Automobile Desk: भारतीय सड़कों पर सफर करने वाले लोगों के लिए एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर सामने आ रही है। आए दिन सड़क पर होने वाले भयानक हादसों और उनमें जाने वाली अनमोल जिंदगियों को रोकने के लिए अब सरकार ने एक बेहद सख्त और दूरदर्शी कदम उठाने का मन बना लिया है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने देश में बिकने वाली गाड़ियों की सुरक्षा यानी सेफ्टी स्टैंडर्ड्स को पूरी तरह से बदलने का खाका तैयार कर लिया है। सरकार की योजना आने वाले कुछ सालों में कारों और बड़े कमर्शियल वाहनों के लिए कुछ ऐसे आधुनिक फीचर्स अनिवार्य करने की है, जो गाड़ी खुद-ब-खुद कंट्रोल करके किसी भी बड़े हादसे को टालने में मददगार साबित हों।

मंत्रालय की तरफ से हाल ही में एक नया ड्राफ्ट प्रस्ताव जारी किया गया है, जिसमें एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम (ADAS) के एक अहम हिस्से— यानी ऑटोनॉमस इमरजेंसी ब्रेकिंग सिस्टम (AEBS) को देश की सभी पैसेंजर कारों में लागू करने की रूपरेखा तैयार की गई है। इस पूरे प्लान के तहत सरकार ने आम जनता और ऑटोमोबाइल सेक्टर से जुड़े एक्सपर्ट्स से इस पर अपने सुझाव और आपत्तियां दर्ज कराने के लिए 30 दिन का समय दिया है।
आखिर क्या है AEBS और कैसे बचाएगा आपकी जान?
आम तौर पर ड्राइविंग करते वक्त कई बार ऐसा होता है कि ड्राइवर का ध्यान कुछ सेकंड के लिए भटक जाता है या फिर सामने चल रही गाड़ी अचानक ब्रेक लगा देती है और समय रहते दूरी न मेंटेन होने की वजह से टक्कर हो जाती है। ऑटोनॉमस इमरजेंसी ब्रेकिंग सिस्टम यानी AEBS ठीक इसी परिस्थिति से निपटने के लिए डिजाइन किया गया है।
कार में आगे की तरफ लगे सेंसर्स और कैमरे सड़क की स्थिति पर लगातार नजर बनाए रखते हैं। यदि सिस्टम को यह महसूस होता है कि सामने कोई खतरा है या किसी अन्य वाहन से भिड़ने की नौबत आ रही है और ड्राइवर की तरफ से ब्रेक नहीं लगाए जा रहे हैं, तो यह तकनीक खुद-ब-खुद गाड़ी के ब्रेक एक्टिवेट कर देती है। इससे गाड़ी की स्पीड कम हो जाती है या फिर टक्कर होने की स्थिति में उसका असर (impact) बेहद कम हो जाता है, जिससे गंभीर चोटों या जानमाल के नुकसान के खतरे को काफी हद तक टाला जा सकता है। हालांकि, जानकारों का यह भी साफ कहना है कि यह तकनीक सिर्फ एक मददगार कवच है, इसलिए गाड़ी चलाते समय ड्राइवर को हमेशा सतर्क और सड़क पर पूरी तरह ध्यान देना ही होगा।
किस साल से कौन-सी गाड़ियों में लागू होगा नियम?
