कर्ण मिश्रा, ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर में ऑनलाइन दुल्हन की तलाश दो परिवारों को महंगी पड़ गई। बेटे और भाई की शादी की चाहत में दो महिलाएं साइबर ठगों के जाल में फंस गईं और जालसाजों ने उनसे 24 हजार 500 रुपये ऑनलाइन ठग लिए।

फेसबुक पर अनाथ आश्रम में रहने वाली लड़कियों से शादी कराने का विज्ञापन, WhatsApp पर सुंदर लड़कियों की तस्वीरें, 500 रुपये के स्टांप पेपर जैसा फर्जी रजिस्ट्रेशन फॉर्म और शादी में दहेज देने का वीडियो दिखाकर ठगों ने ऐसा भरोसा जीता कि पीड़ितों ने अलग-अलग किश्तों में पैसे ट्रांसफर कर दिए। लेकिन जैसे ही महिलाओं ने वीडियो कॉल पर दुल्हन से बात कराने की मांग की, ठगों ने नंबर ब्लॉक कर दिए।

पूरा मामला ग्वालियर के शब्दप्रताप आश्रम क्षेत्र का है। दरअसल, रामपुरी मोहल्ले में रहने वाली आरती शाक्य और उनकी पड़ोसन पूनम जाटव ने साइबर ठगी की शिकायत की है। दोनों अपने परिवार में शादी के लिए लड़की की तलाश कर रही थीं। इसी दौरान फेसबुक पर उन्हें एक विज्ञापन दिखाई दिया, जिसमें दावा किया गया था कि शादी के लिए परेशान कुंवारे लड़कों का विवाह अनाथ आश्रम की लड़कियों से कराया जाता है।

विज्ञापन में दिए नंबर पर संपर्क करने पर आरोपी ने अपना नाम गौरव शर्मा बताया और इंदौर के ‘गुरूनानक अनाथ आश्रम’ से जुड़े होने का दावा किया। ठग ने भरोसा जीतने के लिए WhatsApp पर 8 से 9 सुंदर लड़कियों की तस्वीरें भेजीं। परिवार को लड़की पसंद आई तो आरोपी ने दूल्हे और दुल्हन की तस्वीर साथ लगाकर 500 रुपये के स्टाम्प पेपर जैसा दिखने वाला फर्जी रजिस्ट्रेशन फॉर्म और मैरिज सर्टिफिकेट का ड्राफ्ट तक भेज दिया। जिसके बदले में 1 हजार रुपये रजिस्ट्रेशन फीस भी वसूली गयी। आरोपी ने 2 अक्टूबर को शादी कराने का भरोसा दिलाया और कहा कि वे केवल एक घंटे के लिए ग्वालियर आएंगे और शादी कराकर वापस लौट जाएंगे। 

इसके बाद ठगी का अगला खेल शुरू हुआ। आरोपी ने WhatsApp पर एक वीडियो भेजा, जिसमें फ्रिज, अलमारी, कूलर, बाइक और दूसरे घरेलू सामान दिखाई दे रहे थे। दावा किया गया कि अनाथ आश्रम की तरफ से लड़की को शादी में ये सामान दहेज के रूप में दिया जाएगा।लेकिन इसका खर्चा दूल्हा पक्ष को उठाना होगा। इसके बाद एक QR कोड भेजकर पैसे ट्रांसफर करने को कहा गया। 

पहली किश्त के तौर पर 7 हजार 500 रुपये ट्रांसफर किए गए, जिसमें खाते का नाम गौरव की जगह ‘तालिम खान’ दिखाई दिया। इसके बाद अलग-अलग किश्तों में कुल 24 हजार 500 रुपये ट्रांसफर करा लिए गए। महिलाओं को जब दुल्हन से शादी से पहले वीडियो कॉल पर बात करने की इच्छा हुई तो आरोपी ने यह कहकर मना कर दिया कि आश्रम में वीडियो कॉल की अनुमति नहीं है, इसके बाद जब तय तारीख को लेकर महिलाओं ने आरोपी से संपर्क करने की कोशिश की तो उसके नंबर बंद आने लगे। WhatsApp पर दोनों महिलाओं को ब्लॉक कर दिया गया। तब उन्हें एहसास हुआ कि शादी कराने के नाम पर उनके साथ साइबर ठगी हो चुकी है।

पीड़िता आरती शाक्य के मुताबिक उनके पति मजदूरी करते हैं और परिवार ने उधार लेकर ये रकम जुटाई थी। उम्मीद थी कि घर में बेटे की शादी होगी तो बहू आएगी और धीरे-धीरे उधार चुकाया जाएगा।वहीं पूनम जाटव का कहना है कि कम पढ़े-लिखे होने के कारण वे फर्जी दस्तावेज और वीडियो देखकर आरोपी के झांसे में आ गईं। उन्हें उम्मीद थी कि भाई की शादी होगी तो घर में खुशियां आएंगी। साथ ही अनाथआलय की बेटी को भी परिवार मिल जाएगा। अब दोनों महिलाओं ने आरोपी पर कार्रवाई और ठगी की रकम वापस दिलाने की मांग की है।

मामले की शिकायत  लिखित रूप से पुलिस से की गई है। पुलिस ने शिकायत को जांच में लिया है। पुलिस के शिकायत की पुष्टि के बाद जिस मोबाइल नंबर से महिलाओं से संपर्क किया गया था,उसकी डिटेल निकालेगी। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। यानी शादी के नाम पर सोशल मीडिया पर चल रहे आकर्षक विज्ञापन से सावधान रहना जरूरी है, क्योंकि एक क्लिक, एक WhatsApp चैट और एक QR कोड ने दो परिवारों से उनकी मेहनत की कमाई छीन ली।

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