Govind Singh Dotasra Attack on Bhajanlal Sharma: राजस्थान में भाजपा और कांग्रेस के बीच सियासी टकराव एक बार फिर तेज हो गया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने गुरुवार को जयपुर में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के कार्यक्रम को लेकर भाजपा पर निशाना साधा।

कांग्रेस वॉर रूम में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने आरोप लगाया कि 5 नवंबर को परकोटे में आयोजित भाजपा के कार्यक्रम से व्यापारियों और आम लोगों को परेशानी हुई। उन्होंने सवाल उठाया कि 1 नवंबर को दिल्ली में कांग्रेस की रैली पर व्यापारियों के नुकसान का मुद्दा उठाने वाली भाजपा को जयपुर में रैली के दौरान यही चिंता क्यों नहीं हुई?

दिल्ली की रैली पर सवाल, जयपुर में भाजपा ने क्या किया?

डोटासरा ने कहा कि भाजपा नेता दिल्ली में कांग्रेस की रैली को व्यापारियों के कारोबार में नुकसान से जोड़कर सवाल उठा रहे थे। लेकिन जयपुर के परकोटे में दीपावली से ठीक पहले आयोजित भाजपा के कार्यक्रम ने स्थानीय व्यापारियों और आम जनता को परेशान किया।

उन्होंने दावा किया कि त्योहार से दो-तीन दिन पहले भी बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही अपेक्षा के अनुरूप नहीं थी। व्यापारी कारोबार को लेकर चिंतित थे और उन्हें दीपावली का त्योहार मनाने की चिंता सता रही थी। डोटासरा ने भाजपा पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया।

रामलीला मैदान में 2 से ढाई हजार कुर्सियां, आम जनता पर उठाए सवाल

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने जयपुर के रामलीला मैदान में हुए कार्यक्रम की मौजूदगी पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने दावा किया कि कार्यक्रम में करीब दो से ढाई हजार कुर्सियां लगाई गई थीं। इनमें लगभग 500 भाजपा कार्यकर्ता और 500 पुलिसकर्मी मौजूद थे। इसके अलावा मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री के प्रोटोकॉल से जुड़े लोग भी कार्यक्रम में शामिल थे। डोटासरा के मुताबिक, कार्यक्रम में आम जनता की भागीदारी अपेक्षा के अनुरूप नहीं थी। उन्होंने भाजपा के आयोजन और उसके दावों पर सवाल उठाए।

कानून-व्यवस्था पर घेरा, भरतपुर से जयपुर तक की घटनाओं का जिक्र

डोटासरा ने प्रदेश में अराजकता के लिए भाजपा के आरोपों को खारिज करते हुए उल्टा सरकार को कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने भरतपुर में भाजपा के पूर्व विधायक की पीट-पीटकर हत्या, जयपुर में चार्टर्ड अकाउंटेंट के अपहरण और बजरी माफिया की ओर से पुलिसकर्मियों पर गाड़ियां चढ़ाने की घटनाओं का उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि सरकार का एक मंत्री रोजाना 8 करोड़ रुपये की बजरी चोरी होने की बात कहता है। जब पुलिस इस अवैध गतिविधि को रोकने जाती है तो उस पर हमले होते हैं। डोटासरा ने सवाल किया कि क्या प्रदेश में कानून-व्यवस्था की यह स्थिति अराजकता नहीं है?

SIR में नाम काटने के आरोपों पर भाजपा से मांगा जवाब

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर भी डोटासरा ने भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि भाजपा विधायकों, विधानसभा चुनाव के प्रत्याशियों और नेताओं ने मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए कलेक्टर और एसडीएम पर दबाव बनाया।

डोटासरा ने 20 से 25 हजार तक फॉर्म दिए जाने और देशभर में 13 करोड़ नाम काटे जाने के मुद्दे का उल्लेख करते हुए भाजपा से जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि विपक्ष यदि संविधान, लोकतंत्र और मताधिकार की रक्षा की बात करता है तो उसे अराजकता कैसे कहा जा सकता है?

