मुकेश सेन, टीकमगढ़। मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले में खाद की किल्लत एक बार फिर अन्नदाताओं के लिए बड़ी मुसीबत बनती जा रही है। जिला प्रशासन भले ही टोकन व्यवस्था के जरिए किसानों को राहत देने और सुगम वितरण के दावे कर रहा हो, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोल रही है। ताजा मामला पलेरा कस्बे का है, जहां समय पर खाद न मिलने से नाराज किसानों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने जतारा-पलेरा मार्ग पर चक्काजाम कर दिया।
सड़क पर बैठे किसान, यातायात हुआ बाधित
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पलेरा कस्बे में खाद के लिए परेशान किसानों को जब हर तरफ से निराशा हाथ लगी, तो वे उग्र हो गए और मुख्य मार्ग पर बैठ गए। किसानों के अचानक सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करने से जतारा-पलेरा मार्ग पर वाहनों की लंबी-लंबी कतारें लग गईं और आवागमन पूरी तरह से प्रभावित हो गया। प्रदर्शन कर रहे किसानों का कहना है कि खेती-किसानी के इस अहम समय में उन्हें खाद के लिए भारी जद्दोजहद करनी पड़ रही है। कभी फार्मिंग आईडी बनवाने की समस्याएं तो कभी आईडी में तकनीकी खामियों के नाम पर उन्हें दौड़ाया जाता है।
प्रशासन के दावों पर खड़े हुए सवाल
प्रशासन ने किसानों की सुविधा के लिए टोकन व्यवस्था लागू की थी और यह दावा किया था कि इससे लाइनों से मुक्ति मिलेगी और आसानी से खाद उपलब्ध होगा। लेकिन पलेरा में सामने आई इन तस्वीरों ने प्रशासनिक व्यवस्था की पोल खोल दी है। किसानों ने मांग की है कि उन्हें तत्काल पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध कराई जाए, ताकि उनकी फसल बर्बाद न हो। अब देखने वाली बात यह होगी कि पलेरा के इस उग्र प्रदर्शन के बाद जिला प्रशासन और कृषि विभाग इस समस्या के समाधान के लिए क्या कदम उठाता है और कब तक किसानों को खाद के लिए लाइनों और सड़कों पर संघर्ष से मुक्ति मिलती है।
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