हेमंत शर्मा, इंदौर। शहर के चर्चित रियल एस्टेट कारोबारी बंटी उर्फ संदीप नागर की आत्महत्या का मामला लगातार गंभीर और पेचीदा होता जा रहा है। पलासिया थाना पुलिस अब इस मौत को केवल व्यक्तिगत तनाव से जोड़कर नहीं देख रही, बल्कि करोड़ों रुपये के लेनदेन, बैंक लोन, रियल एस्टेट प्रोजेक्ट और बंटी नागर के संपर्क में रहे लोगों की पूरी कड़ी खंगाल रही है। 

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक बंटी नागर एक निजी बैंक से करीब 5 करोड़ रुपये का लोन लेने वाले थे। लोन सेंशन हो चुका था और बैंक की प्रक्रिया अंतिम दौर में थी। खास बात यह है कि जिस दिन बंटी नागर ने आत्महत्या की, उसके अगले दिन बैंक कर्मचारियों को दस्तावेजों पर साइन कराने के लिए आना था। लेकिन बैंक कर्मचारी पहुंचते, उससे पहले ही बंटी नागर ने अपनी जिंदगी खत्म कर ली।

5 करोड़ आने वाले थे, फिर ऐसा क्या हुआ?

पुलिस अब यह समझने की कोशिश कर रही है कि जब 5 करोड़ रुपये का लोन मंजूर हो चुका था और रकम मिलने की प्रक्रिया अंतिम चरण में थी, तब बंटी नागर पर ऐसा कौन सा दबाव था, जिसने उन्हें इतना बड़ा कदम उठाने के लिए मजबूर किया? 

जानकारी के अनुसार इस 5 करोड़ रुपये में से करीब 2.70 करोड़ रुपये पुराने लोन के टेकओवर में जाने थे। इसके बाद लगभग 2.30 करोड़ रुपये की राशि बंटी नागर के अन्य कारोबारी लेनदेन में इस्तेमाल होने की बात सामने आई है।

18 लोगों से करोड़ों का हिसाब-किताब!

जांच में एक और महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। बंटी नागर के परिवार की ओर से पुलिस को करीब 18 ऐसे लोगों के नाम दिए गए हैं, जिनके साथ बंटी का करोड़ों रुपये का लेनदेन बताया जा रहा है। इनमें कारोबारी, फाइनेंसर, रियल एस्टेट से जुड़े लोग, प्रॉपर्टी डीलर और अन्य निवेश से जुड़े लोग शामिल बताए जा रहे हैं।पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि बंटी ने किससे पैसा लिया था, किसे पैसा देना था और किन लोगों के साथ उनका वित्तीय संबंध हाल के दिनों में तनावपूर्ण हुआ था।

7 प्रोजेक्ट में लगाया था ब्याज का पैसा

परिवार से मिली जानकारी के मुताबिक बंटी नागर लोगों से ब्याज पर पैसा लेकर उसे अपने रियल एस्टेट कारोबार के करीब सात प्रोजेक्ट में लगाते थे। अब पुलिस इन प्रोजेक्ट की भी पड़ताल करेगी। जांच का मकसद यह पता लगाना है कि कहीं किसी प्रोजेक्ट में पैसा फंसने या भुगतान में देरी की वजह से बंटी पर आर्थिक दबाव तो नहीं बढ़ा था।इसके साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि अलग-अलग प्रोजेक्ट में किसका कितना पैसा लगा था और बंटी पर वापस भुगतान का कितना दबाव था।

परिवार ने कहा- पैसे लौटाने का दबाव था

बंटी नागर के भाई राकेश नागर ने पुलिस को दी जानकारी में बताया है कि बंटी अपने प्रोजेक्ट समय पर पूरा करने की कोशिश करते थे। परिवार के मुताबिक दिल्ली से लौटने के बाद बंटी कुछ पुराने दोस्तों और परिचितों से भी दूरी बनाने लगे थे।परिवार को आशंका है कि पैसे वापस करने का दबाव उनकी मानसिक परेशानी की बड़ी वजह हो सकता है। हालांकि यह फिलहाल परिवार की ओर से बताई गई परिस्थितियां हैं।

