कला और संस्कृति की वैश्विक राजधानी पेरिस के पास स्थित बुसी-सेंट-जॉर्जेस में फ्रांस का पहला पारंपरिक बी.ए.पी.एस. स्वामिनारायण हिंदू मंदिर बनकर तैयार हो गया है। 5,000 वर्ग मीटर (53,800 वर्ग फुट) में फैले इस भव्य मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा 6 सितंबर को महंत स्वामी महाराज के हाथों संपन्न होगी।
यह मंदिर भारतीय वास्तु कला और फ्रेंच इंजीनियरिंग का उत्कृष्ट समन्वय है। इसे बिना ईंटों के, ग्रीस के थासोस संगमरमर, भारत के अंबाजी संगमरमर, ग्वालियर के बलुआ पत्थर तथा इटली और वियतनाम के पत्थरों से तैयार किया गया है। मंदिर में 5 शिखर, 10 गुंबद, 20 नक्काशीदार स्तंभ और 120 झरोखे हैं।
इसके 1,000 से अधिक पत्थर और काष्ठ घटक भारत के कुशल शिल्पकारों द्वारा तराशे गए हैं। इसके निर्माण में प्रख्यात नोत्र-दाम कैथेड्रल के पुनर्स्थापन से जुड़े विशेषज्ञों ने भी योगदान दिया है।
यह परिसर केवल उपासना स्थल ही नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक और सामाजिक केंद्र के रूप में कार्य करेगा। इसमें सभागार, क्लासरूम, स्पोर्ट्स हॉल और प्रदर्शनी कक्ष के साथ-साथ वर्षा जल संचयन और सोलर/ग्रीन तकनीक जैसी पर्यावरण-अनुकूल सुविधाएं शामिल हैं।
मंदिर के लोकार्पण के अवसर पर 2 से 14 सितंबर तक 13 दिवसीय ‘फेस्टिवल ऑफ कल्चर’ का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें 42 देशों से श्रद्धालु भाग ले रहे हैं।
महोत्सव के प्रमुख आकर्षण:
2 सितंबर: महिलाओं द्वारा भव्य पालखी यात्रा और वैदिक महायज्ञ की शुरुआत।
3 सितंबर: सेन नदी में 11 सुसज्जित नौकाओं के साथ भव्य जल यात्रा।
5 सितंबर: पेरिस के प्रसिद्ध स्थानों से 14 रथों की सांस्कृतिक नगरयात्रा।
6 सितंबर: मूर्ति प्रतिष्ठा एवं औपचारिक लोकार्पण समारोह।
यह मंदिर फ्रांस में अंतर-सांस्कृतिक संवाद, बंधुत्व और सर्वसमावेशकता का नया प्रतीक बनेगा।
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