गया। जिले में खुशी का माहौल उस वक्त अफरा-तफरी में बदल गया जब एक तिलक समारोह में भोजन करने के बाद 40 से अधिक लोग अचानक बीमार पड़ गए। मामला गुरुआ प्रखंड के धाना विगहा गांव का है। प्राथमिक जांच में इसे ‘फूड प्वाइजनिंग’ (खाद्य विषाक्तता) का मामला माना जा रहा है।

​तिलक समारोह के जश्न में पड़ा खलल

​जानकारी के अनुसार, धाना विगहा निवासी शिक्षक रमेश दास के भांजे के तिलक समारोह का भव्य आयोजन किया गया था। इस कार्यक्रम में न केवल गांव के सैकड़ों लोग शामिल हुए थे, बल्कि दूर-दराज से आए रिश्तेदारों की भी भारी मौजूदगी थी। तिलक की रस्म पूरी होने के बाद सभी के लिए सामूहिक भोज की व्यवस्था की गई थी। मेहमानों ने बड़े उत्साह के साथ भोजन ग्रहण किया, लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि यह भोजन उनके स्वास्थ्य के लिए संकट बन जाएगा।

​अचानक बिगड़ने लगी दर्जनों लोगों की तबीयत

​भोज समाप्त होने के कुछ ही देर बाद एक-एक कर कई लोगों को जी मिचलाने, तेज पेट दर्द, लगातार उल्टी और दस्त की शिकायत होने लगी। शुरुआत में इसे सामान्य समझकर नजरअंदाज किया गया, लेकिन देखते ही देखते बीमार पड़ने वालों की कतार लग गई। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, सभी एक जैसे लक्षणों से कराहने लगे। गांव में स्थिति गंभीर होते देख हड़कंप मच गया और आनन-फानन में वाहनों का इंतजाम कर पीड़ितों को अस्पताल ले जाया जाने लगा।

​अस्पताल में मची अफरा-तफरी, चिकित्सा टीम मुस्तैद

​परिजनों और ग्रामीणों की तत्परता से अधिकांश बीमार लोगों को गुरुआ स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में भर्ती कराया गया। वहीं, कुछ लोगों ने गंभीर स्थिति को देखते हुए आसपास के निजी क्लीनिकों का रुख किया। एक साथ इतनी बड़ी संख्या में मरीजों के अस्पताल पहुंचने से वहां कार्यरत स्वास्थ्य कर्मियों के बीच भी खलबली मच गई। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए चिकित्सकों की विशेष टीम ने तुरंत कमान संभाली और मरीजों को प्राथमिक उपचार के साथ जरूरी दवाइयां और स्लाइन (IV Fluids) उपलब्ध कराना शुरू किया।

​डॉक्टर का बयान: फिलहाल खतरे से बाहर हैं मरीज

​सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के डॉ. नीतीश कुमार ने स्थिति पर स्पष्टीकरण देते हुए बताया कि शुरुआती लक्षणों को देखते हुए यह स्पष्ट रूप से फूड प्वाइजनिंग का मामला है। उन्होंने राहत की खबर देते हुए कहा, सभी मरीजों की स्थिति फिलहाल स्थिर और सामान्य है। किसी की भी हालत चिंताजनक नहीं है। समय रहते अस्पताल पहुंचने और तुरंत इलाज मिलने से मरीजों के स्वास्थ्य में तेजी से सुधार हो रहा है।

​प्रभावित लोगों की सूची और वर्तमान स्थिति

​बीमार होने वालों में मुख्य रूप से सुनीता देवी (35), प्रेमनी देवी (44), रौशन कुमार (17), आनंद कुमार (22), रमेश राम (45), राहुल राज (28), आकाश कुमार (30), कुंदन कुमार (25) और 10 वर्षीय बालक अंकुश कुमार सहित दर्जनों ग्रामीण शामिल हैं। भर्ती मरीज रमेश राम ने बताया कि भोजन करने के कुछ समय बाद ही उन्हें बेचैनी और पेट में मरोड़ महसूस होने लगी थी। फिलहाल स्वास्थ्य विभाग गांव में खाने के नमूनों की जांच और स्वच्छता के पहलुओं पर विचार कर रहा है।