आगरा परिक्षेत्र की रोडवेज बसों में फर्जी यूडीआईडी कार्ड से यात्रा करने वाले रोजाना 12 से 15 लोग पकड़े जा रहे हैं. क्षेत्रीय प्रबंधक बीपी अग्रवाल के मुताबिक, आधुनिक ई-टिकट मशीनों से कार्ड की जांच की जा रही है और फर्जी कार्ड जब्त करने के निर्देश दिए गए हैं.

आगरा. परिक्षेत्र में रोडवेज बसों से फर्जी यूडीआईडी कार्ड के जरिए यात्रा करने के मामले सामने आ रहे हैं. उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (UPSRTC) की आधुनिक ई-टिकट मशीनों की मदद से रोजाना 12 से 15 ऐसे यात्रियों को पकड़ा जा रहा है. क्षेत्रीय प्रबंधक बीपी अग्रवाल ने बताया कि जांच के दौरान फर्जी कार्ड जब्त किए जा रहे हैं, ताकि उनका दोबारा इस्तेमाल न हो सके.

मशीनों से हो रही जांच

बीपी अग्रवाल के अनुसार, आगरा परिक्षेत्र के विभिन्न डिपो की बसों में जांच के दौरान फर्जी यूडीआईडी कार्ड के मामले मिल रहे हैं. परिचालकों को अपडेटेड ई-टिकट मशीनें उपलब्ध कराई गई हैं, जिनसे कार्ड स्कैन कर उनकी वैधता की जांच की जाती है.

पहले कार्डों की जांच के लिए ऐसी डिजिटल व्यवस्था उपलब्ध नहीं थी. परिचालक मैनुअल तरीके से प्रक्रिया पूरी करते थे, जिससे फर्जी कार्ड की पहचान करना मुश्किल होता था. अब मशीनों के इस्तेमाल से ऐसे मामलों का पता लगाने में मदद मिल रही है.

क्या है यूडीआईडी कार्ड

यूडीआईडी यानी यूनिक डिसेबिलिटी आईडी कार्ड दिव्यांगजनों की पहचान के लिए जारी किया जाता है. पात्रता और संबंधित परिवहन निगम के नियमों के अनुसार, इस कार्ड के आधार पर दिव्यांग यात्रियों को बस किराए में छूट या निशुल्क यात्रा की सुविधा मिल सकती है.

हालांकि, यात्रा में मिलने वाली रियायत हर राज्य और बस श्रेणी में समान होना जरूरी नहीं है. इसके लिए संबंधित परिवहन निगम के निर्धारित नियम और पात्रता की शर्तें लागू होती हैं.

फर्जी कार्ड किए जा रहे जब्त

क्षेत्रीय प्रबंधक के मुताबिक, आगरा क्षेत्र में प्रतिदिन 12 से 15 लोग फर्जी यूडीआईडी कार्ड के साथ यात्रा करते हुए पकड़े जा रहे हैं. ऐसे मामलों में टिकट बन जाने के बावजूद कार्ड की वैधता पर सवाल उठने पर जांच की जाती है.

परिचालकों को निर्देश दिए गए हैं कि फर्जी पाए जाने वाले यूडीआईडी कार्ड और उनकी फोटोकॉपी तत्काल जब्त कर लें. इसका उद्देश्य इन दस्तावेजों के दोबारा इस्तेमाल और दुरुपयोग को रोकना है.