Odisha Desk, भुवनेश्वर: ओडिशा के पुरी में विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा के दौरान मची भगदड़ और सांस फूलने से हुई श्रद्धालु की मौत की घटना को ओडिशा राज्य मानवाधिकार आयोग (OHRC) ने बेहद गंभीरता से लिया है। मानवाधिकार आयोग ने इस दर्दनाक हादसे पर स्वतः संज्ञान लेते हुए राज्य के गृह विभाग के प्रमुख सचिव और पुरी के जिलाधिकारी (कलेक्टर) को नोटिस जारी कर विस्तृत जवाब तलब किया है।

घायलों को बेहतर इलाज देने का निर्देश

आयोग ने राज्य के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग को सख्त निर्देश जारी किए हैं कि रथ यात्रा के दौरान मची आपाधापी में घायल हुए सभी श्रद्धालुओं को तुरंत और उच्च स्तरीय चिकित्सा सेवा उपलब्ध कराई जाए। इलाज में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

आगामी ‘बहुड़ा यात्रा’ के लिए पुख्ता सुरक्षा के निर्देश

रथ यात्रा के बाद होने वाली भगवान जगन्नाथ की वापसी यात्रा यानी ‘बहुड़ा यात्रा’ (Bahuda Yatra) को पूरी तरह सुरक्षित और सुव्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने के लिए आयोग ने कमर कस ली है। मानवाधिकार आयोग ने राज्य गृह विभाग, पुरी के जिलाधिकारी और पुरी के पुलिस अधीक्षक (SP) को अलग-अलग पत्र लिखकर कड़े और आवश्यक सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं, ताकि भविष्य में ऐसी किसी भी घटना की पुनरावृत्ति न हो।

अधिवक्ता की याचिका पर आया आदेश: यह महत्वपूर्ण आदेश मानवाधिकार आयोग ने जाने-माने अधिवक्ता निशिकांत मिश्रा द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए जारी किया है। याचिका में रथ यात्रा के दौरान प्रशासन की कथित चूक और कुप्रबंधन का मुद्दा उठाया गया था।

भक्तों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता

आयोग ने स्पष्ट रूप से कहा है कि रथ यात्रा जैसे विशाल धार्मिक समागमों में देश-विदेश से आने वाले लाखों भक्तों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। प्रशासन को भीड़ नियंत्रण के लिए पुख्ता रणनीति बनानी चाहिए, ताकि आने वाले समय में ऐसी दुखद घटनाएं दोबारा न घटें।

इस घटना के बाद से ही पुरी प्रशासन और पुलिस विभाग अलर्ट मोड पर हैं और आगामी त्यौहारों के लिए सुरक्षा व्यवस्था की नए सिरे से समीक्षा की जा रही है।

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