खैरागढ़। इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय में गुरुवार को छात्रों का आक्रोश खुलकर सामने आ गया। संगीत संकाय के छात्रों ने ‘कुलपति हटाओ, विश्वविद्यालय बचाओ’ के नारों के बीच 18 सूत्रीय मांगों को लेकर विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर धरना दिया। छात्रों ने विश्वविद्यालय में कथित अनियमितताओं और प्रशासनिक विवादों की शासन स्तर से स्वतंत्र जांच कराने के साथ कुलपति डॉ. लवली शर्मा के वर्तमान और पूर्व कार्यकाल से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग की।

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धरना दे रहे छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय में लंबे समय से विभिन्न स्तरों पर सवाल उठ रहे हैं, लेकिन उनका संतोषजनक निराकरण नहीं हुआ। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यह किसी एक व्यक्ति का मामला नहीं बल्कि विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा, पारदर्शिता और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़ा विषय है। छात्रों ने उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए बाहरी लोगों को बुलाने तथा अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति में कथित बदलाव को लेकर सवाल उठाए। तबला, सितार और म्यूजिकोलॉजी में सहायक अध्यापक भर्ती, कथक विभाग में बाहरी विषय विशेषज्ञों की पात्रता तथा डीन के कार्यकाल और भर्ती प्रक्रिया को लेकर भी छात्रों ने जांच की मांग की। उनका आरोप है कि कुछ विभागों में शिक्षकों की कमी के बावजूद नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।

प्रदर्शनकारी छात्रों ने यह कहा है। कि उन्हें रियाज करने के लिए वाद्य यंत्र और उपकरण नहीं मिल रहे हैं, जिसके कारण उन्हें अपने घर से ही सारे उपकरण और वाद्य यंत्र लाने पड़ रहे हैं, ऐसे में विश्वविद्यालय किस काम का रह गया है। प्रदर्शनकारियों ने शोधार्थियों के पंजीयन और शोध निर्देशन में नियमों की कथित अनदेखी, दयालबाग संस्थान से शोधार्थियों के स्थानांतरण तथा सेवानिवृत्ति के बाद भी शोध निर्देशन जारी रहने जैसे मुद्दे उठाए। रायगढ़ चक्रधर समारोह और यात्रा मानदेय में कथित दोहराव, निरीक्षण दलों में परिचितों को शामिल करने तथा पीआरओ, वेबसाइट और विश्वविद्यालय कैलेंडर के उपयोग को लेकर भी छात्रों ने सवाल खड़े किए।

प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने कुलपति के पूर्व कार्यकाल से जुड़े वर्ष 2018 के विवाद का भी मुद्दा उठाया। छात्रों ने उस समय की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग करते हुए सवाल किया कि यदि जांच हुई थी तो उसकी रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक क्यों नहीं की गई। वर्ष 2025 में नियुक्ति के समय सामने आए विरोध के कारणों और उससे जुड़े दस्तावेजों की भी जांच कराने की मांग की गई। छात्रों ने कहा कि शासन स्वतंत्र जांच कराए और वर्तमान तथा पूर्व कार्यकाल से जुड़े सभी दस्तावेजों की पड़ताल कर रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए। साथ ही यदि जांच में किसी स्तर पर अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदारी तय की जाए।

कुछ शिक्षकों ने छात्रों को उकसाया – कुलपति डॉ. लवली शर्मा

कुलपति डॉ. लवली शर्मा ने लल्लूराम डॉट कॉम से चर्चा में कहा कि कोई धरना-प्रदर्शन नहीं था। कुछ शिक्षकों का स्वार्थ पूरा नहीं हुआ, इसलिए उन्होंने कुछ बच्चों को उकसाया था। मैं हमेशा कहती हूं कि विद्यार्थियों से ही विश्वविद्यालय है, और उनकी जायज जरूरतें मेरी प्राथमिकता हैं। कल शाम मुझे जानकारी मिली कि 40 से 45 विद्यार्थियों की अंकसूची नहीं होने के कारण उनकी छात्रवृत्ति रुक रही है। इसकी सूची मुझे कल रात मिली और मैंने रातभर काम करवाकर सुबह ही सभी विद्यार्थियों तक उनकी अंकसूची पहुंचवा दी। विद्यार्थियों के प्रति मैं पूरी तरह समर्पित हूं। उन्होंने अपनी जो भी मांगें रखी हैं, उन पर मैं गंभीरता से ध्यान दूंगी। जो मांगें उचित हैं और जिन पर कार्रवाई की जा सकती है, उन्हें पूरा करने का हर संभव प्रयास किया जाएगा।

