सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस संजय किशन कौल ने एक साक्षात्कार में कहा है कि सत्ता में कोई भी सरकार रही हो, वह हमेशा ऐसे जजों को पसंद करती है जो उसकी विचारधारा और फैसलों का समर्थन करते हैं. पर इसके बावजूद यह जजों पर निर्भर होता है कि वह क्या रुख रखें. उनका मानना है कि अधिकांश जज आज भी स्वतंत्र हैं और न्यायिक मामलों में सरकार का डटकर मुकाबला करने में सक्षम हैं.
जस्टिस कौल की ‘विदाउट फियर ऑर फेवर’ नाम की किताब जल्द ही प्रकाशित होने वाली है. इसमें न्यायपालिका और सरकार के बीच संबंधों पर रोशनी डाली गई है.
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस संजय किशन कौल ने एक इंटरव्यू में कहा है कि सरकार ऐसे जजों को पसंद करती रही है, जो उसकी बातों से सहमत होते रहे हैं, और ऐसा आज से नहीं बल्कि अतीत से होता आ रहा है. उन्होंने कहा कि न्यायपालिका को अपनी स्वतंत्रता बचाने के लिए मजबूती से खड़ा रहना चाहिए.
एक इंटरव्यू में जस्टिस कौल से पूछा गया था कि सरकार स्वतंत्र या आज्ञाकारी न्यायपालिका में किसको पसंद करती है. जिसके जवाब में उन्होंने ये सब बातें कही.
जस्टिस कौल ने कहा कि सरकार से बातचीत करने से पहले, कॉलेजियम को नामों पर स्वतंत्र रूप से विचार-विमर्श करना चाहिए. जस्टिस संजय किशन कौल की ये टिप्पणियां न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच चल रही बहस के बीच आई हैं, खासकर कॉलेजियम सिस्टम और जजों की नियुक्ति को मंजूरी देने में हो रही देरी को लेकर.
जस्टिस कौल ने पूर्व CJI डीवाई चंद्रचूड़ के जजों की नियुक्ति के तरीके की आलोचना की. पूर्व सीजेआई चंद्रचूड़ का जिक्र करते हुए जस्टिस कौल ने इंटरव्यू में आगे कहा कि मैंने कहा है कि नियुक्ति प्रक्रिया में वे सरकार के प्रति काफी नरम रुख रखते हैं. उन्होंने कहा कि कॉलेजियम को स्वतंत्र रूप से फैसले लेने चाहिए और सरकार से पहले ही मंजूरी लेने से बचना चाहिए.
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