हेमंत शर्मा, इंदौर। त्योहार के मौसम में इंदौर के वार्ड क्रमांक 23 में अस्थायी दुकानों को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। पार्षद विनीता मोर्य के पति धर्मेंद्र पर रेडीमेड कॉम्प्लेक्स के बाहर करीब 40 दुकानें लगवाने के नाम पर प्रति दुकानदार हजारों रुपये लेने के गंभीर आरोप लगे हैं। इस मामले से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद Lalluram.com की टीम ने मौके पर पहुंचकर पड़ताल की।

पड़ताल के दौरान एक दुकानदार ने कैमरे के सामने आरोप लगाया कि दुकान लगाने के लिए पार्षद पति को 7 हजार रुपये देने पड़ते हैं। दुकानदार के मुताबिक, इसके अलावा बिजली और टेंट समेत अन्य व्यवस्थाओं के नाम पर अलग से राशि ली जाती है। उसका कहना है कि कुल मिलाकर एक दुकान लगाने में 15 से 20 हजार रुपये तक का खर्च आ रहा है। मामले में चंद रुपयों का लालच देकर खबर रुकवाने का भी प्रयास किया गया।

कैमरे के सामने दुकानदारों ने बताया अपना दर्द

मामले की पड़ताल के दौरान दुकानदारों से बातचीत की जा रही थी। आरोप है कि जैसे ही Lalluram.com की टीम दुकानदार का इंटरव्यू लेने पहुंची, कुछ लोग वहां पहुंच गए और दुकानदारों पर दबाव बनाने लगे। दुकानदारों को धमकाने के आरोप भी सामने आए हैं।यह पूरा घटनाक्रम अब कई सवाल खड़े कर रहा है। आखिर दुकानदारों से दुकान लगाने और सुविधाओं के नाम पर कितनी राशि ली जा रही है और यह पैसा किसके पास जा रहा है?

मंदिर के कनेक्शन से जली लाइट, फिर बिजली के नाम पर वसूली

Lalluram.com की टीम ने दुकानों पर लगी बिजली व्यवस्था की भी पड़ताल की। मौके पर बिजली का कनेक्शन मंदिर से जुड़ा होने की बात सामने आई। आरोप है कि इस व्यवस्था के बावजूद दुकानदारों से बिजली के नाम पर प्रति दुकान अलग से राशि वसूली जा रही है।अब सवाल यह भी उठ रहा है कि यदि बिजली की व्यवस्था किसी अन्य स्थान के कनेक्शन से की गई, तो दुकानदारों से बिजली शुल्क के नाम पर ली जा रही राशि का हिसाब क्या है?

पार्षद पति बोले—एक भी रुपये नहीं लिया, विपक्ष की साजिश

इन आरोपों पर वार्ड क्रमांक 23 के पार्षद पति धर्मेंद्र मौर्य ने अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि उन्होंने किसी भी व्यक्ति से दुकान लगाने के नाम पर कोई पैसा नहीं लिया है। उनके मुताबिक, यह पूरा मामला विपक्ष की साजिश है और राजनीतिक रूप से उन्हें बदनाम करने की कोशिश की जा रही है।एक महिला द्वारा वायरल किए गए वीडियो को लेकर धर्मेंद्र मौर्य ने कहा कि उसकी दुकान डीपी के पास लगाई गई थी, जहां शॉर्ट सर्किट का खतरा था।

सुरक्षा कारणों से दुकान हटाई गई, जिसके बाद वीडियो बनाकर आरोप लगाए गए।धर्मेंद्र मौर्य का कहना है कि दुकानदारों को सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं और यदि कोई व्यक्ति व्यवस्था और सुविधाओं के लिए राशि लेता है तो उसमें गलत क्या है। उन्होंने यह भी कहा कि सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए लोग आपसी तौर पर राशि का इंतजाम करते हैं।

अब सवाल—आरोपों की होगी जांच या मामला दब जाएगा?

एक तरफ दुकानदार कैमरे के सामने पैसे लेने के आरोप लगा रहे हैं, दूसरी तरफ पार्षद पति धर्मेंद्र मौर्य इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और Lalluram.com की ग्राउंड रिपोर्ट के बाद यह मामला अब राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि त्योहार के मौके पर अस्थायी दुकानें लगवाने के नाम पर कथित वसूली के इन आरोपों की निष्पक्ष जांच होगी या फिर मामला आरोप-प्रत्यारोप तक ही सीमित रह जाएगा? अब देखना होगा कि बीजेपी और नगर निगम प्रशासन इस मामले में क्या रुख अपनाते हैं और दुकानदारों के आरोपों की जांच कर कोई कार्रवाई की जाती है या नहीं।

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