मनेंद्र पटेल, दुर्ग। दुर्ग नगर निगम की सामान्य सभा में आज अलग ही नजारा देखने को मिला, जहां सत्ता पक्ष के पार्षद अपने ही महापौर को घेरते नजर आए। महापौर अल्का बाघमार के जवाबों से उनके ही पार्षद और एल्डरमेन संतुष्ट नहीं दिखे। वहीं टेंडर प्रक्रिया को लेकर सदन में जमकर हंगामा हुआ।

दुर्ग जिले में सड़क के डामरीकरण के लिए जारी 5 करोड़ 22 लाख रुपये के टेंडर को लेकर भाजपा पार्षदों के बीच करीब दो घंटे तक तीखी बहस चलती रही। सदन में हुई इस खींचतान ने भाजपा पार्षद दल के भीतर मतभेदों को भी उजागर कर दिया।

दरअसल, साइंस कॉलेज के पास से कैनाल रोड होते हुए दुर्ग रेलवे स्टेशन तक सड़क निर्माण के लिए प्रस्तावित 5.22 करोड़ रुपये के टेंडर को लेकर विवाद हुआ। बताया गया कि यह टेंडर चार बार निरस्त हो चुका है। भाजपा पार्षदों ने आरोप लगाया कि टेंडर बार-बार पिता-पुत्र को ही मिल रहा है। इस मुद्दे पर सदन में जमकर बहस हुई। वहीं, कुछ पार्षदों ने टेंडर को बहुमत से पारित करने की बात भी कही।

शहर की बदहाल व्यवस्थाओं पर भी उठे सवाल
सामान्य सभा की शुरुआत से ही शहर की बदहाल व्यवस्थाओं को लेकर पार्षदों ने सवाल उठाए। खराब स्ट्रीट लाइट, बार-बार बाधित हो रही पानी की सप्लाई, सड़कों पर गड्ढे और सफाई व्यवस्था को लेकर महापौर को घेरा गया। पार्षदों ने कहा कि वार्डों में विकास कार्य ठप पड़े हैं और जनता के सवालों का सामना उन्हें करना पड़ रहा है। कुछ पार्षदों ने यहां तक कहा कि उन्हें वार्ड में गमछा डालकर निकलना पड़ता है। पद्मनाभपुर वार्ड के भाजपा पार्षद संजय अग्रवाल ने हर दो महीने में सामान्य सभा बुलाने के आश्वासन पर सवाल उठाए।
महापौर ने टेंडर प्रक्रिया का किया बचाव
वहीं महापौर अल्का बाघमार ने टेंडर प्रक्रिया का पक्ष रखते हुए कहा कि 10 लाख रुपये से अधिक के टेंडर ऑनलाइन होते हैं और उनमें कोई भी भाग ले सकता है। उन्होंने पार्षदों से प्रक्रिया को समझने की बात कही। सामान्य सभा में हुई इस बहस ने शहर की समस्याओं के साथ-साथ निगम के भीतर चल रहे मतभेदों को भी चर्चा में ला दिया।
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