आंदोलनरत छात्रों द्वारा सौंपा गया ज्ञापन

महोदय,
माननीया कुलपति महोदया
राजकुमारी इंदिरा सिंह कला संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़ जिला- केसीजी (छ.ग.) ।


विश्वविद्यालय के संगीत संकाय में व्याप्त प्रशासनिक एवं शैक्षणिक अनियमितताओं, शिक्षकों की नियुक्ति / कार्यप्रणाली तथा विद्यार्थियों के शैक्षणिक हितों के प्रभावित होने के संबंध में निष्पक्ष जांच एवं आवश्यक कार्रवाई हेतु ज्ञापन।


हम विश्वविद्यालय के संगीत संकाय के समस्त प्रभावित विद्यार्थी, विश्वविद्यालय में वर्तमान में व्याप्त कुछ प्रशासनिक एवं शैक्षणिक परिस्थितियों के कारण अपने अध्ययन, शैक्षणिक वातावरण एवं भविष्य को लेकर गंभीर रूप से चिंतित हैं। विद्यार्थियों के हित में निम्नलिखित बिंदुओं पर निष्पक्ष जांच एवं आवश्यक प्रशासनिक कार्रवाई की मांग की जाती हैं।

  1. संगीत संकाय के विभिन्न विभागों में शिक्षकों एवं विद्यार्थियों के अनुपात तथा स्वीकृत / रिक्त पदों की स्थिति स्पष्ट की जाए । विशेष रूप से गायन, तबला एवं तंत्री विभाग में शिक्षकों की उपलब्धता, स्वीकृत पदए रिक्त पद तथा विद्यार्थियों की संख्या का विवरण सार्वजनिक किया जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि विद्यार्थियों को नि रित मानकों के अनुरूप नियमित एवं पर्याप्त शिक्षण प्राप्त हो रहा है अथवा नहीं।
  2. शिक्षकों पर किसी भी प्रकार के अनुचित प्रशासनिक / मानसिक दबाव की निष्पक्ष जांच की जाए। ऐसी परिस्थितियों की जांच की जाए जिनके कारण संकाय के शिक्षकों के कार्य करने के वातावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है तथा उसका सीधा प्रभाव विद्यार्थियों की नियमित एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर पड़ रहा
  3. अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति में हो रही देरी अथवा अनियमितता की जांच कर आवश्यकतानुसार तत्काल नियुक्तियां की जाएं। यदि स्वीकृत / आवश्यक शिक्षण पदों के विरुद्ध अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति आवश्यक है, तो नियमानुसार समयबद्ध प्रक्रिया अपनाते हुए नियुक्ति की जाए, ताकि शिक्षकों की कमी के कारण विद्यार्थियों की कक्षाएं एवं व्यावहारिक संगीत – शिक्षण प्रभावित न हों ।
  4. संगीत संकाय में हाल ही में की गई अधिष्ठाता / डीन की नियुक्ति की जांच की जाए । नियुक्त पदाधिकारी की निर्धारित शैक्षणिक योग्यता, अनुभव, पात्रता तथा नियुक्ति प्रक्रिया विश्वविद्यालय के प्रचलित नियमों एवं शासन/UGC के निर्धारित मानकों के अनुरूप है अथवा नहीं, इसकी स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा जांच के निष्कर्ष विद्यार्थियों के समक्ष सार्वजनिक किए जाएं ।
  5. संगीत संकाय के विद्यार्थियों के स्थान पर अन्य व्यक्तियों को प्रशासन द्वारा आमंत्रित सांस्कृतिक गतिविधियों में प्राथमिकता दी जा रही हैं। विद्यार्थियों के अनुसार ऐसी परिस्थितियां उत्पन्न हुई हैं जिनमें संकाय के वास्तविक विद्यार्थियों के हितों एवं अवसरों के स्थान पर अन्य व्यक्तियों को प्राथमिकता दिए जाने की स्थिति दिखाई देती है। अतः संबंधित मामलों की तथ्यात्मक जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
