कर्ण मिश्रा, ग्वालियर। ग्वालियर में पिछले छह दिनों से नर्सिंग छात्र अपने भविष्य की लड़ाई लड़ रहे हैं और आज उनकी यह लड़ाई कलेक्ट्रेट तक पहुंच गई। कटोरा ताल के फ्लैग पॉइंट पर प्रदर्शन कर रहे BSC और GNM नर्सिंग छात्रों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रदर्शन किया। इसी दौरान एक छात्रा की अचानक तबीयत बिगड़ गई। कलेक्ट्रेट में मौजूद डॉक्टरों ने प्राथमिक जांच की, लेकिन हालत बिगड़ती देख एम्बुलेंस बुलाई गई। एंबुलेंस आने में देरी हुई तो NSUI जिला अध्यक्ष छात्रा को अपनी कार से अस्पताल लेकर रवाना हुए।
दरअसल, नर्सिंग छात्र पिछले छह दिनों से कटोरा ताल स्थित फ्लैग पॉइंट पर ‘नर्सिंग का जंतर-मंतर’ नाम से अनिश्चितकालीन आंदोलन कर रहे हैं। प्रशासन की अनुमति के बिना प्रदर्शन करने को लेकर अधिकारियों की ओर से FIR की चेतावनी दिए जाने से नाराज छात्र आज कलेक्ट्रेट पहुंच गए। जहां छात्रों ने प्रदर्शन करते हुए साफ कहा कि उन्हें फ्लैग पॉइंट पर आंदोलन जारी रखने की अनुमति दी जाए। छात्रों और प्रशासन के बीच SDM नरेंद्र बाबू यादव से चर्चा भी हुई।
छात्रा की तबीयत बिगड़ने पर कलेक्ट्रेट में जमकर हंगामा
हालांकि इसी दौरान प्रदर्शन कर रही आरती नाम की BSC नर्सिंग छात्रा की तबीयत अचानक बिगड़ गई। कलेक्ट्रेट परिसर में मौजूद डॉक्टरों ने उसका प्राथमिक चेकअप किया। हालत गंभीर होती देख एंबुलेंस बुलाई गई, लेकिन एंबुलेंस पहुंचने में देरी हुई। इसके बाद NSUI जिला अध्यक्ष पवन अपनी कार से छात्रा को लेकर अस्पताल के लिए रवाना हुए। इस घटना से छात्रों में नाराजगी बढ़ गई और कलेक्ट्रेट परिसर में जमकर हंगामा हुआ। स्थिति को देखते हुए विश्वविद्यालय थाना पुलिस भी मौके पर पहुंची।
छात्रों ने उठाए सवाल
छात्रों का कहना है कि उनकी लड़ाई सिर्फ परीक्षा और रिजल्ट के लिए नहीं, बल्कि शिक्षा के अधिकार और अपने भविष्य की सुरक्षा के लिए है। छात्रों के मुताबिक, GNM का तीन साल का कोर्स छह साल तक खिंच रहा है, जबकि BSC नर्सिंग का चार साल का कोर्स सात साल तक पहुंच गया है। BSC नर्सिंग के 2020, 2021 और 2022 तथा GNM के 2021 और 2022 सत्र की परीक्षाओं और परिणामों को लेकर भी लंबे समय से छात्र परेशान हैं। छात्र कॉलेजों की मान्यता, व्यवस्थाओं और कथित अनियमितताओं के साथ स्कॉलरशिप से जुड़े मामलों को लेकर भी सवाल उठा रहे हैं।
कॉलेज पर CBI की ‘ग्रीन चेक’ नहीं तो परीक्षा पर ब्रेक
इसी बीच आज सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई ने इस आंदोलन को एक नया मोड़ दे दिया है। सुप्रीम कोर्ट में नर्सिंग कॉलेजों और छात्रों से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान CBI जांच और कॉलेजों की उपयुक्तता को लेकर अहम दिशा सामने आई है। जिन कॉलेजों को CBI की जांच में ‘ग्रीन चेक’ नहीं मिलेगा, वहां परीक्षा कराने की अनुमति नहीं होगी। ऐसे कॉलेजों के छात्रों को दूसरे संस्थानों में परीक्षा दिलाने की व्यवस्था किए जाने की बात सामने आई है। यानी अब छात्रों की चिंता सिर्फ परीक्षा कब होगी, इस सवाल तक सीमित नहीं है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर जिस कॉलेज में उन्होंने सालों से पढ़ाई की, वही CBI जांच में परीक्षा के लिए उपयुक्त नहीं पाया गया, तो उनका भविष्य क्या होगा? छात्रों का कहना है कि जिन कॉलेजों के CBI निरीक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट में पहले से मामला और रोक की स्थिति बनी हुई है, उन्हीं कॉलेजों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के सामने अब अनिश्चितता और बढ़ गई है।
छात्रों की प्रमुख मांगें
- लंबित परीक्षा परिणाम जल्द जारी हो।
- लंबित परीक्षाओं की तारीख घोषित हो।
- सभी पात्र छात्रों को परीक्षा में शामिल किया जाए।
- कॉलेज की लापरवाही से रुकी स्कॉलरशिप वाले छात्रों की फीस माफ हो।
एक तरफ कलेक्ट्रेट के बाहर छात्र अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं, दूसरी तरफ देश की सर्वोच्च अदालत में उनके कॉलेजों की मान्यता और परीक्षा को लेकर तस्वीर साफ होने की कोशिश चल रही है। छात्रों के लिए यह सिर्फ एक परीक्षा नहीं, बल्कि सालों से अटके करियर को बचाने की लड़ाई है। अब उनकी नजर सुप्रीम कोर्ट के अगले निर्देशों पर है और ग्वालियर में प्रशासन से भी वे प्रदर्शन की अनुमति देने की मांग पर अड़े हुए हैं।
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