भुवनेश्वर। ओडिशा में 341 करोड़ रुपये से अधिक के अवैध खनन कारोबार और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। ईडी ने भुवनेश्वर के खनन व्यवसायी रतिकान्त राउत के खिलाफ स्थानीय विशेष पीएमएलए (PMLA) कोर्ट में पहला पूरक शिकायत पत्र यानी सप्लीमेंट्री प्रसीक्यूशन कम्प्लेन्ट दाखिल किया है। इससे पहले 7 जुलाई को ईडी ने रतिकान्त की पत्नी लक्ष्मीप्रिया पृष्टि और अन्य सहयोगियों के खिलाफ मुख्य आरोप पत्र दाखिल किया था।
ईडी की जांच रिपोर्ट के अनुसार, रतिकान्त राउत के खिलाफ ओडिशा के विभिन्न थानों में कुल 27 प्राथमिकी (FIR) दर्ज हैं। इनमें अवैध पत्थर खनन, खनिज चोरी, डकैती और अवैध विस्फोटकों की आपूर्ति जैसे गंभीर आपराधिक मामले शामिल हैं। इन्हीं प्राथमिकियों के आधार पर ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग (PMLA) के तहत जांच शुरू की थी।
ईडी की जांच में सामने आया है कि रतिकान्त और उनकी व्यावसायिक संस्थाओं के जरिए 341 करोड़ रुपये से अधिक की अपराध की कमाई उत्पन्न की गई थी। ढेंकनाल में उनके नाम पर लघु खनिजों के खनन का लीज था, लेकिन स्वीकृत सीमा से कई गुना अधिक उत्खनन किया गया।
जांच को सटीक बनाने के लिए ओडिशा स्पेस एप्लिकेशन्स सेंटर (ORSAC) द्वारा ड्रोन और सैटेलाइट सर्वे कराया गया। सर्वे में पाया गया कि लीज क्षेत्र के भीतर स्वीकृत मात्रा से अत्यधिक खनन के अलावा, लीज सीमा के बाहर 7 अलग-अलग स्थानों पर अनधिकृत खनन किया गया था।
अवैध कारोबार से हासिल काली कमाई को छिपाने के लिए विभिन्न बैंक खातों और शैल कंपनियों का इस्तेमाल किया गया था। जांच में माँ तारिणी स्टोन क्रशर, साई शंभू इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड और एश्योरेंस मेटलॉयड एग्जिम प्राइवेट लिमिटेड जैसी कंपनियों के नाम सामने आए हैं। रतिकान्त ने अपने परिवार के सदस्यों और कंपनियों के नाम पर चल-अचल संपत्तियां खरीदकर इस काली कमाई को वैध बनाने की कोशिश की थी।
बता दें कि 8 जनवरी 2025 को ईडी ने कई ठिकानों पर छापेमारी की थी और 20 अगस्त को रतिकान्त को गिरफ्तार किया था। अदालत द्वारा जमानत याचिका खारिज होने के बाद वे वर्तमान में न्यायिक हिरासत में हैं। पूरक आरोप पत्र दाखिल होने के बाद अब इस मामले की कानूनी सुनवाई तेज हो गई है।
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