China President Xi Jinping US Visit: चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग 11 साल बाद अमेरिका पहुंचे हैं। शी जिनपिंग पत्नी के साथ तीन दिवसीय दौरे पर अमेरिका पहुंचे हैं। शी के साथ भी उनकी पत्नी पेंग लियुआन भी अमेरिका पहुंचीं हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने शी जिनपिंग का शानदार स्वागत किया। ट्रंप ने प्रोटोकॉल तोड़कर शी जिनपिंग का एयरपोर्ट पर खुद स्वागत किया। इस दौरान फर्स्ट लेडी मेलानिया ट्रंप भी एंड्रयूज एयर बेस पर नजर आईं।

आज रात व्हाइट हाउस में शी जिनपिंग और उनकी पत्नी पेंग लियुआन के सम्मान में स्टेट डिनर होगा। इस डिनर में एनविया के जेन्सेन हुआंग और स्पेसएक्स के एलोन मस्क जैसी बड़ी हस्तियां शामिल हो सकते हैं। इसके बाद ट्रंप और जिनपिंग के बीच द्वपक्षीय बातचीत होगी। इसमें व्यापार, टैरिफ, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ताइवान और रूस से जुड़े मुद्दे शामिल हो सकते हैं।

जिनपिंग का स्वागत करने के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए ट्रंप ने कहा कि पूरा टेक वर्ल्ड, पूरा बैंकिंग वर्ल्ड और भी बहुत लोग कल रात चीनी प्रेसिडेंट शी के लिए स्टेट डिनर में शामिल होंगे। काश हमारे पास और सीटें होतीं। ये एक बहुत अच्छा स्वागत था और मुझे लगता है कि वो इसकी तारीफ करेंगे। साथ ही, उस जगह पर उतरना बहुत अच्छा लगता है जिसे वो अब तक का सबसे सुंदर हेलीपैड मानते हैं। उन्होंने चीन और अमेरिका को लेकर कहा कि हम दुनिया के सबसे सम्मानित देश हैं। दो साल पहले, हमारा मजाक उड़ाया जाता था। हमें बेवकूफों का झुंड समझा जाता था। हम दुनिया में कहीं भी सबसे सम्मानित देश हैं, कहीं ज्यादा।

व्यापार, AI, ताइवान और ईरान पर होगी चर्चा

ट्रंप और शी जिनपिंग के बीच बातचीत में व्यापार प्रमुख मुद्दों में से एक रहने की उम्मीद है। अमेरिका और चीन लंबे समय से व्यापार और टैरिफ को लेकर मतभेदों का सामना कर रहे हैं। इसके अलावा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस दोनों देशों के बीच प्रतिस्पर्धा का एक अहम क्षेत्र बन चुका है। ताइवान को लेकर भी दोनों पक्षों के बीच मतभेद हैं। अमेरिका और चीन के बीच सबसे बड़ा मुद्दा ट्रेड और टैरिफ है। पिछले साल ट्रम्प के टैरिफ के जवाब में चीन ने भी अमेरिका के सामान पर बड़े टैक्स लगाए थे। अब दोनों देश एक-दूसरे के सामान पर लगे टैक्स को कम करने की कोशिश कर रहे हैं।

वहीं चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है, जबकि अमेरिका ताइवान की सुरक्षा में मदद करता है। चीन चाहता है कि अमेरिका ताइवान से दूरी बनाए रखे और उसे सैन्य मदद न दे। अमेरिका ने ट्रम्प को रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार दिया है। भारत और चीन भी इसके दायरे में आ सकते हैं। चीन रूस से बड़ी मात्रा में तेल और गैस खरीदता है।

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