नालंदा। जिले के बिहारशरीफ के सदर अस्पताल के एक डॉक्टर की कथित लापरवाही और निजी क्लिनिक में रेफर करने के खेल के कारण एक नवजात की मौत हो गई। इस घटना ने एक बार फिर सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था और डॉक्टरों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सरकारी अस्पताल से निजी क्लिनिक की ओर रुख
मूल रूप से नवादा जिले के बेलड़ गांव के रहने वाले आदर्श राज ने अपनी पत्नी पूनम कुमारी को प्रसव के लिए 16 अक्टूबर को बिहारशरीफ सदर अस्पताल में भर्ती कराया था। परिजनों के मुताबिक, ऑपरेशन सफल रहा और नवजात बिल्कुल स्वस्थ था। लेकिन 27 अक्टूबर की सुबह बच्चे की तबीयत बिगड़ने पर जब परिजन उसे दोबारा सदर अस्पताल ले गए, तो ड्यूटी पर तैनात डॉ. पंकज कुमार ने सुविधाओं की कमी का हवाला देकर उसे अपने निजी क्लिनिक ‘बेबी मम्मी केयर सेंटर’ (इतवारी बाजार मोड़) में भर्ती कराने की सलाह दी।




इलाज के नाम पर मनमानी और मौत का सिलसिला
परिजनों का आरोप है कि सुबह करीब 9 बजे बच्चे को निजी क्लिनिक में भर्ती कराया गया, जहां पूरे दिन इलाज के बाद भी उसकी हालत में कोई सुधार नहीं हुआ। जब शाम करीब 5:30 बजे परिजनों ने बच्चे को किसी अन्य बेहतर अस्पताल ले जाने की इच्छा जताई, तो डॉक्टर ने उन्हें रोक लिया और बच्चे के पूरी तरह स्वस्थ होने का झूठा भरोसा दिया। आखिरकार, 28 अक्टूबर की भोर करीब 3:30 बजे नवजात ने दम तोड़ दिया, जिससे परिवार में कोहराम मच गया।
पुलिस कार्रवाई और प्रशासनिक जवाबदेही
घटना से आक्रोशित मृतक के पिता ने डॉक्टर पंकज कुमार के खिलाफ इलाज में घोर लापरवाही का आरोप लगाते हुए बिहार थाना में लिखित शिकायत दर्ज कराई है। इस संबंध में बिहार थाना अध्यक्ष रंजीत कुमार रजक ने बताया कि पुलिस को लिखित आवेदन मिल गया है और एफआईआर दर्ज कर मामले की निष्पक्ष जांच शुरू कर दी गई है। पीड़ित परिवार अब जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से सख्त कार्रवाई की मांग कर रहा है।