  6. कुलपति के वर्तमान एवं पूर्व कार्यकाल से संबंधित सार्वजनिक रूप से उठाए गए आरोपों एवं विवादों की स्वतंत्र जांच कराई जाए। विभिन्न माध्यमों/सार्वजनिक प्रस्तुतियों में कुलपति के वर्तमान एवं पूर्व कार्यकाल से संबंधित नियुक्तियों, कर्मचारियों की सेवाए शोध एवं शोधार्थियों से संबंधित प्रक्रियाओं, वित्तीय एवं प्रशासनिक निर्णयों तथा अन्य कथित अनियमितताओं के संबंध में प्रश्न / आरोप उठाए गए हैं। अतः संबंधित अभिलेखों एवं निर्णयों की सक्षम एवं स्वतंत्र जांच हाई कोर्ट के रिटायर जज या समानान्तर व्यक्तित्व द्वारा कराई जाए तथा सार्वजनिक कि जाए। जांच में किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर संबंधित व्यक्तियों की जवाबदेही निर्धारित कर विधि एवं नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाए ।
  7. नामांकन प्रपत्र, परीक्षा / परिणाम संबंधी प्रपत्र अथवा अन्य आवश्यक शैक्षणिक प्रपत्र भरने के लिए शुल्क की अनिवार्य मांग एवं उसके कारण विद्यार्थियों को होने वाली शैक्षणिक क्षति की जांच की जाए। विद्यार्थियों द्वारा यह शिकायत की जा रही है कि विभिन्न नामांकन, परीक्षा, परिणाम अथवा अगले चरण से संबंधित प्रपत्र नहीं भर पा रहे हैं। इसके परिणामस्वरूप वे आगामी शैक्षणिक प्रक्रियाओं तथा छात्रवृत्ति जैसी सरकारी/संस्थागत योजनाओं के लिए निर्धारित समय-सीमा में आवेदन करने से भी वंचित हो रहे हैं। अतः शुल्क संबंधी नियमों, की प्रक्रिया तथा उसके कारण विद्यार्थियों के शैक्षणिक एवं छात्रवृत्ति संबंधी अधिकार प्रभावित होने की स्थिति की जांच कर उचित एवं विद्यार्थीहितैषी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए ।
  8. विद्यार्थियों की अंकसूचियों में नाम ( विशेष रूप से अंग्रेजी में दर्ज नाम ) तथा अन्य व्यक्तिगत / शैक्षणिक विवरणों में गंभीर त्रुटियों की जांच एवं तत्काल सुधार की व्यवस्था की जाए । विद्यार्थियों द्वारा अंकसूचियों में नाम, अंग्रेजी वर्तनी तथा अन्य महत्वपूर्ण विवरणों में त्रुटियों की शिकायत की जा रही है। ऐसी त्रुटियों के कारण विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा, सरकारी / निजी रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाओं तथा दस्तावेज सत्यापन के दौरान गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है और कुछ मामलों में दस्तावेजों में विसंगति के आधार पर उनकी उम्मीदवारी प्रभावित / निरस्त होने की स्थिति उत्पन्न हो रही है। अतः समस्त विद्यार्थियों की अंकसूचियों एवं शैक्षणिक अभिलेखों का सत्यापन कर त्रुटियों का समयबद्ध एवं बिना अनावश्यक आर्थिक / प्रशासनिक बाधा के सुधार सुनिश्चित किया जाए तथा भविष्य में ऐसी त्रुटियों की पुनरावृत्ति रोकने हेतु उत्तरदायित्व निर्धारित किया जाए।
