Business Desk – Gold Jewellery Stocks : देश में फेस्टिव और वेडिंग सीजन शुरू होने के साथ ज्वैलरी सेक्टर के शेयर निवेशकों के रडार पर हैं। सोने की कीमतें ऊंचे स्तर पर हैं, लेकिन त्योहारों और शादियों के चलते मांग मजबूत रहने की उम्मीद है। बाजार के जानकारों के मुताबिक, ग्राहक अब भारी गहनों के बजाय हल्के वजन की ज्वैलरी, कम बजट वाले विकल्प और पुराने सोने को बदलकर नए गहने खरीदने को प्राथमिकता दे रहे हैं।

इस सेक्टर में टाइटन और कल्याण ज्वैलर्स के अलावा सेंको गोल्ड और हाल ही में लिस्ट हुई ललिता ज्वैलरी मार्ट पर भी निवेशकों की नजर है। कंपनियों की बिक्री, रेवेन्यू और मुनाफे के आंकड़े बताएंगे कि महंगे सोने के बीच उनका कारोबार कैसा रहता है।
महंगे सोने के बावजूद मांग मजबूत रहने की उम्मीद
मास्टरट्रस्ट के चीफ रिसर्च ऑफिसर रवि सिंह के मुताबिक, ऊंचे भाव के बावजूद इस बार त्योहारी और शादी-ब्याह के सीजन में ज्वैलरी की मांग मजबूत रह सकती है। ग्राहक हल्के गहने और कम बजट वाले विकल्प चुन रहे हैं। पुराने सोने को बदलकर नए गहने खरीदने का चलन भी बाजार में मांग बनाए रखने में मदद कर रहा है।
वेल्थमिल्स सिक्योरिटीज के डायरेक्टर क्रांती बाथिनी का कहना है कि बॉन्ड यील्ड और ब्याज दरों में बदलाव के कारण सोने की कीमतें कुछ समय तक एक दायरे में रह सकती हैं। हालांकि, भारत में त्योहारों और शादियों के दौरान परंपरागत खरीदारी से मांग को सहारा मिलने की उम्मीद है।
ज्वैलरी कंपनियों की कमाई केवल सोने की बिक्री पर निर्भर नहीं करती। गहनों की डिजाइन और उन्हें तैयार करने के लिए लिया जाने वाला मेकिंग चार्ज भी उनकी कमाई का हिस्सा होता है।
2030 तक 11.18 लाख करोड़ रुपए का हो सकता है ज्वैलरी बाजार
इंडिया ब्रांड इक्विटी फाउंडेशन (IBEF) के मुताबिक, भारत का ज्वैलरी बाजार 2030 तक बढ़कर 11.18 लाख करोड़ रुपए यानी करीब 130 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।
इस ग्रोथ के पीछे अमेरिका, ब्रिटेन और मिडिल ईस्ट में भारतीय डिजाइन की ज्वैलरी और हीरों की मांग, संगठित ज्वैलरी रिटेल कंपनियों का विस्तार और घरेलू उपभोक्ताओं का बढ़ता खर्च प्रमुख वजहें हैं।
हालांकि, इस ग्रोथ का फायदा सभी कंपनियों को एक समान मिले, यह जरूरी नहीं है। कारोबार का विस्तार, लागत और मुनाफे का मार्जिन कंपनियों के प्रदर्शन को प्रभावित कर सकते हैं।
सेंको गोल्ड: 20% वैल्यू ग्रोथ का लक्ष्य
मास्टरट्रस्ट के चीफ रिसर्च ऑफिसर रवि सिंह के मुताबिक, सेंको गोल्ड का वैल्यूएशन और रेवेन्यू प्रदर्शन इसे निवेशकों के लिए आकर्षक बनाता है। उनके अनुसार, कंपनी का P/E मल्टीपल करीब 9.5 गुना है।
कंपनी ने वित्त वर्ष 2027 के लिए 20% वैल्यू ग्रोथ का लक्ष्य बरकरार रखा है। निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि कंपनी बिक्री और मुनाफे के मोर्चे पर कैसा प्रदर्शन करती है।
हालांकि, कम P/E अपने आप में शेयर के सस्ता होने या बेहतर रिटर्न की गारंटी नहीं है। निवेश से पहले कंपनी की कमाई, कारोबार की वृद्धि और मौजूदा शेयर कीमत का आकलन जरूरी है।
ललिता ज्वैलरी मार्ट: रिकॉर्ड हाई से नीचे आया शेयर
क्रांती बाथिनी ने हाल ही में लिस्ट हुई ललिता ज्वैलरी मार्ट पर भी नजर रखने की बात कही है। दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, कंपनी का IPO 201 रुपए प्रति शेयर के इश्यू प्राइस पर आया था और 24 अगस्त को NSE पर 265 रुपए पर लिस्ट हुआ। अक्टूबर की शुरुआत में शेयर 414.10 रुपए के रिकॉर्ड हाई तक पहुंचा था। इसके बाद गिरावट के साथ यह करीब 361.85 रुपए पर कारोबार कर रहा था।
एक्सपर्ट के मुताबिक, गिरावट के दौरान इस शेयर पर नजर रखी जा सकती है। हालांकि, कंपनी के आने वाले तिमाही नतीजे उसके कारोबार की असली तस्वीर साफ करेंगे। केवल रिकॉर्ड हाई से गिरावट के आधार पर शेयर को सस्ता नहीं माना जा सकता।
टाइटन और कल्याण ज्वैलर्स पर भी नजर
टाइटन और कल्याण ज्वैलर्स भी निवेशकों के पसंदीदा शेयरों में बने हुए हैं। फेस्टिव और वेडिंग सीजन में इन कंपनियों की बिक्री, रेवेन्यू और मुनाफे पर बाजार की नजर रहेगी। निवेशकों के लिए यह देखना जरूरी होगा कि ऊंचे सोने के भाव के बीच कंपनियां ग्राहकों की मांग को किस तरह पूरा करती हैं। हल्के गहनों की बिक्री, नए स्टोर, परिचालन लागत और मुनाफे का मार्जिन उनके प्रदर्शन को प्रभावित कर सकते हैं।
कुल मिलाकर, ज्वैलरी सेक्टर में लंबी अवधि की ग्रोथ की संभावनाएं हैं, लेकिन किसी शेयर में निवेश का फैसला केवल त्योहारी मांग या कीमत में गिरावट देखकर नहीं करना चाहिए। कंपनी के वित्तीय नतीजों, वैल्यूएशन और जोखिम को ध्यान में रखना जरूरी है।
नोट: यह लेख बाजार की जानकारी और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है, निवेश की सलाह नहीं। शेयर बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन है।

