गुरुग्राम। सड़क की धूल और निर्माण मलबे से बढ़ते प्रदूषण को लेकर वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने नगर निगम आयुक्त प्रदीप दहिया और गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (GMDA) के CEO पीसी मीणा को नोटिस जारी किया है। आयोग ने दोनों अधिकारियों को 3 नवंबर को व्यक्तिगत सुनवाई के लिए पेश होकर जवाब देने का निर्देश दिया है। आयोग के अनुसार, 104 किलोमीटर सड़कों के निरीक्षण में 258 गंभीर उल्लंघन पाए गए।
आयोग ने सवाल उठाया है कि बार-बार निर्देश देने के बावजूद सड़कों से धूल और निर्माण मलबा हटाने के लिए ठोस कदम क्यों नहीं उठाए गए। नोटिस के मुताबिक, टूटी सड़कें, गड्ढे, सड़क किनारे जमा मिट्टी और निर्माण एवं विध्वंस (C&D) का कचरा प्रदूषण की समस्या बढ़ा रहे हैं।
निरीक्षण में सड़कों पर मिली धूल और निर्माण मलबा
आयोग ने गुरुग्राम में प्रदूषण नियंत्रण के इंतजामों की जांच के लिए कई बार निरीक्षण कराया। पहले नगर निगम क्षेत्र की 125 सड़कों का निरीक्षण किया गया था। इसकी रिपोर्ट 16 दिसंबर 2025 को आयोग को सौंपी गई थी।
रिपोर्ट में 34 स्थानों पर सड़कों पर मिट्टी मिली थी। 58 स्थानों की स्थिति ठीक-ठाक बताई गई, जबकि 29 स्थानों पर कम मिट्टी मिली। चार सड़कें ऐसी थीं, जहां मिट्टी नहीं पाई गई।
इसके बाद 5 जनवरी को आयोग ने नगर निगम को धूल नियंत्रण के निर्देश दिए। 4 फरवरी को सेक्टर-49, 57, 70, 73, 74 और 75 की सड़कों पर प्रदूषण और C&D वेस्ट पड़े होने की सूचना मिली। अगले दिन विशेष निरीक्षण कराया गया, जिसमें सड़कों पर मिट्टी और निर्माण मलबा पाया गया।
बार-बार निर्देश के बाद भी नहीं सुधरे हालात
13 फरवरी को आयोग ने नगर निगम के चीफ इंजीनियर और GMDA के इंफ्रा-1 प्रमुख सहित इंफ्रा-2 के अधीक्षण अभियंता से कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी। 18 मार्च को दोनों विभागों को सड़कों को धूल-मुक्त करने, टूटी सड़कों की मरम्मत कराने और अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने के निर्देश दिए गए।
5 अप्रैल को हुए निरीक्षण में भी सड़कों पर धूल और निर्माण मलबा मिला। इसके बाद 17 अप्रैल को नगर निगम आयुक्त को नोटिस जारी किया गया था। उन्हें 27 अप्रैल की सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से पेश होकर जवाब देने को कहा गया।
सुनवाई के दौरान नगर निगम आयुक्त ने प्रदूषण नियंत्रण के लिए किए जा रहे प्रयासों और योजना की जानकारी आयोग को दी थी। उन्होंने यह भी बताया था कि प्रदूषण नियंत्रण में लापरवाही के आरोप में एक सीनियर सेनेट्री इंस्पेक्टर को निलंबित किया गया है।
इसके बाद 11 मई को नगर निगम और GMDA को डस्ट कंट्रोल और मैनेजमेंट सेल के माध्यम से प्रदूषण नियंत्रण के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए गए।
14 अक्टूबर के निरीक्षण में फिर मिलीं खामियां
आयोग ने 14 अक्टूबर को शहर की 258 सड़कों का निरीक्षण किया। इनमें नगर निगम की 174 और GMDA की 84 सड़कें शामिल थीं। निरीक्षण में टूटी सड़कें, गड्ढे, मिट्टी और सड़क किनारे निर्माण मलबा मिला। आयोग ने इन्हें प्रदूषण का कारण बताया।
नोटिस के अनुसार, 13 अक्टूबर तक लोगों ने सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से नगर निगम के खिलाफ 1,135 शिकायतें दर्ज कराई थीं। GMDA के खिलाफ 183 शिकायतें मिली थीं।
आयोग ने दोनों विभागों को शिकायतों पर कार्रवाई करने, निगरानी रखने और फॉलोअप करने के निर्देश दिए थे। आयोग का कहना है कि इन निर्देशों का पालन नहीं किया गया और धूल रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए।
3 नवंबर को आयोग के सामने देना होगा जवाब
आयोग के निदेशक शिवेंद्र चतुर्वेदी ने नगर निगम आयुक्त प्रदीप दहिया और GMDA CEO पीसी मीणा को नोटिस जारी किया है। दोनों अधिकारियों को 3 नवंबर को व्यक्तिगत रूप से पेश होकर बताना होगा कि प्रदूषण नियंत्रण के लिए जारी निर्देशों का प्रभावी पालन क्यों नहीं हुआ।
आयोग ने अपने नोटिस में कहा है कि दिल्ली-NCR में वायु गुणवत्ता सुधारने और पर्यावरण संरक्षण के लिए संबंधित अधिकारियों को कदम उठाने के अधिकार दिए गए हैं। इसके बावजूद गुरुग्राम में सड़क की धूल और निर्माण मलबे से होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करने में लापरवाही सामने आई है।
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