सरकार इस बड़े बदलाव को एकदम से थोपने के बजाय चरणबद्ध तरीके से लागू करना चाहती है, ताकि ऑटोमोबाइल कंपनियों को भी अपनी गाड़ियों के मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेस में बदलाव करने का पूरा समय मिल सके:
1 अक्टूबर 2028 से: जो गाड़ियां—जैसे M1 कैटेगरी की यात्री कारें या N1 कैटेगरी के हल्के कमर्शियल वाहन—पहले से इस तकनीक के साथ आ रही हैं, उन्हें तय किए गए मानकों का कड़ाई से पालन करना होगा।
1 अक्टूबर 2030 से: देश में बनने वाले सभी नए M1 कैटेगरी के कार मॉडल्स में AEBS फीचर देना अनिवार्य किए जाने का प्रस्ताव है। यानी इस तारीख के बाद से लॉन्च होने वाली नई गाड़ियों में यह सिस्टम कंपनी फिटेड मिलेगा।
1 अक्टूबर 2032 से: इस डेडलाइन तक पहुंचते-पहुंचते यह नियम पहले से प्रोडक्शन में चल रहे सभी M1 कैटेगरी के पुराने कार मॉडल्स पर भी पूरी तरह लागू कर दिया जाएगा।
स्टीयरिंग, लेन और बड़े वाहनों के लिए भी नए कड़े मानक
सिर्फ ऑटोमैटिक ब्रेकिंग तक ही बात सीमित नहीं है, बल्कि सरकार गाड़ियों के स्टेबिलिटी और लेन ड्राइविंग को लेकर भी खासी तैयारी कर चुकी है। आगामी 1 अक्टूबर 2027 से गाड़ियों की स्टीयरिंग पर पड़ने वाले लोड और उसके रिस्पांस को लेकर बिल्कुल नए स्टैंडर्ड लागू किए जा सकते हैं, हालांकि बिना स्टीयरिंग वाले तीन-पहिया वाहनों, मोटरसाइकिलों और कुछ विशेष उपयोग वाले वाहनों को इससे छूट दी गई है।
इसके अलावा, जिन गाड़ियों में ऑटो-स्टीयरिंग या लेन-कीप असिस्ट यानी गाड़ी को खुद अपनी लेन में रखने वाला सिस्टम लगा होगा, उनके लिए भी सख्त नियम तय किए जा रहे हैं। खासकर 1 अक्टूबर 2029 से टैक्सियों और पब्लिक ट्रांसपोर्ट वाले वाहनों के लिए ऐसे स्टीयरिंग और लेन-असिस्ट सिस्टम जरूरी किए जा सकते हैं, जो लंबी ड्राइविंग के दौरान ड्राइवर को झपकी आने या नींद महसूस होने पर तुरंत तेज चेतावनी (Alert) दे सकें।
दूसरी तरफ, भारी वाहनों जैसे ट्रक और बसों की सुरक्षा पर भी सरकार का पूरा जोर है। जनवरी 2027 से नए ट्रक-बस मॉडल्स में भी AEBS और ब्लाइंड-स्पॉट असिस्ट (यानी ड्राइवर को वह एरिया दिखाना जो शीशों में नजर नहीं आता) जैसे फीचर्स अनिवार्य करने की तैयारी चल रही है। इसके साथ ही, ट्रकों के ब्रेकिंग सिस्टम में सुधार लाने के लिए 1 अक्टूबर 2027 से नए नियम आने वाले हैं और खतरनाक मोड़ों पर गाड़ी को पलटने से बचाने वाली Electronic Stability Control (ESC) तकनीक को भी अनिवार्य बनाया जा सकता है।
आपस में बातचीत करेंगी गाड़ियां
इस पूरे रोडमैप का सबसे दिलचस्प और आधुनिक पहलू यह है कि सरकार 1 अक्टूबर 2028 से नई गाड़ियों में ‘वीकल-टू-वीकल’ (V2V) कम्युनिकेशन तकनीक को भी शामिल करने पर विचार कर रही है। इस टेक्नोलॉजी की मदद से सड़क पर चल रही गाड़ियां आपस में अपनी रफ्तार, लोकेशन और दिशा की जानकारी शेयर करेंगी। यदि आगे चल रही गाड़ी में कोई अचानक दिक्कत आती है या कोई वाहन अचानक ब्रेक लगाता है, तो पीछे आ रही गाड़ियों को पलक झपकते ही इसका सिग्नल मिल जाएगा।
फिलहाल यह पूरा खाका एक ड्राफ्ट के रूप में सामने आया है, जिस पर महीने भर तक चर्चा और सुझाव प्रक्रिया चलेगी। इसके बाद सभी पक्षों की राय को ध्यान में रखते हुए मंत्रालय इन सुरक्षा नियमों को अंतिम रूप देगा, जिसके बाद भारतीय सड़कों पर दौड़ने वाली गाड़ियों का भविष्य पूरी तरह सुरक्षित और हाई-टेक हो जाएगा।