  9. प्रत्येक सेमेस्टर में विद्यार्थियों से विभिन्न प्रकार के शुल्कों की वसूली की प्रक्रिया की जांच कर शुल्क संरचना एवं उसके औचित्य में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए । विद्यार्थियों का आरोप है कि प्रत्येक सेमेस्टर में विभिन्न परीक्षा, नामांकन, दस्तावेज, के नाम पर बार बार शुल्क लिया जा रहा है। अतः विश्वविद्यालय द्वारा निध वैधानिक/नियमसम्मत रित शुल्क संरचना, प्रत्येक शुल्क की वैधानिक / नियमसम्मत आधारभूमि, उसकी राशि तथा वसूली की प्रक्रिया का स्पष्ट विवरण सार्वजनिक किया जाए और किसी भी अनधिकृत, दोहराए गए अथवा अस्पष्ट शुल्क की वसूली पाए जाने पर उसे तत्काल रोका जाए तथा नियमानुसार आवश्यक समायोजन / वापसी की व्यवस्था की जाए।
  10. परिणाम / अंकसूची जारी करने की प्रक्रिया में पारदर्शिताए समयबद्धता एवं शुद्धता सुनिश्चित की जाए । विद्यार्थियों द्वारा परिणाम एवं अंकसूची से संबंधित विलंबए त्रुटियों तथा आवश्यक सुधारघ्स्पष्टीकरण प्राप्त करने में होने वाली कठिनाइयों की शिकायत की जा रही है। परिणाम समय पर घोषित न होने अथवा अभिलेखों में त्रुटि रहने से विद्यार्थी आगामी प्रवेशए परीक्षाए छात्रवृत्तिए रोजगार एवं अन्य शैक्षणिक प्रक्रियाओं में निर्धारित समय.सीमा का पालन नहीं कर पाते। अतः परिणाम एवं अंकसूची तैयार करने तथा संशोधन की प्रक्रिया की समीक्षा कर समयबद्ध एवं त्रुटिरहित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए ।
  11. सभी विद्यार्थियों को वैध एवं अद्यतन विश्वविद्यालय पहचान-पत्र समय पर उपलब्ध कराया जाए। विद्यार्थियों को पहचान पत्र जारी करने अथवा उसे समय पर उपलब्ध कराने में होने वाली कठिनाइयों का समाधान किया जाए। पहचान.पत्र के अभाव के कारण परीक्षा, पुस्तकालय, छात्रवृत्ति, विश्वविद्यालय परिसर तथा अन्य आवश्यक शैक्षणिक/प्रशासनिक सेवाओं तक विद्यार्थियों की पहुंच प्रभावित न होए इसके लिए स्पष्ट एवं समयबद्ध व्यवस्था बनाई जाए ।
    12 GE, SEC एंव VAC सहित विभिन्न पाठ्यक्रमों/ विषयों की कक्षाओं के समय सारणी एवं संचालन में हो रही अनियमितताओं को दूर किया जाए । विद्यार्थियों द्वारा संबंधित पाठ्यक्रम की कक्षाओं के समय सारणी में कक्षाओं के आपस में टकराने की शिकायत की जा रही है। इससे विद्यार्थियों की उपस्थिति, पाठ्यक्रम पूर्णता एवं परीक्षा की तैयारी प्रभावित होती है। अतः सभी विषयों की समय सारणी पूर्व में स्पष्ट रूप से जारी कर कक्षाओं के टकराव की स्थिति को तत्काल दूर किया जाए ।
  12. विश्वविद्यालय की प्रवेश प्रक्रिया को यथासंभव ऑनलाइन किया जाए। दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाले विद्यार्थियों को केवल प्रवेश संबंधी औपचारिकताओं के लिए बार बार विश्वविद्यालय आने में समय, धन एवं अन्य संसाधनों की अनावश्यक हानि होती है। अतः प्रवेश आवेदन, दस्तावेज अपलोड, शुल्क भुगतान, सत्यापन तथा अन्य आवश्यक औपचारिकताओं को चरणबद्ध रूप से ऑनलाइन उपलब्ध कराया जाए तथा केवल उन प्रक्रियाओं के लिए भौतिक उपस्थिति अनिवार्य की जाए जिनमें उसका होना अपरिहार्य हो। इससे दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थियों को अनावश्यक कठिनाइयों से राहत मिलेगी और प्रवेश प्रक्रिया अधिक पारदर्शी एवं विद्यार्थी. अनुकूल बनेगी ।
    भरतनाट्यम नृत्य विभाग से संबंधित विशिष्ट समस्याएँ एवं मांगें
