CEC Gyanesh Kumar: चुनाव आयोग (Election Commission) पर ‘इंडियन एक्सप्रेस’ के खुलासे के बाद से देश की राजनीति में कोहराम मचा हुआ है। पूरा विपक्ष इसे लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और मोदी सरकार पर हमलावर है। विपक्ष ज्ञानेश कुमार को हटाने और गिरफ्तार करने की मांग कर रहा है। इस बीच सुप्रीम कोर्ट (Supreme court) के वकील ब्रजेश सिंह ने अटॉर्नी जनरल (Attorney General) को पत्र लिखकर ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने की मांग की है।

वकील ब्रजेश सिंह ने अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमनी को लिखे पत्र में चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और निष्पक्षता पर उठाया है। पत्र में मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने बहु-सदस्यीय चुनाव आयोग को ऐसे चलाया, जैसे सारे फैसले केवल एक व्यक्ति ले रहा हो। साथ ही इसे सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों ने दी गई व्यवस्था के भी खिलाफ बताया है।

इधर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष लामबंद होता नजर आ रहा है। अब विपक्ष ने महाभियोग के पहले दिए नोटिस को लेकर दबाव बनाना शुरू कर दिया है। यह नोटिस अप्रैल में राज्यसभा के मुख्य सभापति को दिया था। कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और समाजवादी पार्टी सहित विपक्ष की कई अन्य पार्टियों की तरफ से दिए गए महाभियोग के नोटिस में सीईसी के खिलाफ कई गंभीर आरोप लगाए गए थे। इनमें सबसे गंभीर पक्षपातपूर्ण और भेदभावपूर्ण आचरण के आरोप शामिल हैं। दो चुनाव आयुक्त सुखबीर संधू और विवेक जोशी के पिछले 10 महीनों में आयोग के फैसलों पर 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज कराने की खबरों के बाद विपक्ष ने फिर से ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग के नोटिस को लेकर सरकार को घेरा है। 

दो आयुक्तों की 14 लिखित आपत्तियों पर खुलासा

बता दें कि SIR पर दो चुनाव आयुक्तों की असहमति के मीडिया दावे के बाद सियासी पारा चढ़ गया है। विपक्षी दलों ने बुधवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए उनका इस्तीफा मांगा। साथ ही सुप्रीम कोर्ट से संज्ञान लेने और एसआईआर तुरंत रोकने की मांग की है।  इंडियन एक्सप्रेस ने वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन यानी एसआईआर को लेकर चुनाव आयोग में मतभेद को लेकर खुलासा किया है। रिपोर्ट के मुताबिक कई बिंदुओं को लेकर मुख्य चुनाव आुक्त और दोनों आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू (Sukhbir Singh Sandhu) और विवेक जोशी (Vivek Joshi ) के बीच मतभेद था।  सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने नए वोटरों को जोड़ने और नाम हटाने से लेकर जानकारी छिपाने पर सवाल उठाए हैं।  रिपोर्ट के मुताबिक दोनों के बिना जानकारी दिए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने फैसले लिए। शिकायत में सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी SIR, फॉर्म 6 में बदलाव, नए वोटर का रजिस्ट्रेशन, वोटर लिस्ट से नाम हटाना और जोड़ना, नाम बहाल करने के आदेशों के खिलाफ अपील, वोटर लिस्ट की सुरक्षा और चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर नाराजगी जताई। दोनों चुनाव आयुक्त ने 10 महीने में 14 बार शिकायत की है। इसके बाद पूरा विपक्ष एकजुट होकर ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

फैसले में तीनों चुनाव आयुक्त की रजामंदी जरूरी

बता दें कि चुनाव आयोग के बड़े फैसले मुख्य चुनाव आयुक्त के साथ, दो अन्य चुनाव आयुक्तों का पैनल लेता है। इनमें से दो चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने एपआईआर में लिए फैसले पर आपत्तियां जताई है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार हैं। एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, एसआईआर प्रक्रिया के दौरान कई मसलों पर दो चुनाव आयुक्तों ने अपनी आपत्तियां जताई. उन्होंने 10 महीनों में 14 बार आपत्तियां दर्ज कराईं। चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने नए वोटरों को जोड़ने और नाम हटाने से लेकर जानकारी छिपाने पर सवाल उठाए हैं। दोनों की आपत्तियों को नजरअंदाज किया गया और फैसले आयोग के सामने बहुमत के आधार पर नहीं रखे गए।

चुनाव आयोग ने तोड़ी चुप्पी

चुनाव आयोग ने दो चुनाव आयुक्तों की असहमतियों से जुड़े विवाद पर स्पष्ट किया कि आयोग के अंदर सभी फैसले सर्वसम्मति से हो रहे हैं। आयोग ने कहा कि वैचारिक मतभेद का मतलब टकराव नहीं समझा जाना चाहिए। आयोग ने कहा कि न केवल तीनों आयुक्त बल्कि आयोग का हर अधिकारी व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए सुझाव देने को अधिकृत है।

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