गाजियाबाद के भोवापुर गांव में मंगलवार सुबह खेत में मूली उखाड़ने गईं सत्यवती और उनकी बहू रूबी की टूटी बिजली लाइन की चपेट में आने से मौत हो गई. ऊर्जा निगम के अवर अभियंता ने सड़क निर्माण के दौरान बिजली के खंभों और तारों को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाते हुए ठेकेदार और जेसीबी चालक के खिलाफ शिकायत दी है.
गाजियाबाद. नंदग्राम थाना क्षेत्र स्थित भोवापुर गांव में मंगलवार सुबह खेत में मूली उखाड़ने गईं दो महिलाओं की बिजली का तार टूटकर गिरने से मौत हो गई. हादसे में जान गंवाने वाली सत्यवती (50) और रूबी (21) सास-बहू थीं, जबकि उन्हें बचाने पहुंची सत्यवती की बेटी देवश्री भी करंट की चपेट में आकर झुलस गईं. ऊर्जा निगम के अवर अभियंता ने सड़क निर्माण के दौरान बिजली के खंभों और तारों को नुकसान पहुंचने का आरोप लगाया है.
खेत में हुआ हादसा
एसीपी नंदग्राम जियाउद्दीन अहमद के मुताबिक, थान सिंह मूल रूप से बदायूं जिले के कादरचौक थाना क्षेत्र के खिरिया बारखपुर गांव के रहने वाले हैं. उनका परिवार पिछले तीन वर्षों से भोवापुर में केडीपी गोल चक्कर से गांव की ओर जाने वाले रास्ते के पास झुग्गी में रह रहा है. परिवार ने मोरटी के एक किसान से जमीन ठेके पर लेकर वहां सब्जियों की खेती कर रखी है.
मंगलवार सुबह करीब छह बजे थान सिंह की पत्नी सत्यवती, बहू रूबी और बेटी देवश्री खेत में मूली उखाड़ने पहुंचीं. वहां बिजली का तार टूटा पड़ा था. रूबी के खेत में पहुंचने पर तार उनकी गर्दन से छू गया और वह करंट की चपेट में आ गईं. बहू को बचाने के प्रयास में सत्यवती ने तार हटाना चाहा, लेकिन वह भी करंट की चपेट में आ गईं.
मां और भाभी को तड़पते देखकर देवश्री उन्हें बचाने दौड़ीं. इसी दौरान तार उनके पैर से छू गया और करंट लगने से वह दूर जा गिरीं.
बांस से हटाया तार
देवश्री की आवाज सुनकर आसपास के लोग घटनास्थल पर पहुंचे. उन्होंने बांस की मदद से बिजली का तार हटाया और तीनों महिलाओं को संजय नगर स्थित संयुक्त जिला अस्पताल पहुंचाया. वहां चिकित्सकों ने सत्यवती और रूबी को मृत घोषित कर दिया, जबकि देवश्री को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई.
पोस्टमार्टम के बाद परिजन दोनों महिलाओं के शव लेकर बदायूं रवाना हो गए. उनका अंतिम संस्कार पैतृक गांव में किया जाएगा.
सड़क निर्माण पर आरोप
ऊर्जा निगम के अटौर सबस्टेशन में तैनात अवर अभियंता आकाश रस्तोगी ने बताया कि भोवापुर में भट्ठा संख्या पांच के पास सड़क निर्माण का काम चल रहा है. उनके आरोप के मुताबिक, सोमवार रात जेसीबी चालक ने पहले मशीन का पंजा बिजली के खंभों पर मारा और फिर मशीन तारों से टकरा गई. इससे दोनों तरफ की बिजली लाइन टूट गई.
आकाश रस्तोगी ने कहा कि बिजली की लाइन के नजदीक निर्माण कार्य करने से पहले नियमानुसार शटडाउन लिया जाना चाहिए था. उनका आरोप है कि लाइन क्षतिग्रस्त होने के बाद भी ऊर्जा निगम को तत्काल सूचना नहीं दी गई. समय पर जानकारी मिलने पर बिजली आपूर्ति बंद कर हादसे को रोका जा सकता था. उन्होंने बताया कि घटना देखने वाले लोगों के बयान भी दर्ज किए गए हैं.
अवर अभियंता ने जीडीए के ठेकेदार अंकित गोयल और जेसीबी चालक के खिलाफ पुलिस को शिकायत देकर रिपोर्ट दर्ज करने की मांग की है.
ट्रिपिंग व्यवस्था पर सवाल
ऊर्जा निगम को सोमवार रात लाइन टूटने की जानकारी मंगलवार सुबह हादसे के बाद करीब आठ बजे मिली. इससे बिजली लाइन की निगरानी और खराबी की सूचना मिलने की व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं. यह भी जांच का विषय है कि तार टूटने के बाद बिजली आपूर्ति स्वतः बंद करने वाली ट्रिपिंग व्यवस्था ने काम क्यों नहीं किया और कंट्रोल रूम तक सूचना समय पर क्यों नहीं पहुंची.
ऊर्जा निगम के जेई आकाश रस्तोगी ने बताया कि एलटी लाइन के तार अलग-अलग होने के कारण ट्रिपिंग नहीं हो सकी. हालांकि, आपूर्ति जारी रहने की वजह और निगरानी व्यवस्था की भूमिका स्पष्ट करने के लिए तकनीकी व विभागीय जांच की जरूरत है.
ऊर्जा निगम विद्युत संसाधनों को दुरुस्त करने के लिए वर्ष 2025-26 के बिजनेस प्लान के तहत 250 करोड़ रुपये से अधिक खर्च कर रहा है. इसके बावजूद भोवापुर की घटना ने बिजली लाइनों की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं.

