Business Desk – EPFO Latest News : एक अहम सुनवाई के दौरान, बॉम्बे हाई कोर्ट ने EPFO ​​की उस प्रथा पर रोक लगा दी, जिसके तहत कर्मचारियों की ज्यादा पेंशन के लिए दी गई अर्जियों को सिर्फ कागजों में छोटी-मोटी कमियों की वजह से खारिज कर दिया जाता था. कोर्ट ने साफ किया कि पेंशन योजना एक सामाजिक कल्याण की पहल है, जिसका मकसद कर्मचारियों को बुढ़ापे में आर्थिक सुरक्षा देना है, न कि उन्हें सरकारी कागजों के झंझट में फंसाकर उनके हक से वंचित करना.

अब EPFO ​​की जिम्मेदारी और बढ़ गई है

कोर्ट ने साफ-साफ कहा कि EPFO ​​अब चुपचाप नहीं बैठ सकता. अगर कोई कंपनी जरूरी कागजात जैसे कि Form 6A जमा करने में नाकाम रही है, तो अब यह EPFO ​​की जिम्मेदारी है कि वह अपने अंदरूनी सिस्टम और पुराने रिकॉर्ड की खुद से जांच करे.

विभाग को खुद आगे बढ़कर कंपनी से संपर्क करना चाहिए और किसी भी छूटे हुए या अधूरे कागजात की मांग करनी चाहिए. किसी भी कर्मचारी की अर्जी को बिना किसी ठोस वजह के सीधे-सीधे खारिज नहीं किया जा सकता. अर्जी को खारिज करने का कदम तभी उठाया जाना चाहिए, जब कोई और रास्ता न बचा हो.

कर्मचारी इन सबूतों के जरिए पा सकते हैं अपना हक

इस फैसले के बाद, कर्मचारियों को अब सिर्फ अपने मालिकों (Employers) पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा. यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि अगर मालिक सहयोग नहीं भी करता है, तब भी कर्मचारी इन कागजात का इस्तेमाल करके अपने दावों को साबित कर सकते हैं.

EPF पासबुक और Form 3A.

  • सैलरी स्लिप और बैंक स्टेटमेंट, जिनसे यह साबित होता हो कि उनकी सैलरी से कटौती की गई थी.
  • नियुक्ति पत्र (Appointment letters) और कंपनी के साथ हुआ कोई भी अन्य सरकारी पत्राचार.
  • UAN पोर्टल पर उपलब्ध योगदान का इतिहास (Contribution history).
  • जानकारों का कहना है कि पुराने मामलों में जहां पुराने रिकॉर्ड ढूंढना मुश्किल हो सकता है. इन सहायक कागजात को प्राथमिकता दी जाएगी.

मालिकों की लापरवाही की सजा कर्मचारियों को नहीं मिलनी चाहिए

कोर्ट ने साफ़ तौर पर कहा कि रिकॉर्ड रखना मालिक की कानूनी जिम्मेदारी है. अगर कोई कंपनी इस जिम्मेदारी को निभाने में चूक करती है, तो उस लापरवाही की सजा कर्मचारी को उसकी पेंशन रोककर नहीं दी जा सकती.

यह फ़ैसला न सिर्फ पेंशन से जुड़े मामलों के लिए, बल्कि ग्रेच्युटी, पारिवारिक पेंशन और ESI फ़ायदों जैसे अन्य दावों के लिए भी एक मिसाल (Precedent) कायम करने वाला है. इसके अलावा, हाई कोर्ट ने EPFO ​​को निर्देश दिया है कि वह अगले 12 हफ्तों के अंदर पहले खारिज किए गए सभी दावों की दोबारा जांच करे और जो लोग पेंशन के हकदार पाए जाएं, उन्हें पेंशन का भुगतान करे.