गुजरात में गोहत्या के एक मामले में बड़ा अदालती फैसला सामने आया है। गांधीनगर की एक सत्र अदालत ने गोहत्या के तीन दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत ने तीनों दोषियों—वसीम कुरैशी, मोहम्मद रफीक कुरैशी और अशफाक बहेलिम पर तीन-तीन लाख रुपये का भारी जुर्माना भी लगाया है।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश बी. आर. राजपूत की अदालत ने अपने ऐतिहासिक फैसले में प्राचीन हिंदू ग्रंथों, मनुस्मृति और वेदों का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए गाय के सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व को रेखांकित किया। अदालत ने कहा कि गाय महज एक पशु नहीं है, बल्कि इसे भौतिक समृद्धि और सदाचार यानी ‘धर्म’ का मूल आधार माना गया है। फैसले में उल्लेख किया गया कि जब अमृत की बूंदें धरती पर गिरीं, तब कामधेनु प्रकट हुईं, जिन्हें धरती पर पूरे गोवंश की जननी माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार गाय के शरीर में 33 करोड़ देवी-देवताओं का वास होता है और उसके चार पैर चारों वेदों के प्रतीक हैं।
मामले की पृष्ठभूमि के अनुसार, 22 अगस्त 2024 को गांधीनगर जिले के जमला गांव में एक घर पर पुलिस ने छापेमारी की थी। इस दौरान मौके से 277 किलोग्राम गोमांस, पशु वध में इस्तेमाल होने वाले हथियार और एक वाहन जब्त किया गया था। अभियोजन पक्ष ने अदालत में बताया कि आरोपी आर्थिक लाभ कमाने के उद्देश्य से कमजोर या दूध न देने वाले मवेशियों को खरीदते थे और फिर उन्हें कटवाकर मांस तैयार करवाते थे। मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने छह में से तीन आरोपियों को दोषी ठहराया।
उल्लेखनीय है कि गुजरात सरकार ने वर्ष 2017 में ‘गुजरात पशु संरक्षण अधिनियम 1954’ में संशोधन करके गोहत्या के दोषियों के लिए आजीवन कारावास का कड़ा प्रावधान किया था। इस कानून के साथ ही गुजरात गोहत्या के खिलाफ इतनी सख्त सजा तय करने वाला देश का पहला राज्य बना था। अदालत के इस फैसले को गोहत्या रोकने के प्रति राज्य की शून्य-सहनशीलता (जीरो टॉलरेंस) नीति का एक कड़ा संदेश माना जा रहा है।
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