Gajendra Singh Shekhawat on Kharge Remark: केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिवंगत पिता पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की कथित टिप्पणी को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा है। सोमवार को अपने आवास पर मीडिया से बातचीत में शेखावत ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में इस तरह की टिप्पणियों की कोई जगह नहीं है। उन्होंने कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व पर भी सवाल उठाए। इसके साथ ही शेखावत ने कांग्रेस के आंदोलन के उद्देश्य और उसमें शामिल संगठनों की भूमिका को लेकर स्पष्टीकरण मांगा।

खरगे की टिप्पणी को लेकर कांग्रेस पर निशाना

शेखावत ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की माताजी को लेकर भी पहले इस तरह की टिप्पणी की गई थी और अब उनके दिवंगत पिता को लेकर बयान सामने आया है। उन्होंने इसे कांग्रेस के मौजूदा नेतृत्व की मानसिकता से जोड़ते हुए आलोचना की। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि लोकतांत्रिक राजनीति में सभी दलों को अपने मुद्दे जनता के सामने रखने का अधिकार है, लेकिन इसके लिए अपनाई जाने वाली भाषा और तरीका भी महत्वपूर्ण है।

कांग्रेस के आंदोलन के उद्देश्य पर सवाल

शेखावत ने कांग्रेस के आंदोलन को लेकर कहा कि पार्टी को पहले स्पष्ट करना चाहिए कि वह किन मुद्दों को लेकर जनता के बीच जाना चाहती है। उनके मुताबिक, आंदोलन का उद्देश्य स्पष्ट होने पर ही जनता के सामने उसकी बात प्रभावी ढंग से रखी जा सकेगी। उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस केवल कार्यकर्ताओं को जुटाकर भाषण देकर लौटती है, तो इससे आंदोलन का उद्देश्य स्पष्ट नहीं होगा। शेखावत ने पार्टी से अपने मुद्दों को साफ तौर पर सामने रखने की बात कही।

आंदोलन में शामिल समूहों को लेकर भी टिप्पणी

केंद्रीय मंत्री ने अपने बयान में आंदोलन में शामिल कुछ अन्य समूहों और व्यक्तियों का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलन से जुड़े कुछ लोगों की विचारधारा और बयानों को लेकर सवाल उठते हैं। उन्होंने बांग्लादेश से प्रेरणा लेने और संसद के बजाय सड़क पर नीतियों का फैसला करने संबंधी कथित बयानों का भी उल्लेख किया।

सियासी बयानबाजी के बीच बढ़ा विवाद

प्रधानमंत्री के दिवंगत पिता पर खरगे की कथित टिप्पणी और उस पर शेखावत की प्रतिक्रिया के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। शेखावत ने कांग्रेस नेतृत्व से अपने रुख को स्पष्ट करने की मांग की है। वहीं, उनके बयान में कांग्रेस के आंदोलन और उसमें शामिल समूहों को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।

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