सेल मैनेजमेंट पर दबाव है कि वह अपने टाउनशिप के आवासों को उतनी ही संख्या में रखे जितना बहुत जरूरी है। पुराने आवासों को ज्यादा से ज्यादा संख्या में डिसमेंटल करने कहा गया है। इसी का नतीजा है कि अब सेल मैनेजमेंट ने पुराने आवासों को खाली करने का दबाव बनाना शुरु कर दिया है। रिटेंशन स्कीम और लाइसेंस स्कीम बंद करना उसी का नतीजा है।
3 साल इंतजार के बाद आखिरकार जारी हुआ इंस्पायर अवार्ड का शेड्यूल
दुर्ग। इंस्पायर मानक योजना के तहत विद्यार्थियों को अपनी वैज्ञानिक प्रतिभा दिखाने का अवसर आखिरकार 3 साल बाद मिल रहा है। कोरोना काल से इस योजना का शेड्यूल पिछड़ता जा रहा है। विगत वर्षों के जिला तथा राज्य स्तर की स्पर्धाओं के लिए तिथि का निर्धारण नहीं हो पाया था। अब जाकर इंस्पायर मानक योजना के अंतर्गत वर्ष 2023-24 एवं 2024-25 के जिला तथा राज्य स्तर पर होने वाली ऑनलाइन स्पर्धा की तिथि का निर्धारण किया गया है।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग तथा नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन ऑफ इंडिया के निर्देशानुसार, इंस्पायर मानक योजना अंतर्गत इन छात्रों में चयनित प्रतिभागी इसमें शामिल होंगे। यह बता दें कि जिला स्तरीय स्पर्धा के लिए वर्ष 2023-24 में 177 विद्यार्थियों तथा 2024-25 के 189 विद्यार्थियों के वैज्ञानिक आइडिया का चयन किया गया है।
जिला शिक्षा अधिकारी जिला स्तरीय स्पर्धा के क्रियान्वयन हेतु विशेषज्ञ का चयन करेंगे, जो जिला स्तर पर चयनित छात्र छात्राओं द्वारा अपलोड किए गए मॉडल का मूल्यांकन निर्धारित तिथि अनुसार करेंगे तथा 10% प्रतिभागियों के मॉडल का स्टेट लेवल पर चयन कर प्रतिभागियों की सूची राज्य कार्यालय डीपीआई के इंस्पायर मानक कक्ष अधिकारी को उपलब्ध कराएंगे। वर्ष 2023-24 एवं 2024-25 इंस्पायर अवार्ड मानक की जिला स्तरीय विज्ञान प्रदर्शनी पूर्व में 15 से 25 दिसम्बर 2025 तक ऑनलाइन मोड में किए जाने निर्देश जारी किए गए। वर्ष 2023- 24 एवं 2024-25 में इंस्पायर अवार्ड राशि 10000 रुपए प्राप्त विद्यार्थियों की सूची उपलब्ध कराई गई।
मानक काम्पीटिशन ऐप में अपलोड
भारत सरकार विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा आयोजित किए जाने वाले इंस्पायर अवार्ड के तहत प्रति वर्ष विद्यालयों के छात्र छात्राओं के सर्वश्रेष्ठ 5 मॉडल / प्रोजेक्ट/आइडिया का चयन किया जाना है। आइडिया चयन के पश्चात छात्रों को मॉडल तैयार करने 10000 रुपए प्रदान किया जाता है। चयनित छात्रों को मानक काम्पीटिशन ऐप में 31 जनवरी तक की समयावधि में अपना प्रोजेक्ट विवरण अपलोड करना था।
ऑनलाइन ओरिएंटेशन वर्कशॉप 14 को
शिक्षा विभाग के सहायक संचालक समृद्धि जोशी ने बताया कि इंस्पायर मानक योजना के वर्ष 2023-24 एवं 2024-25 के जिला तथा राज्य स्तर पर होने वाली ऑनलाइन स्पर्धा का शेड्यूल जारी कर दिया गया है। स्पर्धाओं के सभी विशेषज्ञों का 14 जुलाई की सुबह 11 बजे ऑनलाइन ओरिएंटेशन वर्कशॉप होगा, जिसका लिंक इंस्पायर मानक के व्हाट्सएप के माध्यम से भेजी जाएगी।
अस्पताल बचाओ प्रदर्शन 14 को, पूरे परिवार के साथ शामिल होने की अपील
भिलाईनगर। संयुक्त यूनियन के नेतृत्व में रविवार सुबह बोरिया मार्केट के पास नुक्कड़ सभा आयोजित कर संयंत्र के कर्मचारियों, सेवानिवृत्त कर्मियों एवं आम नागरिकों से चर्चा की गई। इस दौरान अस्पताल के निजीकरण के खिलाफ जनजागरण अभियान चलाते हुए पर्चे वितरित किए।
संयुक्त यूनियन ने सभी कमर्चारियों, अधिकारियों, यूनियन सदस्यों, सेवानिवृत्त कमियों तथा उनके परिवारों से अपील की कि वे 14 जुलाई, मंगलवार को शाम 6 बजे सेक्टर-9 अस्पताल के मुख्य द्वार पर आयोजित विरोध प्रदर्शन में बड़ी संख्या में शामिल होकर सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं की रक्षा के संघर्ष को मजबूत करें।
