मुंबई। तुकाराम मुंढे के नेतृत्व में महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने भिवंडी में एक अभियान चलाया, जिसमें 33 करोड़ रुपये मूल्य के एक्सपायर्ड, खराब और रिजेक्ट किए गए खाद्य उत्पाद मिले। इस खुलासे से चिंता बढ़ गई है कि बड़ी खाद्य कंपनियों द्वारा नष्ट करने के लिए चिह्नित किया गया स्टॉक, शायद वापस बाजार में लाकर ग्राहकों को बेच दिया गया था।

FDA ने 14 और 15 अक्टूबर को एक साथ कई जगहों पर निरीक्षण किया। टीमों ने खाद्य रिटेलर्स, गोदामों और कचरा निस्तारण (वेस्ट-डिस्पोजल) करने वाले ठेकेदारों की जांच की, ताकि नष्ट करने के लिए चिह्नित किए गए उत्पादों का पता लगाया जा सके। इस जांच के आधार पर, खाद्य कंपनियों, गोदामों, डिस्पोजल एजेंसियों और स्थानीय व्यापारियों से जुड़े 10 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है।

इस अभियान के दौरान FDA अधिकारियों ने भिवंडी के गुलजार नगर इलाके में एक डिस्काउंट स्टोर की जांच की। वहां उन्हें 18 तरह के एक्सपायर्ड, खराब और लीक हो रहे खाद्य उत्पाद मिले, जिनकी कीमत 80,575 रुपये थी। FIR के अनुसार, दुकान के पास जरूरी खाद्य लाइसेंस नहीं था। साथ ही, अधिकारियों को वहां कोई खरीद बिल, स्टॉक आने का रिकॉर्ड या सप्लायर की जानकारी भी नहीं मिली।

दुकान संचालक ने जांचकर्ताओं को बताया कि यह स्टॉक गुलजार अब्दुल मुबीन खान के पास से आया था। इसके बाद अधिकारियों ने चाविंड्रा में खान के ठिकाने की जांच की। वहां उन्हें 23 तरह के एक्सपायर्ड, खराब और लीक हो रहे उत्पाद मिले, जिनकी कीमत 86,825 रुपये थी। इस स्टॉक को जब्त कर लिया गया और वहां का काम रोक दिया गया।

जांच के दौरान अधिकारी ‘BK डिस्पोज’ (BK Dispose) नाम की एक फर्म तक पहुंचे, जिसे भिवंडी के खोनी और कंबा इलाकों में बाबर मियाज अहमद सिद्दीकी चलाते हैं। जांचकर्ताओं को वहां कई कंपनियों का एक्सपायर्ड स्टॉक मिला। वहां मौजूद रिकॉर्ड इतने अधूरे थे कि यह पता नहीं चल सका कि ये उत्पाद कब आए, इन्हें कैसे इधर-उधर ले जाया गया, या इन्हें नष्ट किया गया था या नहीं।

FIR के अनुसार, खोनी से 17,382 किलोग्राम स्टॉक जब्त किया गया, जिसकी कीमत 2.40 करोड़ रुपये है। इसके अलावा, कंबा से 2,198 किलोग्राम स्टॉक जब्त किया गया, जिसकी कीमत 2.53 लाख रुपये है।

डिस्पोजल रिकॉर्ड की जांच जारी

FDA की टीमों ने रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स और रिलायंस रिटेल द्वारा संचालित गोदामों का भी निरीक्षण किया। उन्होंने ज़ोमैटो हाइपरप्योर की एक सुविधा (फैसिलिटी) की जांच की, जो ब्लिंकइट कॉमर्स को सेवाएं देती है। इस जांच के दौरान एक्सपायर हो चुके या खराब सामान को लाने-ले जाने और उसे नष्ट करने के रिकॉर्ड को लेकर सवाल उठे।

एफआईआर के अनुसार, रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स के वाडपे वेयरहाउस में अधिकारियों को लगभग 4,659 किलोग्राम एक्सपायर हो चुका सामान मिला, जिसकी कीमत 3.72 लाख रुपये थी। इसके अलावा, उन्हें 1,414.19 किलोग्राम खराब सामान भी मिला, जिसकी कीमत 1.20 लाख रुपये थी।

जांचकर्ताओं का कहना है कि कंपनी ऐसे पर्याप्त दस्तावेज पेश नहीं कर सकी, जिनसे यह साबित हो सके कि इस सामान को ‘ग्रीन अर्थ वेस्ट मैनेजमेंट सर्विसेज’ के जरिए ले जाया गया, तौला गया और अंत में नष्ट कर दिया गया।

रिलायंस रिटेल की एक सुविधा में अधिकारियों को लगभग 54,265 रुपये कीमत का खराब सामान मिला। इसे ‘एसके ट्रेडर्स’ के साथ सामान नष्ट करने की एक प्रस्तावित व्यवस्था से जोड़ा गया था। हालांकि, ठेकेदार के पास जरूरी अधिकार (ऑथराइजेशन) होने की पुष्टि करने वाले कोई रिकॉर्ड नहीं मिले।

ज़ोमैटो हाइपरप्योर की सुविधा में अधिकारियों को एक्सपायर हो चुके और असुरक्षित उत्पाद मिले। कुछ पैकेट लीक हो रहे थे या चूहों द्वारा खराब कर दिए गए थे।

एफआईआर में इस दावे पर भी सवाल उठाए गए हैं कि एक्सपायर हो चुका सामान बेंगलुरु की ‘पैन इंडिया ग्रोसरी डंप’ नाम की किसी जगह पर भेजा गया था। शुरुआती जांच से पता चला है कि शायद ऐसी कोई जगह मौजूद ही नहीं है।

एफडीए को शक है कि कंपनी के वेयरहाउस से निकला सामान, कचरा नष्ट करने वाले ठेकेदारों और बिचौलियों के हाथों से होकर गुजरा हो सकता है। इसके बाद, यह सामान फिर से बेचने के लिए स्थानीय सप्लायरों और खुदरा विक्रेताओं (रिटेलर्स) तक पहुंच गया होगा।

एफआईआर में 33.71 करोड़ रुपये कीमत के खाद्य स्टॉक को इस मामले से जुड़ी संपत्ति के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।

इसके अलावा, एफडीए की एक आंतरिक रिपोर्ट में बताया गया है कि महाराष्ट्र में रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स, रिलायंस रिटेल, ज़ोमैटो हाइपरप्योर और ब्लिंकइट की सुविधाओं से जुड़े पांच खाद्य सुरक्षा लाइसेंस निलंबित (सस्पेंड) कर दिए गए हैं। यह कार्रवाई 15 अक्टूबर को हुई सुनवाई के बाद की गई है।

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