कर्ण मिश्रा, ग्वालियर। एमपी के ग्वालियर में सरकारी जमीन पर बुलडोजर कार्रवाई को लेकर बवाल मच गया। वार्ड-38 के बेलदार का पुरा में करीब 100 करोड़ रुपये की जमीन पर बने लगभग 45 मकानों को तोड़ने प्रशासन की टीम पहुंची, तो रहवासियों ने विरोध शुरू कर दिया। किसी ने रजिस्ट्री दिखाई, तो किसी ने संपत्तिकर की रसीदें और नामांतरण के दस्तावेज सामने रख दिए। लोगों का सवाल है कि अगर जमीन सरकारी थी, तो उनकी रजिस्ट्री कैसे हुई? वहीं, एसडीएम का कहना है कि जमीन शासकीय है और इसे बेचने वाले पूर्व भू-स्वामियों के खिलाफ भी FIR दर्ज कराई जाएगी।

ग्वालियर के वार्ड नंबर 38 स्थित बेलदार का पुरा में उस वक्त तनाव की स्थिति बन गई, जब भारी पुलिस बल और जेसीबी के साथ प्रशासनिक अमला करीब 45 मकानों पर कार्रवाई करने पहुंचा। करीब 100 करोड़ रुपये आंकी जा रही जमीन पर कार्रवाई की सूचना मिलते ही स्थानीय लोग विरोध में उतर आए। रहवासियों ने प्रशासन के सामने अपने मकानों की रजिस्ट्री, नगर निगम के संपत्तिकर की रसीदें, नामांतरण और बैंक फाइनेंस से जुड़े दस्तावेज रखे। 

लोगों का कहना है कि उन्होंने वर्षों पहले जमीन खरीदकर मकान बनाए और नियमित रूप से बिजली बिल,संपत्तिकर का भुगतान भी किया। इसके बावजूद अब उन्हें मकान टूटने का डर सता रहा है। सरकारी बैंक से मकान बनवाने के लिए फ़ायसेन्स भी कराया, जिसका कर्जा अभी भी उनके सर पर है। कार्रवाई का विरोध कर रहे रहवासियों ने प्रशासन के सामने अपनी पीड़ा जाहिर की। स्थानीय लोगो  ने चेतावनी दी कि अगर मकान तोड़े गए, तो वह बच्चों के साथ बुलडोजर के आगे लेट जाएंगे। 

मौके पर पहुंचे एसडीएम नरेंद्र बाबू यादव ने प्रशासन का पक्ष रखते हुए बताया कि संबंधित जमीन खसरा क्रमांक 1887, 89 और 90 की शासकीय भूमि है। उनके मुताबिक, पहले भी जमीन के शासकीय होने की बात सामने आई थी, लेकिन पूर्व भू-स्वामियों ने इसे बेच दिया और लोगों ने यहां निर्माण कर लिया।एसडीएम ने यह भी बताया कि पूर्व भू-स्वामियों की ओर से कोर्ट में स्टे लिया गया है, जिस पर फिलहाल विचार चल रहा है।प्रशासन ने संबंधित लोगों को नोटिस दिए हैं और जमीन बेचने वाले पूर्व भू-स्वामियों के खिलाफ FIR दर्ज कराने की बात भी कही है। 

बुलडोजर कार्रवाई की आशंका के बीच रहवासी अपने मकान बचाने के लिए अधिकारियों से गुहार लगाते रहे। दूसरी तरफ,प्रशासन जमीन को शासकीय बताते हुए कार्रवाई की बात कह रहा है।फिलहाल, भारी पुलिस बल की मौजूदगी में बने तनाव के बीच प्रशासनिक अमला मौके से लौट गया। बेलदार का पुरा में फिलहाल मकान तोड़ने की कार्रवाई नहीं हुई, लेकिन विवाद कई सवाल छोड़ गया है। अगर जमीन शासकीय है, तो उसकी रजिस्ट्री और नामांतरण कैसे हुए? और अगर लोगों ने दस्तावेजों के आधार पर मकान खरीदे, तो उनकी जिम्मेदारी किसकी है? अब इस पूरे मामले में अदालत की कार्यवाही और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर सबकी नजर रहेगी।

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