इमरान खान, खंडवा। मध्य प्रदेश के खंडवा में जनसुनवाई में एक ऐसा मामला सामने आया, जिसने सरकारी सिस्टम की संवेदनहीनता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। यहां एक बुजुर्ग महिला हाथों में तख्ती लेकर कलेक्टर के सामने पहुंची और गुहार लगाने लगी – साहब! मुझे जिंदा कर दो…! दरअसल, सरकारी रिकॉर्ड में महिला को मृत घोषित कर दिया गया है, जबकि वह हकीकत में जिंदा है। सिस्टम की इस कथित लापरवाही के चलते उसकी पेंशन तक बंद हो गई है।


मामला खंडवा के चीराखदान क्षेत्र का है। मंगलवार को नेता प्रतिपक्ष मूल्लू राठौर बुजुर्ग महिला शशिकला को लेकर जनसुनवाई में पहुंचे। महिला ने कलेक्टर को दिए आवेदन में बताया कि 21 सितंबर 2024 को उसकी समग्र आईडी में उसे मृत दर्ज कर दिया गया, जबकि वह जीवित है। महिला दिव्यांग है और उसे आंखों से दिखाई भी नहीं देता। परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है और सरकारी पेंशन ही उसके जीवनयापन का एकमात्र सहारा थी। 

समग्र आईडी में मृत दर्ज होने के बाद महिला की पेंशन बंद हो गई। इसके बाद से वह अपनी पहचान और पेंशन बहाल कराने के लिए नगर निगम के चक्कर लगा रही है। कई बार आवेदन देने के बावजूद उसकी समस्या का निराकरण नहीं हो सका। आखिरकार सरकारी दफ्तरों से निराश होकर बुजुर्ग महिला को जनसुनवाई में हाथों में तख्ती लेकर अपनी जिंदगी का सबूत देना पड़ा।


सवाल यह है कि जब एक जीवित महिला सरकारी रिकॉर्ड में मृत हो सकती है, तो आखिर इस गलती की जिम्मेदारी किसकी है? एक असहाय बुजुर्ग महिला को अपने जिंदा होने का प्रमाण देने के लिए आखिर कब तक भटकना पड़ेगा? नगर निगम नेता प्रतिपक्ष दीपक मुल्लू राठौर ने सवाल उठाए तो वहीं जिला पंचायत सीईओ ऐश्वर्य वर्मा का कहना है कि महिला की शिकायत के आधार पर जांच करा रहे हैं। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई करेंगे।


जनसुनवाई में महिला ने प्रशासन से समग्र आईडी में तत्काल जीवित दर्ज कराने, बंद पड़ी पेंशन दोबारा शुरू करने, बकाया राशि दिलाने और इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ जांच कर कार्रवाई करने की मांग की है। अब देखना होगा कि कागजों में मृत घोषित इस जीवित महिला को प्रशासन कब तक न्याय दिला पाता है।

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