गया। जिले के परैया प्रखंड अंतर्गत प्रभुआ गांव में मंगलवार (27 अक्टूबर 2026) को सांप काटने की वजह से एक ही परिवार में पति-पत्नी दोनों की मौत हो गई। इस घटना के बाद घर के चार मासूम बच्चे पूरी तरह अनाथ हो गए हैं, जिनके सिर से माता-पिता दोनों का साया उठ चुका है। इस दुखद घड़ी में पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाने और सहायता पहुंचाने के लिए विभिन्न सामाजिक संगठन आगे आ रहे हैं।

​कुम्हार प्रजापति समन्वय समिति ने दी आर्थिक मदद

​घटना की जानकारी मिलने के बाद बिहार कुम्हार प्रजापति समन्वय समिति के पदाधिकारियों ने शुक्रवार को शोकाकुल परिवार से मुलाकात की। समिति के सदस्यों ने शोक संतप्त परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की और उन्हें हरसंभव मदद का भरोसा दिलाते हुए आर्थिक सहायता प्रदान की।
​इस दौरान मौके पर समिति के कई प्रमुख पदाधिकारी मौजूद रहे, जिनमें:

  • ​अध्यक्ष कृष्ण कुमार अजय
  • ​जिला सचिव विनोद कुमार
  • ​पूर्व जिला अध्यक्ष नंदलाल प्रजापति
  • ​जिला युवा अध्यक्ष धर्मेंद्र कुमार प्रजापति
  • ​मानपुर प्रखंड अध्यक्ष विनोद पंडित
  • ​गुरारू प्रखंड अध्यक्ष लक्ष्मण प्रजापति
  • ​सचिव श्रीराम प्रजापति
  • ​कोषाध्यक्ष विवेक कुमार बिट्टू
  • ​शामिल थे। इन सभी ने परिवार को ढांढस बंधाते हुए संकट की इस घड़ी में साथ खड़े रहने का संकल्प लिया।

दीर्घकालीन सहायता की पुरजोर मांग

​समिति के पदाधिकारियों ने जिला प्रशासन और बिहार सरकार से इस अत्यंत संवेदनशील मामले में संज्ञान लेने की अपील की है। उन्होंने मांग की है कि इस पीड़ित परिवार को विशेष रूप से चिह्नित कर फौरी राहत के साथ-साथ दीर्घकालीन आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाए।

​मासूम बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए समिति ने प्रमुख मांगें रखी हैं:

  • ​शिक्षा की मुमुक्ष व्यवस्था: बच्चों की पढ़ाई बीच में बिल्कुल न छूटे, इसके लिए सरकार उनकी स्कूली से लेकर उच्च शिक्षा तक का पूरा खर्च उठाए।
  • ​रोजगार और संरक्षण: बच्चों के बालिग होने के बाद उनके रोजगार और आजीविका के साधन जुटाने में सरकारी स्तर पर पूरा सहयोग मिलना चाहिए।
  • ​विवाह व भविष्य की सुरक्षा: भविष्य में बच्चों के विवाह के समय परिवार को आर्थिक संकट का सामना न करना पड़े, इसके लिए अभी से विशेष संरक्षण की व्यवस्था हो।

​प्रशासनिक सहयोग की दरकार

​माता-पिता को खो चुके इन चार मासूमों के सामने अब जीवन की बेहद कठिन चुनौतियां खड़ी हैं। समिति का स्पष्ट मानना है कि इस स्थिति में केवल तात्कालिक मदद से काम नहीं चलेगा। सरकार और प्रशासन को आगे आकर इन बच्चों के भरण-पोषण, रहन-सहन और उज्जवल भविष्य की मुकम्मल जिम्मेदारी उठानी होगी, ताकि अनाथ हुए ये बच्चे समाज में सुरक्षित और आत्मनिर्भर बन सकें।