अनुज कुमार, पांडे। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में नौकरी का झांसा देकर बिहार के गोपालगंज जिले के करीब एक दर्जन मजदूरों को मध्य प्रदेश के रतलाम जिले में बंधक बनाकर काम कराने का एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। इस घटना ने एक बार फिर लेबर ट्रैफिकिंग और अवैध बंधुआ मजदूरी के काले सच को उजागर कर दिया है, जिससे पीड़ित परिवारों में गहरी दहशत और चिंता का माहौल है।

​मजदूरों ने जारी किया वीडियो संदेश

​रतलाम जिले के जावड़ा गांव के एक दुर्गम पहाड़ी इलाके में स्थित कंस्ट्रक्शन साइट पर फंसे इन मजदूरों ने अपनी जान जोखिम में डालकर एक वीडियो संदेश जारी किया है। इस वीडियो के माध्यम से उन्होंने अपनी आपबीती सुनाई और शासन-प्रशासन से सुरक्षित घर वापसी की गुहार लगाई।
​मजबूर मजदूरों का आरोप है कि उनसे दिन-रात जबरन सरिया बांधने और अन्य भारी-भरकम निर्माण कार्य कराए जा रहे हैं। इसके एवज में उन्हें न तो तय मजदूरी दी जा रही है और न ही भरपेट भोजन। जब भी ये श्रमिक घर लौटने या काम करने से मना करते हैं, तो साइट पर मौजूद लोग उन्हें जान से मारने की धमकियां देते हैं। इस अमानवीय व्यवहार से घबराए पीड़ितों ने पूर्व विधायक मिथिलेश तिवारी और स्थानीय प्रशासन से तुरंत हस्तक्षेप करने की अपील की है।

​एजेंट के झांसे में फंसे मजदूर

​फंसे हुए मजदूरों में ज्यादातर लोग गोपालगंज जिले के बैकुंठपुर थाना क्षेत्र के रहने वाले हैं। इनमें दिघवा-दुबौली गांव के साजन मांझी, सतेंद्र महतो, मनोज राय, अरुण महतो, रामाशीष मांझी, संतोष प्रसाद, विकास मांझी और ललन मांझी शामिल हैं। इसके अलावा, डोमाहाता गांव के कमल कुमार और छोटू कुमार भी इसी ट्रैप का शिकार हुए हैं।
​प्राप्त जानकारी के अनुसार, डोमाहाता गांव के ही रहने वाले एक एजेंट धर्मेंद्र यादव ने इन सभी को लखनऊ में बेहतर काम और आकर्षक वेतन का लालच दिया था। झांसे में आकर ये मजदूर घर से निकले, लेकिन शातिर एजेंट ने उन्हें लखनऊ ले जाने के बजाय धोखे से रतलाम के जावड़ा स्थित इस खतरनाक साइट पर भेज दिया।

​बिहार भवन की कार्रवाई

​सोशल मीडिया पर मजदूरों का वीडियो वायरल होने के बाद गोपालगंज में उनके परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए नई दिल्ली स्थित बिहार भवन ने तुरंत कड़ा रुख अख्तियार किया है। बिहार भवन के संयुक्त श्रम आयुक्त कुमार दिग्विजय ने रतलाम के जिलाधिकारी को आधिकारिक पत्र लिखकर तत्काल पुलिस बल के साथ मौके पर धावा बोलने और रेस्क्यू ऑपरेशन चलाने के निर्देश दिए हैं।

​बिहार भवन ने स्थानीय प्रशासन से निम्नलिखित ठोस कदम उठाने की मांग की है:

  • ​कानूनी कार्रवाई: बंधुआ मजदूरी प्रथा (उन्मूलन) अधिनियम, 1976 के तहत मजदूरों को तुरंत मुक्त कराया जाए।
  • ​बुनियादी सुविधाएं: रेस्क्यू किए गए सभी श्रमिकों को समय पर भोजन, सुरक्षित आश्रय और चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जाए।
  • ​वेतन भुगतान: मजदूरों के सभी लंबित बकाये का तुरंत भुगतान सुनिश्चित कर उन्हें सुरक्षित गोपालगंज भेजा जाए।
  • ​सख्त सजा: दोषी ठेकेदार, नियोक्ता और बिचौलिए एजेंट धर्मेंद्र यादव के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।

​फिलहाल रतलाम प्रशासन और बिहार सरकार के बीच आपसी समन्वय से मजदूरों के सफल रेस्क्यू की पुख्ता तैयारियां चल रही हैं, जिस पर पीड़ित परिवारों की आंखें टिकी हुई हैं।