कर्ण मिश्रा, ग्वालियर। अगर आप पेंशनर हैं और हर साल बैंक में लाइफ सर्टिफिकेट जमा करवाते हैं तो यह खबर आपके लिए बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि साइबर ठग अब पेंशनर्स को भी निशाना बना रहे हैं। सरकारी बैंक के नाम और डिजिटल सुविधाओं का सहारा ले रहे हैं और फर्जी विज्ञापन के झांसे में आकर अपनी खून पसीने की कमाई गंवा रहे हैं।

ऐसा ही कुछ हुआ ग्वालियर के दर्पण कॉलोनी निवासी रिटायर्ड मौसम वैज्ञानिक उमाशंकर चौकसे के साथ। उन्होंने फेसबुक पर सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के नाम से डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट का विज्ञापन देखा और उसे असली समझकर क्लिक कर दिया। इसके बाद ठगों ने फोन कर उनसे जानकारी ली और तीन ट्रांजैक्शन में खाते से 31 हजार रुपये निकाल लिए।

दरअसल, उमाशंकर चौकसे पेंशनर हैं और हर साल नवंबर में बैंक में लाइफ सर्टिफिकेट जमा करते हैं। इसी बीच उन्हें फेसबुक पर सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के लोगो के साथ डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट अपडेट का विज्ञापन दिखाई दिया। विज्ञापन में ऑनलाइन लाइफ सर्टिफिकेट जमा करने और फेस ऑथेंटिकेशन जैसी सुविधाओं का जिक्र था। इसे बैंक की आधिकारिक सुविधा समझकर उन्होंने लिंक पर क्लिक कर दिया। 

पीड़ित के मुताबिक, लिंक पर क्लिक करने के बाद उनके पास एक फोन आया। कॉल करने वाले ने खुद को संबंधित प्रक्रिया से जुड़ा बताकर उनसे पेंशन और बैंक खाते से जुड़ी जानकारी मांगी। इसके कुछ ही देर बाद उनके खाते से तीन बार में कुल 31 हजार रुपये कट गए। ठगी का अहसास होने पर उन्होंने साइबर सेल पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। 

उमाशंकर चौकसे ने सोशल मीडिया पर दिखने वाले विज्ञापनों को लेकर लोगों, खासकर पेंशनर्स को सतर्क रहने की अपील की है। उनका कहना है कि फेसबुक पर बैंक और सरकारी संस्थानों के नाम से दिखने वाले विज्ञापनों पर आंख मूंदकर भरोसा न करें। किसी भी लिंक पर क्लिक करने या अपनी बैंकिंग जानकारी साझा करने से पहले उसकी आधिकारिकता जरूर जांचें। खुद के साथ हुई ठगी से आहत होकर उन्होंने फेसबुक को फर्जी बुक बताया है।

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