देश के प्रमुख औद्योगिक राज्यों में शामिल गुजरात में बिजली संकट का खतरा मंडराने लगा है। राज्य सरकार ने कारखानों और औद्योगिक इकाइयों से अपील की है कि वे शाम के समय बिजली की खपत में कटौती करें, ताकि राज्य को बड़े पावर कट और बिजली आपूर्ति के संकट से बचाया जा सके।

मौसम में बदलाव, अत्यधिक गर्मी, फसलों की सिंचाई के लिए बढ़ती जरूरतें और औद्योगिक गतिविधियों में आई तेजी के कारण देशभर में बिजली की मांग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। दूसरी ओर, बिजली संयंत्रों में कोयले के घटते स्टॉक ने इस स्थिति को और अधिक गंभीर बना दिया है।

केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) के आंकड़ों के मुताबिक, देश के 191 कोयला आधारित पावर प्लांटों में से लगभग आधे प्लांटों में कोयले का रिजर्व बहुत ही निचले स्तर पर आ गया है। भारत में दिन के समय सौर और अन्य स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों से पर्याप्त बिजली बनती है, लेकिन इस ऊर्जा को स्टोर करने के लिए बड़े पैमाने पर बैटरी स्टोरेज की सुविधा न होने के कारण शाम के पीक आवर्स (शाम 5 बजे से रात 11 बजे तक) के दौरान आपूर्ति बनाए रखना बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है।

इसी स्थिति को देखते हुए राज्य की बिजली वितरण कंपनियों ने उद्योगों और आम नागरिकों को संदेश जारी कर बिजली की बचत करने का आग्रह किया है। विशेष रूप से विनिर्माण और भारी उद्योगों से कहा गया है कि वे अपनी उत्पादन प्रक्रियाओं के समय में बदलाव करें और भारी बिजली खपत वाले कार्यों को शाम के पीक आवर्स के बजाय दिन के समय संचालित करें।

गुजरात सरकार के अनुसार, इस स्थिति से निपटने के लिए केंद्र सरकार से अतिरिक्त कोयले और बिजली की आपूर्ति की मांग की गई है। इसके साथ ही, राज्य भविष्य में बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए परमाणु ऊर्जा, नए कोयला संयंत्रों और बैटरी स्टोरेज परियोजनाओं पर काम कर रहा है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, केवल गुजरात ही नहीं, बल्कि पंजाब, मध्य प्रदेश, बिहार, केरल, तमिलनाडु और हिमाचल प्रदेश जैसे कई अन्य राज्य भी बिजली आपूर्ति बनाए रखने के लिए अल्पकालिक टेंडर के जरिए बिजली खरीदने की कोशिश कर रहे हैं।

अक्टूबर महीने की शुरुआत से ही पावर प्लांटों में कोयले का कुल स्टॉक लगभग 5% घट गया है, जबकि बिजली की दैनिक पीक मांग पिछले साल की तुलना में 45 से 50 गीगावाट तक अधिक दर्ज की जा रही है। पिछले महीने बिजली की मांग और आपूर्ति का अंतर बढ़कर 560 मिलियन किलोवाट-घंटे तक पहुंच गया, जो हाल के समय का सबसे ऊंचा स्तर है। यदि कोयले की आपूर्ति जल्द सामान्य नहीं हुई, तो आने वाले दिनों में औद्योगिक उत्पादन पर इसका प्रतिकूल असर पड़ सकता है।

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