रायपुर। भारत सरकार द्वारा राज्यों में नियोजन व्यवस्था को सरल, व्यावहारिक और विकासोन्मुख बनाने के लिए किए जा रहे सुधारों के अनुरूप छत्तीसगढ़ ने भूमि उपयोग व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। इससे पहले Special Assistance to States for Capital Investment (SASCI) के अंतर्गत Urban Planning Reforms के तहत राज्य ने विभिन्न सुधार अपनाए, जिसके लिए छत्तीसगढ़ को वर्ष 2024-25 में 800 करोड़ रुपये तथा वर्ष 2025-26 में 85 करोड़ रुपये की सहायता प्राप्त हुई है।
अब भारत सरकार के Deregulation और Compliance Burden Reduction सुधारों के अनुरूप छत्तीसगढ़ भूमि विकास नियम, 1984 में संशोधन किया गया है। इसका उद्देश्य भूमि उपयोग संबंधी प्रावधानों को सरल और लचीला बनाना, अनुपालन बोझ कम करना तथा राज्य में Ease of Doing Business को बेहतर करना है।

संशोधित व्यवस्था में विभिन्न भूमि उपयोग श्रेणियों के लिए Negative List आधारित मॉडल अपनाया गया है। इसके तहत प्रत्येक श्रेणी में अनुपयुक्त गतिविधियों को स्पष्ट रूप से चिन्हित किया गया है, जबकि अन्य अनुमत्य गतिविधियों के लिए अधिक व्यापक गुंजाइश दी गई है। इससे नियोजन व्यवस्था बदलती आर्थिक जरूरतों और नई गतिविधियों के अनुरूप अधिक लचीली होगी।
भारत सरकार के सुधारों की इसी दिशा में त्रिपुरा, मध्यप्रदेश, राजस्थान सहित कई राज्यों ने भी अपने Development Control Regulations (DCR) में Negative List मॉडल अपनाया है। इन राज्यों की तर्ज पर छत्तीसगढ़ ने भी भूमि उपयोग नियमन को अधिक लचीला बनाने की पहल की है।
संशोधित प्रावधानों में विभिन्न भूमि उपयोगों के बीच अनुमत्य गतिविधियों में अधिक लचीलापन दिया गया है। इसमें आम नागरिकों की दैनिक आवश्यकताओं और सुविधा को ध्यान में रखते हुए Mixed Use को बढ़ावा दिया गया है। आवासीय और वाणिज्यिक गतिविधियों के बेहतर समावेश से लोगों को अपने निवास के आसपास ही विभिन्न आवश्यक सुविधाएं और सेवाएं उपलब्ध हो सकेंगी, जिससे रहने और काम करने के स्थानों के बीच यात्रा समय कम करने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही अस्पताल और स्कूल जैसी जन-आवश्यक सुविधाओं को आवासीय एवं वाणिज्यिक भूमि उपयोग में अनुमत्य किया गया है।
कार्यालयों को भी आवासीय एवं वाणिज्यिक भूमि उपयोग में अनुमति दी गई है, जिससे रोजगार और कार्यस्थल को आवासीय क्षेत्रों के अधिक निकट लाने में सुविधा होगी। औद्योगिक क्षेत्रों में कार्यरत लोगों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए हॉस्टल, डॉर्मिटरी तथा संबंधित श्रमिकों के लिए आवास जैसी सुविधाओं को भी अनुमत्य गतिविधियों में शामिल किया गया है। वहीं, मनोरंजन भूमि उपयोग में शमशान एवं कब्रिस्तान से संबंधित आवश्यक गतिविधियों को भी अनुमत्य किया गया है। इस प्रकार भूमि उपयोग व्यवस्था को लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों और बदलती सामाजिक-आर्थिक आवश्यकताओं के अनुरूप अधिक लचीला बनाया गया है।
शहरीकरण और आर्थिक गतिविधियों के विस्तार के साथ आवास, व्यापार, सेवाओं और रोजगार से जुड़ी जरूरतें लगातार बदल रही हैं। ऐसे में सरल नियम और कम अनुपालन बोझ विकास परियोजनाओं को गति देने के साथ राज्य में निवेश के लिए अधिक अनुकूल वातावरण तैयार कर सकते हैं। भारत सरकार के Deregulation और Compliance Burden Reduction सुधारों के अनुरूप किया गया यह बदलाव नियोजन व्यवस्था को अधिक स्पष्ट और व्यावहारिक बनाने के साथ Ease of Doing Business, निवेश और विकास को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
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