बेगूसराय। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने एक बार फिर विपक्षी दलों के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए तीखा हमला बोला है। उन्होंने कांग्रेस सहित विभिन्न क्षेत्रीय दलों पर ‘वोट बैंक की राजनीति’ और ‘तुष्टीकरण’ का गंभीर आरोप लगाया। गिरिराज सिंह के अनुसार, विपक्षी नेता चुनावी लाभ के लिए देश के व्यापक हितों के साथ समझौता कर रहे हैं, जिसे इतिहास कभी माफ नहीं करेगा।
वोट बैंक के लिए राष्ट्रहित से समझौता
गिरिराज सिंह ने विशेष रूप से ममता बनर्जी, राहुल गांधी, अखिलेश यादव और तेजस्वी यादव का नाम लेकर उन पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जब भी वोटों का गणित सामने आता है, ये नेता राष्ट्रहित को गौण कर देते हैं। उनका आरोप है कि विपक्ष एक विशेष समुदाय को खुश करने की होड़ में लगा रहता है, जिससे देश की सुरक्षा और अखंडता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सत्ता की लालसा में की जाने वाली यह राजनीति भारत के लोकतांत्रिक ढांचे के लिए अत्यंत घातक है।
दिनकर की पंक्तियों से विपक्ष को आईना
अपने संबोधन में केंद्रीय मंत्री ने राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की कालजयी पंक्तियों का सहारा लिया:
”समर शेष है, नहीं पाप का भागी केवल व्याध,
जो तटस्थ हैं, समय लिखेगा उनका भी अपराध।”
इन पंक्तियों के माध्यम से उन्होंने उन नेताओं पर कटाक्ष किया जो देश के ज्वलंत मुद्दों पर मौन साधे रहते हैं। उन्होंने तर्क दिया कि जो लोग देश के संकट के समय ‘तटस्थ’ होने का ढोंग करते हैं या केवल अपनी पार्टी के वोट बैंक को सुरक्षित रखने में लगे रहते हैं, वे भी उतने ही दोषी हैं जितने कि समस्या पैदा करने वाले अपराधी। उनके अनुसार, राष्ट्र की अस्मिता के प्रश्न पर खामोशी बरतना एक ऐतिहासिक अपराध के समान है।
इतिहास और आने वाली पीढ़ियों की चेतावनी
विपक्षी नेताओं को सचेत करते हुए गिरिराज सिंह ने कहा कि जब राजनीति को राष्ट्र से ऊपर रखा जाता है, तो आने वाली पीढ़ियां उस नेतृत्व को कभी स्वीकार नहीं करतीं। उन्होंने कहा कि तुष्टीकरण की नीति तात्कालिक राजनीतिक लाभ तो दे सकती है, लेकिन दीर्घकालिक रूप से यह राष्ट्र को कमजोर करती है। उन्होंने आह्वान किया कि देश के नेताओं को दलगत राजनीति से ऊपर उठकर राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखना चाहिए, अन्यथा इतिहास के पन्नों में उनकी भूमिका नकारात्मक रूप से दर्ज की जाएगी।
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