पाकिस्तान में राजनीतिक तनाव के बीच प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) शासित खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में इमरजेंसी लागू कर दी है। राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने कैबिनेट की सिफारिशों को मंजूरी दे दी। वहीं, PTI प्रमुख जुनैद अकबर ने दावा किया है कि उन्हें और मुख्यमंत्री मुहम्मद सोहेल अफरीदी को गिरफ्तार कर लिया गया है। हालांकि, इन गिरफ्तारियों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब PTI जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की रिहाई की मांग को लेकर इस्लामाबाद मार्च की तैयारी कर रही है।

Khyber Pakhtunkhwa Emergency: क्यों लागू की गई इमरजेंसी?

पाकिस्तान सरकार ने आरोप लगाया है कि खैबर पख्तूनख्वा की प्रांतीय सरकार आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई करने में जानबूझकर पीछे हट रही थी। इसी आधार पर इमरजेंसी लागू करने का फैसला लिया गया।

प्रधानमंत्री कार्यालय के मुताबिक, शहबाज शरीफ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में देश के सुरक्षा हालात की समीक्षा की गई। इसके बाद राष्ट्रपति जरदारी ने कैबिनेट की सिफारिशों को मंजूरी दी।

पाकिस्तान के संविधान के संबंधित प्रावधानों के तहत संघीय सरकार को इमरजेंसी के दौरान प्रांतीय प्रशासन के कुछ या सभी अधिकार अपने हाथ में लेने की अनुमति मिल सकती है। इससे PTI की प्रांतीय सरकार की शक्तियां प्रभावित होने की आशंका है। हालांकि, इमरजेंसी के बाद प्रशासनिक व्यवस्था में क्या बदलाव होंगे, इस पर अभी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।

Imran Khan Release March: इस्लामाबाद में बढ़ाई गई सुरक्षा

PTI अपने नेता इमरान खान की रिहाई के लिए इस्लामाबाद तक मार्च निकालने की तैयारी कर रही है। पार्टी का मार्च पहले 27 सितंबर को प्रस्तावित था, लेकिन सरकार और PTI नेतृत्व के बीच बातचीत के लिए इसे 4 अक्टूबर तक टाल दिया गया था।

पाकिस्तान सरकार ने प्रदर्शनकारियों को राजधानी में प्रवेश नहीं करने देने की चेतावनी दी है। इसके मद्देनजर इस्लामाबाद के प्रमुख रास्तों पर शिपिंग कंटेनर लगाकर बैरिकेडिंग की गई है।

PTI ने सरकार के फैसले पर उठाए सवाल

रॉयटर्स के मुताबिक, PTI प्रवक्ता जुल्फिकार बुखारी ने इमरजेंसी लागू करने के फैसले की आलोचना की। उन्होंने आशंका जताई कि इससे हिंसा, अस्थिरता और नुकसान बढ़ सकता है। उनका आरोप है कि बातचीत की गुंजाइश होने के बावजूद सरकार के कदम से संवाद की इच्छा नहीं दिखाई देती।

पाकिस्तान में इस घटनाक्रम से केंद्र और PTI के बीच टकराव और बढ़ने की आशंका है। आने वाले दिनों में इमरजेंसी के प्रशासनिक प्रभाव और प्रस्तावित इस्लामाबाद मार्च पर सभी की नजरें रहेंगी।

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