  13. विभाग में वर्तमान में केवल एक स्थायी शिक्षक कार्यरत हैं। उक्त शिक्षक को प्रायः बैठकों एवं अन्य प्रशासनिक दायित्वों में व्यस्त रहना पड़ता है, जिसके कारण विद्यार्थियों की नियमित कक्षाएँ एवं शिक्षण कार्य प्रभावित होने की स्थिति उत्पन्न होती है। अतः विभाग में आवश्यक संख्या में नियमित शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। पिछले लगभग सात वर्षों से मृदंगम शिक्षक का अभाव है। मृदंगम जैसे विभाग के आवश्यक एवं अनिवार्य प्रशिक्षण. विषय के शिक्षक की दीर्घ अवधि से अनुपलब्धता के कारण विद्यार्थियों के व्यावहारिक प्रशिक्षण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। अतः नियमानुसार स्थायी अथवा आवश्यकतानुसार नियमित / अतिथि मृदंगम शिक्षक की नियुक्ति शीघ्र की जाए ।
  14. सेवानिवृत्त वोकल शिक्षक के स्थान पर नियमित नियुक्ति नहीं की गई है। वोकल शिक्षक के सेवानिवृत्त होने के पश्चात आज तक नियमित नियुक्ति न होने के कारण विद्यार्थियों के संगीतात्मक प्रशिक्षण में कमी बनी हुई है। अतः रिक्त पद पर नियमानुसार शीघ्र नियुक्ति की जाए ।
  15. ताल, मृदंगम एवं वोकल प्रशिक्षण के अभाव को दूर किया जाए। उक्त आवश्यक प्रशिक्षण के अभाव में विद्यार्थियों को नृत्य की नियमित शिक्षाए अभ्यास एवं मंचीय प्रस्तुति में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। अतः आवश्यक विषयों के प्रशिक्षित शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए ।
  16. भरतनाट्यम कक्षाओं में आवश्यक संगतकारों की व्यवस्था की जाए । गायन, मृदंगम तथा अन्य आवश्यक संगीत – संगत के लिए पर्याप्त एवं नियमित संगतकार उपलब्ध न होने के कारण विद्यार्थियों को अभ्यास एवं प्रस्तुति के दौरान आवश्यक संगीतात्मक सहयोग नहीं मिल पाता । अतः विभाग की शैक्षणिक आवश्यकताओं के अनुरूप संगतकारों की नियमित व्यवस्था की जाए ।
  17. युवा महोत्सव एवं राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रमों में विद्यार्थियों की प्रभावी सहभागिता हेतु आवश्यक प्रशिक्षण एवं संगत उपलब्ध कराई जाए। आवश्यक संगीत- संगत एवं प्रशिक्षण की कमी के कारण विद्यार्थियों की प्रतियोगितात्मक एवं मंचीय तैयारी प्रभावित होती है। अतः ऐसे आयोजनों से पूर्व पर्याप्त अभ्यास, विशेषज्ञ मार्गदर्शन एवं संगत की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए ।
  18. परीक्षाओं के समय विषय विशेषज्ञों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए ।
    विषय विशेषज्ञों की अनुपलब्धता अथवा परीक्षा से ठीक पूर्व अल्प अवधि के लिए शिक्षकों की उपलब्धता के कारण विद्यार्थियों को उचित तैयारी का अवसर नहीं मिल पाता । अतः परीक्षा एवं उससे पूर्व की तैयारी के लिए पर्याप्त समय एवं विशेषज्ञ शिक्षण सुनिश्चित किया जाए ।
  19. अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति शैक्षणिक सत्र के प्रारंभ में ही की जाए। विभाग में अतिथि शिक्षक की नियुक्ति शैक्षणिक सत्र प्रारंभ होने के लगभग तीन माह बाद होने से प्रारंभिक अवधि में विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हुई । अतः यदि अतिथि शिक्षकों की आवश्यकता हो तो शैक्षणिक सत्र प्रारंभ होने से पूर्व समयबद्ध नियुक्ति प्रक्रिया पूर्ण की जाए ।
