Dharam Desk :- गणेश उत्सव के अंतिम दिन भक्त गणेशजी को भावपूर्ण विदाई देते हैं। अनंत चतुर्दशी को गणेश विसर्जन के लिए विशेष माना जाता है। 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी है। इस दिन घरों और गणेश पंडालों में विराजमान बप्पा की पूजा-अर्चना के बाद विधि-विधान से उनकी प्रतिमा का विसर्जन किया जाएगा । हालांकि, हर परिवार में विर्जसन की परंपरा एक जैसी नहीं होती है। सार्वजनिक गणेश पंडालों में स्थापित बड़ी प्रतिमाओं का विसर्जन अनंत चतुर्दशी के दिन किया जाएगा।
गणेश विसर्जन का शुभ मुहूर्त
25 सितंबर को गणेश विसर्जन के लिए कई शुभ मुहूर्त बताए गए हैं। सुबह 6:11 बजे से 10:42 बजे तक चल, लाभ और अमृत मुहूर्त रहेगा। इसके बाद दोपहर में 12:13 बजे से 1:43 बजे तक शुभ मुहूर्त रहेगा। शाम को 4:44 बजे से 6:14 बजे तक चल मुहूर्त में विसर्जन किया जा सकता है। वहीं, रात में 9:14 बजे से 10:43 बजे तक लाभ मुहूर्त रहेगा। इसके बाद 26 सितंबर को भी रात से लेकर तड़के तक शुभ, अमृत और चर मुहूर्त रहने की जानकारी दी गई है। पंचांग के अनुसार, चतुर्दशी तिथि 25 सितंबर की रात 11:06 बजे तक रहेगी।

गणेश विसर्जन की क्या है विधि?
गणेश विसर्जन से पहले घर में भगवान गणेश की विधिवत पूजा करें। बप्पा को फूल, फल और पसंदीदा भोग अर्पित करने के बाद आरती करें। इस दौरान परिवार के लोग भगवान गणेश से सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं। इसके बाद प्रतिमा को सम्मानपूर्वक विसर्जन स्थल तक ले जाए। सार्वजनिक आयोजनों में ढोल-नगाड़ों और भजनों के बीच गणपति बप्पा को विदाई होगी। भक्त ‘गणपति बप्पा मोरया’ के जयकारे लगाते हुए उन्हें अगले वर्ष फिर आने का निमंत्रण देंगे।
गणेश विसर्जन घर पर भी कर सकते हैं
अगर घर में स्थापित गणेश प्रतिमा का विसर्जन करना हो तो इसके लिए साफ और पर्याप्त बड़े बर्तन या कृत्रिम विसर्जनकुंड का उपयोग किया जा सकता है। उसमें स्वच्छ जल भरकर श्रद्धापूर्वक प्रतिमा का विसर्जन किया जाता है। वर्तमान समय में पर्यावरण संरक्षण को देखते हुए कई श्रद्धालु घर पर ही विसर्जन करना पसंद करते है। सार्वजनिक पंडालों की प्रतिमाओं के लिए स्थानीय प्रशासन द्वारा निर्धारित विसर्जन स्थलों करना सही होगा। विसर्जन के दौरान स्थानीय नियमों का पालन करना और नदियों, तालाबों या अन्य जल स्रोतों को प्रदूषित होने से बचाना भी जरूरी है।


