गिरिडीह। झारखंड सरकार के मंत्री और गिरिडीह विधायक सुदिव्य कुमार सोनू के निधन के बाद प्रस्तावित विधानसभा उपचुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। झामुमो और भाजपा ने चुनावी तैयारियां शुरू कर दी हैं। दोनों दलों के बड़े नेताओं का गिरिडीह दौरा बढ़ गया है। संगठनात्मक बैठकों और जनसंपर्क कार्यक्रमों के बहाने राजनीतिक दल चुनावी समीकरण साधने में जुट गए हैं। हालांकि, अभी तक किसी भी पार्टी ने अपने प्रत्याशी की आधिकारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन संभावित उम्मीदवारों को लेकर चर्चाएं तेज हैं।

झामुमो से श्वेता शर्मा का नाम सबसे आगे

दिवंगत मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू की पत्नी श्वेता शर्मा को झामुमो का संभावित प्रत्याशी माना जा रहा है। पार्टी की ओर से अभी तक उनके नाम की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन पति के निधन के बाद श्वेता शर्मा ने राजनीतिक गतिविधियां तेज कर दी हैं। वह पार्टी के संगठनात्मक कार्यक्रमों में सक्रिय रूप से हिस्सा ले रही हैं और क्षेत्र में जनसंपर्क भी कर रही हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि झामुमो उन्हें उपचुनाव में सहानुभूति के साथ-साथ राजनीतिक विरासत के आधार पर मैदान में उतार सकता है।

भाजपा में एक दर्जन से अधिक दावेदार, टिकट चयन बनेगा चुनौती

उपचुनाव में भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती उम्मीदवार के चयन को लेकर हो सकती है। पार्टी में टिकट के लिए एक दर्जन से अधिक दावेदार सक्रिय बताए जा रहे हैं। इनमें महिला और पुरुष दोनों शामिल हैं। कई नेताओं ने संगठनात्मक कार्यक्रमों के अलावा अपने स्तर पर भी क्षेत्र में जनसंपर्क तेज कर दिया है।

दिलचस्प बात यह है कि विधानसभा चुनाव के बाद क्षेत्र की राजनीति से दूरी बनाने वाले कई नेता भी अब अचानक सक्रिय हो गए हैं। कुछ संभावित दावेदार खुद को अभी से प्रत्याशी के रूप में पेश करने लगे हैं। ऐसे में टिकट वितरण के बाद पार्टी के भीतर असंतोष और भीतरघात की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

पिछले चुनाव में महज 3200 वोटों से हारी थी भाजपा

पिछले विधानसभा चुनाव में झामुमो के सुदिव्य कुमार सोनू ने भाजपा प्रत्याशी निर्भय शाहाबादी को करीब 3200 वोटों से हराया था। इस चुनाव में भाजपा को जीत के लिए काफी करीब पहुंचने के बावजूद हार का सामना करना पड़ा था। राजनीतिक हलकों में भाजपा की हार के पीछे भीतरघात को भी एक प्रमुख कारण माना गया था।

पार्टी के कई नेताओं और कार्यकर्ताओं का भी मानना है कि पिछले चुनाव में कुछ नेताओं की नाराजगी और टिकट की दावेदारी ने पार्टी के प्रदर्शन को प्रभावित किया था। ऐसे में इस बार भाजपा के लिए सभी दावेदारों को एकजुट रखना बड़ी चुनौती होगी।

राजद, आजसू और जेएलकेएम भी ठोक सकते हैं ताल

गिरिडीह उपचुनाव में मुकाबला केवल झामुमो और भाजपा तक सीमित रहने की संभावना नहीं है। राजद ने भी चुनाव लड़ने की तैयारी के संकेत दिए हैं। राजद जिलाध्यक्ष इरफान आलम ने कहा है कि पार्टी उपचुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है। हालांकि, प्रत्याशी उतारने का अंतिम निर्णय पार्टी फोरम में लिया जाएगा।

वहीं, आजसू और जेएलकेएम की ओर से भी उम्मीदवार उतारे जाने की चर्चाएं हैं। यदि ये दल चुनाव मैदान में उतरते हैं तो मुकाबला और दिलचस्प हो सकता है।

भाजपा और झामुमो के बड़े नेताओं ने संभाला मोर्चा

सुदिव्य कुमार सोनू के निधन के बाद दोनों प्रमुख दलों के बड़े नेताओं का गिरिडीह दौरा तेज हो गया है। भाजपा की ओर से प्रदेश महामंत्री गणेश मिश्रा, अमर बाउरी सहित कई नेता अलग-अलग कार्यक्रमों में शामिल हो चुके हैं। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी भी क्षेत्र में सक्रिय हैं। पार्टी नेताओं की बैठकों के साथ-साथ जनसंपर्क के जरिए चुनावी माहौल को समझने की कोशिश की जा रही है।

दूसरी ओर झामुमो ने भी अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। गांडेय विधायक कल्पना मुर्मू सोरेन ने हाल ही में श्वेता शर्मा और पार्टी के अन्य नेताओं के साथ क्षेत्र का दौरा किया। इसके अलावा दर्जा प्राप्त मंत्री फागू बेसरा, मंत्री योगेंद्र प्रसाद और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव विनोद पांडेय भी गिरिडीह पहुंचकर कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर चुके हैं।

कल्पना सोरेन और बाबूलाल मरांडी की होगी अग्निपरीक्षा

इस उपचुनाव में झामुमो की ओर से कल्पना मुर्मू सोरेन और भाजपा की ओर से नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी की भूमिका बेहद अहम रहने वाली है। दोनों नेताओं के कंधों पर अपने-अपने दल के प्रत्याशियों को जीत दिलाने की बड़ी जिम्मेदारी होगी।

गौरतलब है कि गांडेय विधानसभा उपचुनाव में कल्पना मुर्मू सोरेन की जीत सुनिश्चित करने में दिवंगत मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू की महत्वपूर्ण भूमिका रही थी। अब उनके निधन के बाद गिरिडीह में पार्टी की चुनावी रणनीति को आगे बढ़ाने और संभावित प्रत्याशी के पक्ष में माहौल बनाने की जिम्मेदारी कल्पना सोरेन पर होगी।

कुल मिलाकर गिरिडीह उपचुनाव में अभी प्रत्याशियों के नाम तय नहीं हुए हैं, लेकिन सियासी बिसात बिछनी शुरू हो गई है। झामुमो के सामने सहानुभूति की लहर को वोट में बदलने की चुनौती होगी, तो भाजपा के लिए भीतरघात से बचते हुए मजबूत उम्मीदवार चुनना सबसे बड़ा इम्तिहान साबित हो सकता है।