सुरेश पांडेय, सिंगरौली। मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले में कोल इंडिया की प्रमुख अनुषंगी कंपनी नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (NCL) की जयंत परियोजना से श्रमिकों के शोषण का एक गंभीर मामला सामने आया है। यहां स्वच्छता कार्य में लगे संविदाकर्मियों ने संबंधित ठेकेदार पर निर्धारित न्यूनतम मजदूरी से बेहद कम भुगतान करने का बड़ा आरोप लगाया है।

मात्र 260 रुपये प्रतिदिन भुगतान का आरोप

प्राप्त जानकारी के अनुसार, NCL जयंत परियोजना में सफाई कार्य में तैनात संविदाकर्मियों को महज 260 रुपये प्रतिदिन की दर से भुगतान किए जाने का आरोप है। जबकि श्रम नियमों के जानकारों और दिशा-निर्देशों के मुताबिक, निर्माण, सड़क रखरखाव, सफाई और हाउसकीपिंग जैसे कार्यों में श्रमिकों की विभिन्न श्रेणियों (अकुशल, अर्ध-कुशल और कुशल) के अनुसार न्यूनतम मजदूरी की दरें लगभग 550 से 850 रुपये प्रतिदिन तक निर्धारित हैं। तय मानकों के विपरीत मात्र 260 रुपये प्रतिदिन का भुगतान किए जाने के इन आरोपों ने देश की महारत्न कंपनियों में शुमार NCL क्षेत्र में श्रम कानूनों के पालन और निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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जिम्मेदारी को लेकर खड़े हुए सवाल

इस पूरे मामले के सामने आने के बाद कई गंभीर सवाल उठ खड़े हुए हैं। क्या NCL प्रबंधन और संबंधित ठेकेदार अपने यहाँ कार्यरत संविदाकर्मियों को उनके वैध कानूनी अधिकारों के अनुरूप न्यूनतम मजदूरी सुनिश्चित कर रहे हैं? यदि श्रमिकों को तय दरों से कम भुगतान मिल रहा है, तो इसकी जवाबदेही किसकी है? क्या स्थानीय श्रम विभाग इस मामले का संज्ञान लेकर निष्पक्ष जांच करेगा और दोषी पाए जाने वालों पर सख्त कार्रवाई करेगा? फिलहाल, संविदाकर्मियों द्वारा लगाए गए इन गंभीर आरोपों के बाद सभी की निगाहें NCL प्रबंधन और श्रम विभाग के अगले कदमों पर टिकी हैं। यह देखना अहम होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है और श्रमिकों को उनका हक कब तक मिल पाता है।

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