गुजरात सरकार ने दीपावली के पावन अवसर पर एक मानवीय और सराहनीय पहल करते हुए राज्य की विभिन्न जेलों में सजा काट रहे कैदियों के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। जेल सुधार नीति और कैदी कल्याण गतिविधियों के तहत, 60 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्ग पुरुषों और महिला कैदियों को धनतेरस के दिन से 15 दिनों की विशेष पैरोल पर रिहा किया गया है। सरकार के इस कदम का मुख्य उद्देश्य कैदियों को अपने परिवारों के साथ त्योहार मनाने का अवसर देना और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है।
मिली जानकारी के अनुसार, इस साल कुल 143 पात्र कैदियों को इस योजना का लाभ मिला है। इसमें 60 वर्ष या उससे अधिक उम्र के 103 पुरुष कैदी और 40 महिला कैदी शामिल हैं। यह विशेष पैरोल व्यवस्था 06 नवंबर 2026 (धनतेरस) से शुरू हो चुकी है, जिसके तहत ये सभी कैदी अगले 15 दिनों तक अपने परिवार के साथ घर पर दिवाली का आनंद ले सकेंगे।
आपको बता दें कि गुजरात सरकार वर्ष 2003 से लगातार हर साल दिवाली के मौके पर पात्र कैदियों को यह 15 दिवसीय पैरोल देती आ रही है। जेल प्रशासन और गृह विभाग के मार्गदर्शन में यह पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से पूरी की जाती है, ताकि केवल नियमों के दायरे में आने वाले कैदियों को ही इसका लाभ मिल सके।
कौन से कैदी हैं अपात्र?
जेल प्रशासन के स्पष्ट नियमों के अनुसार, हर कैदी को इस पैरोल का लाभ नहीं मिलता है। गंभीर अपराधों में संलिप्त अपराधियों को इस सुविधा से पूरी तरह बाहर रखा गया है। जिन कैदियों की अपील उच्च न्यायालय में लंबित है, जो दूसरे राज्यों या अन्य देशों (एनआरआई) के रहने वाले हैं, उन्हें यह लाभ नहीं मिलता है।
इसके अलावा, एनडीपीएस (NDPS) एक्ट, टाडा (TADA), पोटा (POTA) जैसे कानूनों के तहत सजा काट रहे कैदी, आतंकवादी गतिविधियों या देश-राज्य की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुँचाने वाले अपराधी, एक से अधिक मामलों में दोषी पाए गए लोग, तथा बलात्कार, अपहरण, डकैती, जबरन वसूली, गंभीर मारपीट और चोरी जैसे जघन्य अपराधों में शामिल कैदी दिवाली पैरोल के लिए पात्र नहीं माने जाते हैं। प्रशासन की ओर से यह सुनिश्चित किया जाता है कि समाज की सुरक्षा और कानून व्यवस्था पर कोई आंच न आए।
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