दो बारिश भी नहीं झेल सकी करोड़ों की नहर, उखड़ी कांक्रीट से बाहर आई पॉलीथिन
खैरागढ़। जिले में जल संसाधन विभाग द्वारा लमानिन बांध (जुरलाकला – उदरी नवागांव) से देवारीभाठ तक करोड़ों रुपये की लागत से निर्मित नहर एवं उसकी कंक्रीट लाइनिंग की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। निर्माण के लगभग दो वर्ष के भीतर ही कई स्थानों पर कंक्रीट उखड़ने लगी है।
ग्रामीणों का आरोप है कि पहले वर्ष में क्षतिग्रस्त हिस्सों की केवल औपचारिक मरम्मत की गई लेकिन दूसरी बारिश ने निर्माण की वास्तविक स्थिति उजागर कर दी। कई स्थानों पर कंक्रीट की परत टूटने के बाद उसके नीचे बिछाई गई काली पॉलीथिन तक दिखाई देने लगी है जिससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर संदेह गहरा गया है।
ग्राउंड रिपोर्ट में सामने आई निर्माण की कमजोरियां स्थल निरीक्षण के दौरान नहर की कंक्रीट लाइनिंग कई जगहों पर उखड़ी हुई मिली। ग्रामीणों का दावा है कि कंक्रीट की परत मानकों के अनुरूप पर्याप्त मोटाई की नहीं है जिसके कारण बारिश शुरू होते ही जगह-जगह दरारें पड़ गईं और परत टूटने लगी। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि निर्माण निर्धारित गुणवत्ता के अनुसार किया गया होता तो इतनी कम अवधि में नहर की यह स्थिति नहीं होती।
नहर निर्माण के दौरान किसानों की आवाजाही के लिए बनाए गए मार्ग भी पहली ही बारिश में क्षतिग्रस्त हो गए। दपका क्षेत्र के ग्रामीणों के अनुसार अमलही से भरकनहा खार जाने वाला संपर्क मार्ग बीच से कट जाने के कारण लगभग 200 एकड़ कृषि क्षेत्र प्रभावित हुआ है। किसानों को अब ट्रैक्टर और अन्य कृषि यंत्र लंबा रास्ता तय कर खेतों तक ले जाने पड़ रहे हैं। कई स्थानों पर किसान मजबूरी में आधुनिक कृषि उपकरणों के बजाय पारंपरिक बैलों का सहारा लेने को विवश हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कई शिकायतों के बावजूद विभाग ने मार्ग बहाल करने की दिशा में प्रभावी कदम नहीं उठाए।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि नहर किनारे बनाए गए रास्तों में मुरूम डालने का प्रावधान होने के बावजूद अधिकांश हिस्सों में इसका पालन नहीं किया गया। केवल मुख्य सड़क से लगे कुछ हिस्सों में मुरूम डालकर कार्य पूर्ण दिखा दिया गया जबकि अन्य मार्ग बारिश के दौरान कीचड़ में तब्दील हो गए। इससे किसानों और ग्रामीणों का आवागमन भीर रूप से प्रभावित हो रहा है।
लोगों का आरोप है कि अधिकारियों और ठेकेदार की मिलीभगत से अधूरे कार्य का भुगतान कर दिया गया। ग्रामीणों ने निर्माण कार्य में अनियमितता और भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए उच्चस्तरीय तकनीकी जांच कराने तथा दोषी अधिकारियों एवं ठेकेदारों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।
परसाटोला में यात्री प्रतीक्षालय में चल रही आंगनबाड़ी
अंबागढ़ चौकी। सरकार आंगनबाड़ी केंद्रों को बच्चों की शुरुआती शिक्षा, पोषण और सर्वांगीण विकास की आधारशिला मानती है, लेकिन जिले के अंबागढ़ चौकी विकासखंड के ग्राम परसाटोला में व्यवस्था की हकीकत इससे अलग दिखाई देती है। यहां आंगनबाड़ी भवन जर्जर होकर डिस्मेंटल घोषित किए जाने के बाद केंद्र का संचालन सड़क किनारे बने यात्री प्रतीक्षालय से किया जा रहा है। इससे नौनिहालों की सुरक्षा और मूलभूत सुविधाओं को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, भवन अनुपयोगी होने के बाद से आंगनबाड़ी केंद्र अस्थायी रूप से यात्री प्रतीक्षालय में संचालित है। इसी छोटे से स्थान पर बच्चों की पढ़ाई, पोषण आहार वितरण, टीकाकरण सहित अन्य गतिविधियां कराई जा रही हैं। बारिश और गर्मी के मौसम में बच्चों तथा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को काफी परेशानी उठानी पड़ती है। केंद्र में शौचालय जैसी आवश्यक सुविधा भी उपलब्ध नहीं है ।