सतीश सिंह, लखनऊ. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि बाढ़ हो या सूखा, प्रत्येक नागरिक की सुरक्षा, किसानों की फसल और आमजन की आजीविका की रक्षा करना प्रदेश सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अनियमित वर्षा से उत्पन्न सूखे और बाढ़ की दोहरी चुनौती से निपटने के लिए पूरी तत्परता के साथ कार्य किया जाए तथा प्रत्येक प्रभावित व्यक्ति तक समयबद्ध राहत पहुंचाई जाए.
सोमवार को आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि कम वर्षा वाले क्षेत्रों में खेती प्रभावित नहीं होनी चाहिए. नहरों, जलाशयों, राजकीय नलकूपों एवं अन्य उपलब्ध सिंचाई संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित किया जाए. बोआई और सिंचाई के रियल टाइम आंकड़ों की नियमित समीक्षा कर किसानों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जाए. जहां वर्षा की कमी के कारण बोआई प्रभावित होने की आशंका हो, वहां कृषि एवं सिंचाई विभाग संयुक्त कार्ययोजना बनाकर तत्काल राहत उपलब्ध कराएं.
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मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि बाढ़ प्रभावित एवं संवेदनशील जनपदों में अगले तीन दिनों के भीतर सभी राहत शिविर पूरी तरह तैयार कर लिए जाएं. राहत शिविरों में ताजा एवं पौष्टिक भोजन, स्वच्छ पेयजल, चिकित्सा सुविधा और स्वच्छता की समुचित व्यवस्था हो. बच्चों को डेयरी के माध्यम से दूध उपलब्ध कराया जाए और महिलाओं, वृद्धजनों, दिव्यांगजनों और गर्भवती महिलाओं की आवश्यकताओं का विशेष ध्यान रखा जाए.
सीएम ने कहा कि राहत आयुक्त कार्यालय का कंट्रोल रूम 24 घंटे सक्रिय रहे और प्रत्येक घंटे की अद्यतन जानकारी मुख्यमंत्री कार्यालय, डीजीपी कार्यालय तथा संबंधित राहत एजेंसियों को उपलब्ध कराई जाए. तटबंधों की चौबीसों घंटे निगरानी और नियमित पेट्रोलिंग सुनिश्चित की जाए और जहां आवश्यकता हो, वहां बड़ी नौकाओं और ‘आपदा मित्रों’ की सेवाएं ली जाएं. बैठक में बताया गया कि बाढ़ की दृष्टि से संवेदनशील 44 जनपदों में व्यापक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं. 1,694 राहत शरणालयों में लगभग 5.14 लाख लोगों को आश्रय देने की क्षमता विकसित की गई है. राहत कार्यों के लिए 1,412 बाढ़ चौकियां, 549 मेडिकल टीमें, 55 नाव और मोटरबोट समेत 910 पशु शरणालय भी सक्रिय किए गए हैं.


