Lalluram Desk. भारत छह राज्यों में 10,000 एकड़ कृषि भूमि पर पारंपरिक यूरिया-आधारित उर्वरकों के विकल्प के रूप में ‘ग्रीन अमोनिया’ का परीक्षण कर रहा है। सरकार का मकसद पोषक तत्वों के उपयोग की दक्षता (nutrient-use efficiency) को बेहतर बनाना, लागत कम करना और इस स्वच्छ ईंधन के लिए घरेलू मांग पैदा करना है।

यूरिया और अन्य नाइट्रोजन-आधारित उर्वरकों के उत्पादन के लिए अमोनिया एक मुख्य कच्चा माल है। आमतौर पर इसे प्राकृतिक गैस से प्राप्त हाइड्रोजन का उपयोग करके बनाया जाता है, जिससे इसका उत्पादन जीवाश्म ईंधन (fossil fuels) पर निर्भर हो जाता है। भारत अपनी जरूरत का अधिकांश अमोनिया खुद ही बनाता है, लेकिन बाकी मांग पूरी करने के लिए उसे आयात पर निर्भर रहना पड़ता है।

सरकार यह जांच कर रही है कि क्या ‘ग्रीन अमोनिया’ – जिसे प्राकृतिक गैस के बजाय नवीकरणीय ऊर्जा (renewable energy) से चलने वाली इलेक्ट्रोलेसिस प्रक्रिया से बनी हाइड्रोजन का उपयोग करके तैयार किया जाता है – को सीधे मिट्टी में डाला जा सकता है, बिना इसे पहले यूरिया में बदले।

नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) के सचिव संतोष सारंगी ने कहा, “यूरिया के बजाय सीधे मिट्टी में अमोनिया डालने से लागत मौजूदा स्तर के लगभग एक-तिहाई तक कम हो सकती है और उर्वरक के उपयोग की दक्षता में सुधार हो सकता है। जब खेतों में यूरिया डाला जाता है, तो उसका एक बड़ा हिस्सा खाद देने और सिंचाई के दौरान बर्बाद हो जाता है। वहीं, सीधे मिट्टी में अमोनिया डालने (direct injection) से इस बर्बादी को कम करने में मदद मिल सकती है।”

कृषि वैज्ञानिक एक विशेष उपकरण (applicator) का उपयोग करके मिट्टी की सतह से लगभग छह इंच नीचे अमोनिया डालने की इस विधि का परीक्षण कर रहे हैं। सारंगी ने बताया कि इस तकनीक से आवश्यक उर्वरक की मात्रा और उसे खेतों में डालने की बारंबारता (कितनी बार खाद डालनी पड़ती है) दोनों को कम किया जा सकता है। यह परियोजना ‘नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन’ (NGHM) के तहत भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) द्वारा लागू की जा रही है।

भारत ने 2025-26 में 14.5 अरब डॉलर (लगभग 1.38 लाख करोड़ रुपये) से अधिक मूल्य के उर्वरक आयात किए। वहीं, कच्चे माल और घरेलू उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले इनपुट को मिलाकर, भारत का कुल उर्वरक आयात बिल 27.2 अरब डॉलर (लगभग 2.59 लाख करोड़ रुपये) से अधिक रहा। 16 मार्च 2025 तक, केंद्र सरकार ने उर्वरक सब्सिडी पर 1.93 लाख करोड़ रुपये खर्च किए, जबकि इसके लिए 2.02 लाख करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया था। सरसों समेत 10 फसलों पर ग्रीन अमोनिया का परीक्षण किया जा रहा है

ICAR ने 24 अक्टूबर को पंजाब में एक राष्ट्रीय प्रदर्शन पहल (national demonstration initiative) शुरू की है। इसका लक्ष्य 2026 के रबी सीजन के दौरान 10,000 एकड़ भूमि को कवर करना है। परियोजना के विवरण के अनुसार, पंजाब में छह कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) प्रत्येक 300 प्रदर्शन करेंगे, जिससे पूरे राज्य में कुल 1,800 प्रदर्शन किए जाएंगे।

इसके अलावा, ICAR हरियाणा के महेंद्रगढ़ में सरसों के खेतों में 300 एकड़ अतिरिक्त भूमि पर भी प्रदर्शन कर रहा है। इन परीक्षणों में फसल की वृद्धि, उत्पादकता, नाइट्रोजन के उपयोग की दक्षता और आर्थिक व्यवहार्यता का आकलन किया जाएगा। ICAR ने बताया कि लिक्विड अमोनिया में लगभग 82% नाइट्रोजन होता है और इसे विशेष उपकरणों की मदद से मिट्टी में एक निश्चित गहराई तक डाला जाता है।

ग्रीन अमोनिया के परीक्षणों से इसकी मांग बढ़ सकती है

सारंगी ने कहा कि इस पहल से ग्रीन अमोनिया के लिए नई घरेलू मांग पैदा हो सकती है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब सरकार कृषि क्षेत्र में, विशेष रूप से उर्वरक उत्पादन में, ग्रीन अमोनिया के उपयोग को बढ़ाने का प्रयास कर रही है।

जनवरी 2023 में 19,744 करोड़ रुपये के बजट के साथ शुरू किए गए ‘नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन’ (NGHM) का उद्देश्य भारत को ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन, उपयोग और निर्यात के लिए एक वैश्विक केंद्र बनाना है। इस मिशन के तहत, सरकार उर्वरक उत्पादन में ग्रीन अमोनिया के उपयोग को बढ़ावा दे रही है।

सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (SECI) ने 10 साल के अनुबंधों के तहत 13 उर्वरक इकाइयों को 724,000 टन प्रति वर्ष ग्रीन अमोनिया की आपूर्ति आवंटित की है। इसकी कीमत 49.75 रुपये से लेकर 64.74 रुपये प्रति किलोग्राम के बीच तय की गई है।

2023 में NGHM की शुरुआत के बाद से, भारत को ग्रीन हाइड्रोजन और इसके उत्पादों (derivatives) के लिए लगभग 5.5 लाख टन प्रति वर्ष के निर्यात ऑर्डर मिले हैं। इसमें से अकेले 2026 में ही लगभग 4.5 लाख टन प्रति वर्ष के ऑर्डर प्राप्त हुए हैं।

केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि भारतीय डेवलपर्स ने ग्रीन हाइड्रोजन और इसके उत्पादों के लिए दुनिया भर में सबसे अधिक कुल निर्यात ऑर्डर हासिल किए हैं।

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