  20. भरतनाट्यम विभाग में पर्याप्त एवं उपयुक्त कक्षाओं की व्यवस्था की जाए। कक्षाओं की अपर्याप्तता के कारण नियमित शिक्षणए अभ्यास एवं विभागीय गतिविधियाँ प्रभावित होती हैं। अतः विद्यार्थियों की संख्या एवं पाठ्यक्रम की आवश्यकता के अनुरूप पर्याप्त कक्ष उपलब्ध कराए जाएं।
  21. प्रायोगिक परीक्षाओं के निर्धारित समय का पूर्ण एवं निष्पक्ष उपयोग सुनिश्चित किया जाए। विद्यार्थियों को प्रायोगिक परीक्षा के लिए निर्धारित 20 मिनट का समय प्रदान किया जाता हैए किन्तु कई बार परीक्षा निर्धारित समय से पहले समाप्त कर दी जाती है। इससे विद्यार्थियों को अपनी सम्पूर्ण तैयारीए पाठ्यक्रम एवं प्रस्तुति प्रदर्शित करने का उचित अवसर नहीं मिल पाता। अतः निर्धारित परीक्षा अवधि का पालन सुनिश्चित किया जाए।
  22. परीक्षा कार्यक्रम को विद्यार्थियों की तैयारी एवं प्रस्तुति के लिए पर्याप्त समय उपलब्ध कराने के अनुरूप बनाया जाए। अत्यधिक संक्षिप्त परीक्षा कार्यक्रम तथा एक ही दिन में अधिकाधिक परीक्षाएँ पूर्ण करने के प्रयास से विद्यार्थियों को पर्याप्त प्रस्तुति समय नहीं मिल पाता। अतः परीक्षा कार्यक्रम वैज्ञानिकए व्यावहारिक एवं विद्यार्थीहितैषी तरीके से निर्धारित किया जाए।
  23. प्रायोगिक परीक्षाओं एवं मंचीय प्रस्तुतियों के लिए पर्याप्त एवं उपयुक्त स्थान/मंच उपलब्ध कराया जाए। विभाग में पर्याप्त मंच एवं स्थान उपलब्ध न होने के कारण विद्यार्थियों को अभ्यास तथा प्रायोगिक परीक्षाओं दोनों में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। अतः नृत्य की प्रकृति एवं विद्यार्थियों की संख्या के अनुरूप उपयुक्त स्थान एवं मंच की व्यवस्था की जाए।
  24. आवश्यक वाद्ययंत्रों, माइक्रोफोन एवं गुणवत्तापूर्ण ध्वनि व्यवस्था की पर्याप्त सुविधा उपलब्ध कराई जाए। अभ्यासए कक्षाओं एवं मंचीय प्रस्तुतियों के लिए आवश्यक वाद्ययंत्र, माइक्रोफोन एवं ध्वनि व्यवस्था पर्याप्त अथवा गुणवत्तापूर्ण उपलब्ध न होने के कारण विद्यार्थियों की शैक्षणिक एवं प्रस्तुति संबंधी गतिविधियाँ प्रभावित होती हैं। अतः आवश्यक उपकरणों की उपलब्धताए नियमित रखरखाव एवं समय समय पर तकनीकी जांच सुनिश्चित की जाए ।
    अतः निवेदन है कि माननीय महोदय/महोदया द्वारा विद्यार्थियों की उक्त शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए निष्पक्ष जांच समिति गठित कर जांच कराई जाए तथा जांच पूर्ण होने तक विद्यार्थियों के शैक्षणिक हितों की रक्षा तथा शिकायतकर्ताओ की सुरक्षा हेतु आवश्यक अंतरिम व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। हमारा उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को लक्षित करना नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय में पारदर्शी, निष्पक्ष एवं नियमसम्मत प्रशासन तथा विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अधिकार सुनिश्चित कराना है ।

दिनांक :- 08/10/2026 स्थान- खैरागढ
संलग्न :
भवदीय
समस्त विद्यार्थी संगीत संकाय एवं नृत्य संकाय