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क से सटे यात्री प्रतीक्षालय में आंगनबाड़ी संचालित होने से हर समय दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। इसे लेकर अभिभावकों में भी बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ने बताया कि नए भवन की मांग ग्रामसभा के माध्यम से सरपंच के समक्ष रखी गई थी। इसके बाद सरपंच ने अस्थायी व्यवस्था के तौर पर यात्री प्रतीक्षालय उपलब्ध कराया, लेकिन सड़क से सटा होने के कारण यह स्थान पूरी तरह सुरक्षित नहीं है।
आंगनबाड़ी भवन की स्वीकृति की प्रक्रिया अंतिम चरण में
इधर, महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों का कहना है कि नए आंगनबाड़ी भवन की स्वीकृति की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जल्द ही बेहतर वैकल्पिक व्यवस्था करने का प्रयास किया जाएगा। अब लोगों की नजर इस बात पर है कि नए भवन की स्वीकृति कब धरातल पर उतरती है ।
सिद्धबाबा जलाशय निर्माण में भ्रष्टाचार की आशंका
खैरागढ़ / छुईखदान। खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले के छुईखदान विकासखंड अंतर्गत ग्राम गभरा- घिरघोली में निर्माणाधीन सिद्धबाबा जलाशय परियोजना गंभीर आरोपों के चलते विवादों में घिर गई है।
स्थानीय ग्रामीणों और क्षेत्रीय नागरिकों ने आरोप लगाया है कि परियोजना में उपयोग किए जा रहे पत्थर वैधानिक प्रक्रिया के तहत खरीदे जाने के बजाय आसपास के जंगलों एवं शासकीय भूमि से अवैध रूप से तोड़कर सीधे निर्माण कार्य में लगाए जा रहे हैं। यदि जांच में ये आरोप सही पाए जाते हैं तो मामला न केवल प्राकृतिक संसाधनों के अवैध दोहन का होगा बल्कि करोड़ों रुपये के शासकीय राजस्व नुकसान, वित्तीय अनियमितता और विभागीय लापरवाही का भी बन सकता है।
स्थानीय लोगों का दावा है कि निर्माण स्थल पर बाहरी स्रोतों से पत्थर अपेक्षित मात्रा में नहीं पहुंच रहे हैं। आरोप है कि निर्माण एजेंसी द्वारा आसपास के शासकीय क्षेत्र और जंगलों से ही पत्थर निकालकर उनका उपयोग किया जा रहा है जबकि भुगतान बाजार दरों और स्वीकृत निर्माण सामग्री के आधार पर दर्शाया जा रहा है। यदि ऐसा हुआ है तो यह सरकारी धन के दुरुपयोग और वित्तीय अनियमितता गंभीर मामला हो सकता है।
खनिज और वन कानूनों के उल्लंघन की आशंका
मामले को लेकर अनुसार किसी भी सरकारी निर्माण कार्य में उपयोग होने वाली खनिज सामग्री के लिए वैध खनन, रॉयल्टी भुगतान तथा सक्षम विभागों की अनुमति अनिवार्य होती है। बिना अनुमति शासकीय भूमि अथवा वन.क्षेत्र से पत्थर निकालना खनिज नियमों और पर्यावरणीय कानूनों का उल्लंघन माना जा सकता है।
ऐसे मामलों में संबंधित विभागों की जवाबदेही भी तय होती है। परियोजना की गुणवत्ता पर भी उठ रहे गंभीर सवाल छत्तीसगढ़ शासन द्वारा सैकड़ों एकड़ कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने वाली इस महत्वाकांक्षी परियोजना की निर्माण गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
तकनीकी जानकारों का मानना है कि यदि निर्माण सामग्री निर्धारित मानकों अनदेखी की गई है तो भविष्य में जलाशय के अनुरूप नहीं है या गुणवत्ता नियंत्रण की मजबूती, सुरक्षा और उपयोगिता प्रभावित हो सकती है। इससे सार्वजनिक धन से निर्मित इस परियोजना का उद्देश्य भी प्रभावित होने की आशंका है।
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