प्रोजेक्ट के जमीन मालिक से भी पूछताछ

बंटी नागर के जिस प्रोजेक्ट पर पुलिस की नजर है, उससे जुड़े लैंड ओनर से भी पूछताछ की जाएगी।पुलिस यह जानना चाहती है कि प्रोजेक्ट को लेकर बंटी और जमीन मालिक के बीच किस तरह का वित्तीय समझौता था। क्या किसी भुगतान को लेकर विवाद था? क्या कोई रकम अटकी हुई थी? और क्या इसी वजह से बंटी पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव बना?इन सभी सवालों के जवाब पूछताछ के बाद सामने आ सकते हैं।

कॉल डिटेल खंगाल रही पुलिस, WhatsApp बातचीत भी अहम

अब जांच का एक बड़ा हिस्सा डिजिटल रिकॉर्ड पर टिक गया है। पुलिस बंटी नागर की कॉल डिटेल को बारीकी से खंगाल रही है।आत्महत्या से पहले उन्होंने किससे बात की? कौन से नंबर लगातार संपर्क में थे? किन लोगों से बार-बार बातचीत हुई? और क्या किसी व्यक्ति के साथ पैसों को लेकर बातचीत या विवाद चल रहा था? इन सभी सवालों के जवाब तलाशे जा रहे हैं। इसके अलावा पुलिस WhatsApp कॉल और अन्य डिजिटल बातचीत से जुड़ी जानकारी का भी इंतजार कर रही है।

दो मोबाइल अभी तक पुलिस की पहुंच से बाहर

मामले की जांच में सबसे महत्वपूर्ण कड़ी बने हुए हैं दो मोबाइल फोन, जो अभी तक पुलिस के कब्जे में नहीं आए हैं।इन मोबाइल में मौजूद चैट, कॉल हिस्ट्री, WhatsApp बातचीत, बैंकिंग से जुड़े संदेश और कारोबारी संपर्क इस मामले की कई अनसुलझी कड़ियों को जोड़ सकते हैं।यही वजह है कि पुलिस इन दोनों मोबाइल को तलाशने में जुटी है।

क्या आर्थिक दबाव ने बंटी को मौत की ओर धकेला?

अब तक सामने आई जानकारी के आधार पर पुलिस इस संभावना की भी जांच कर रही है कि बंटी नागर किसी व्यक्ति या समूह के लगातार आर्थिक दबाव में तो नहीं थे। यदि जांच में किसी व्यक्ति द्वारा रकम की मांग, लगातार दबाव, धमकी या किसी अन्य तरह की प्रताड़ना के ठोस साक्ष्य सामने आते हैं, तो मामले में आगे कानूनी कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है।फिलहाल पुलिस ने किसी व्यक्ति को इस मामले में दोषी नहीं ठहराया है।

5 करोड़ का लोन… 18 लोगों का लेनदेन… 7 प्रोजेक्ट और दो गायब मोबाइल

बंटी नागर की मौत के बाद पुलिस के सामने अब एक के बाद एक आर्थिक कड़ियां सामने आ रही हैं।

5 करोड़ रुपये का सेंशन लोन 

2.70 करोड़ रुपये का संभावित लोन टेकओवर 

करीब 2.30 करोड़ रुपये के अन्य लेनदेन की जानकारी 

18 लोगों से करोड़ों रुपये के कथित आर्थिक संबंध 

करीब 7 रियल एस्टेट प्रोजेक्ट में निवेश 

लैंड ओनर से पूछताछ और पुलिस की पहुंच से बाहर दो मोबाइल।

इन सभी कड़ियों को जोड़कर पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि आखिर शहर के बड़े कारोबारी बंटी नागर को ऐसा कौन सा दबाव था, जिसके बीच उन्होंने आत्महत्या जैसा कदम उठाया।अब जांच का सबसे बड़ा सवाल यही है—5 करोड़ रुपये का लोन मिलने वाला था, फिर मौत से ठीक पहले ऐसा क्या बदल गया?

इस सवाल का जवाब बैंक रिकॉर्ड, पैसों के लेनदेन, प्रोजेक्ट से जुड़े लोगों की पूछताछ और गायब मोबाइल के डिजिटल डेटा से मिलने की उम्मीद है। अगर इन कड़ियों में किसी व्यक्ति के दबाव या भूमिका के ठोस सबूत मिलते हैं, तो बंटी नागर आत्महत्या मामले की जांच एक बड़े वित्तीय एंगल की ओर मुड़ सकती है। फिलहाल पुलिस की जांच जारी है और सामने आए आरोपों व आशंकाओं की पुष्टि होना बाकी है।

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