NEET-2026 पेपर लीक पर भी सरकार को घेरा

पेपर लीक के मुद्दे पर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि उनकी पार्टी पिछले तीन साल से लगातार इस मामले को उठा रही है, लेकिन घटनाएं रुक नहीं रही हैं। उन्होंने NEET-2026 पेपर लीक का जिक्र करते हुए करीब 200 लोगों की गिरफ्तारी और FIR दर्ज होने को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि मामले में भाजपा से जुड़े लोगों के नाम सामने आने के बावजूद सरकार की ओर से स्पष्ट जवाब नहीं दिया जा रहा है।

12 लाख करोड़ के निवेश का हिसाब मांगा

डोटासरा ने राइजिंग राजस्थान के तहत निवेश के दावों को लेकर भी मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री 12 लाख करोड़ रुपये के निवेश की बात करते हैं, लेकिन जनता को यह नहीं बताया जा रहा कि वास्तव में कितना निवेश धरातल पर आया और कितने युवाओं को रोजगार मिला।

उन्होंने सरकार से निवेश, विदेश यात्राओं पर हुए खर्च, रोजगार सृजन और जमीन आवंटन का पूरा ब्योरा सार्वजनिक करने की मांग की। साथ ही आरोप लगाया कि सरकार ने अपने चहेते उद्योगपतियों और नेताओं को जमीन आवंटित करने के अलावा कोई उल्लेखनीय काम नहीं किया।

गहलोत पर टिप्पणी को लेकर मुख्यमंत्री को दी नसीहत

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के खिलाफ मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की भाषा पर भी डोटासरा ने आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री बनने से किसी व्यक्ति में सारा ज्ञान, ईमानदारी और समझ नहीं आ जाती। सत्ता स्थायी नहीं होती और मुख्यमंत्री को यह नहीं मानना चाहिए कि केवल वही सही हैं।

डोटासरा ने कहा कि अशोक गहलोत तीन बार मुख्यमंत्री, तीन बार केंद्रीय मंत्री और छह बार विधायक रहे हैं। ऐसे वरिष्ठ नेता के खिलाफ अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल मुख्यमंत्री पद की गरिमा के अनुरूप नहीं है। उन्होंने मुख्यमंत्री को सलाह दी कि विपक्ष के सवालों का जवाब शालीनता और तथ्यों के आधार पर देना चाहिए।

RPSC नियुक्तियों पर भी पूछे सवाल

RPSC सदस्यों की नियुक्तियों को लेकर डोटासरा ने कहा कि वसुंधरा राजे की सरकार के समय जिस प्रक्रिया से नियुक्तियां होती थीं, उसी प्रक्रिया का पालन अशोक गहलोत सरकार और अब भजनलाल सरकार भी कर रही है।

उन्होंने सवाल किया कि क्या मुख्यमंत्री ने RPSC सदस्यों की नियुक्ति से पहले उनका लाई डिटेक्टर टेस्ट कराया था, ताकि उनकी ईमानदारी सुनिश्चित की जा सके? डोटासरा ने कहा कि केवल आरोप लगने से किसी को दोषी नहीं माना जा सकता। अपराध साबित होने पर कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।

शिखर अग्रवाल और महेश जोशी के मामलों पर भी बोले

IAS अधिकारी शिखर अग्रवाल से जुड़े मामले पर डोटासरा ने कहा कि यदि किसी अधिकारी या उससे जुड़ी कंपनी को सरकारी कमेटी अथवा मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में लाभ मिला है तो सरकार को इस पर उठ रहे सवालों का जवाब देना चाहिए।

उन्होंने महेश जोशी का जिक्र करते हुए कहा कि क्या अदालत ने उन्हें दोषी साबित कर दिया है? डोटासरा ने कहा कि राजनीति में आरोप लगना और अदालत से दोषी साबित होना अलग-अलग बातें हैं। यदि किसी अधिकारी ने गलत काम किया है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन सिर्फ आरोपों के आधार पर किसी को अपराधी नहीं ठहराया जा सकता।

कांग्रेस नेताओं पर मुकदमों को लेकर सरकार को चेताया

डोटासरा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के आंदोलन और सरकार की आलोचना के बाद पुलिस अधिकारियों के जरिए पार्टी नेताओं के खिलाफ मुकदमे तलाशने का दबाव बनाया जाता है। उन्होंने कहा कि यदि किसी के खिलाफ अपराध बनता है तो कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन राजनीतिक विरोध के कारण पुलिस का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।

उन्होंने साफ कहा कि कांग्रेस जांच और कार्रवाई से नहीं डरती। यदि किसी ने गड़बड़ी की है तो सरकार उसकी जांच कराए, लेकिन विपक्ष को लगातार डराने और धमकाने की राजनीति स्वीकार नहीं की जाएगी। डोटासरा ने भाजपा सरकार से तीन साल के कार्यकाल का हिसाब देने और विकास कार्यों, योजनाओं तथा जनता से किए गए वादों पर जवाब देने की मांग की।

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