सपा सांसद हरेंद्र मलिक ने मुजफ्फरनगर में मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर हुए विरोध प्रदर्शन के बाद कहा कि हालात अघोषित आपातकाल जैसे थे. उन्होंने आंदोलनकारियों के साथ सम्मानजनक व्यवहार और विवादों के समाधान के लिए बातचीत पर जोर दिया.
मुजफ्फरनगर. उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर हुए विरोध प्रदर्शन के बाद समाजवादी पार्टी के सांसद हरेंद्र मलिक ने लोकतंत्र और संवैधानिक अधिकारों को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि प्रदर्शन के दौरान बने हालात अघोषित आपातकाल जैसे थे और लोकतंत्र की हत्या हुई है. सांसद ने संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखने की बात कही.
संविधान की रक्षा पर जोर
हरेंद्र मलिक ने कहा कि भारतीय संविधान और बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के संविधान पर हमला होगा, तो वह लोकतंत्र की रक्षा के लिए लड़ाई लड़ते रहेंगे. उन्होंने संवैधानिक मूल्यों की सुरक्षा को लेकर अपनी प्रतिबद्धता भी दोहराई.
आंदोलनकारियों के व्यवहार पर सवाल
सपा सांसद ने विरोध प्रदर्शन के दौरान आंदोलनकारियों के साथ किए जाने वाले व्यवहार पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि कुछ लोगों को खड़ा करके प्रदर्शनकारियों के साथ बदतमीजी करने की परंपरा शुरू होना उचित नहीं है.
उन्होंने जोर दिया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विरोध दर्ज कराने और अपनी बात रखने के अधिकार का सम्मान किया जाना चाहिए. उनके मुताबिक, किसी भी विवाद का समाधान टकराव के बजाय बातचीत के जरिए निकालने का प्रयास होना चाहिए.
सांसद और विधायक भी हिरासत में
हरेंद्र मलिक ने बताया कि उन्हें और चरथावल के विधायक को भी डिटेन किया गया था. हालांकि, उन्होंने कहा कि उनके साथ वैसा व्यवहार नहीं किया गया, जैसा प्रदर्शनकारियों के साथ किए जाने को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं.
सांसद ने दोहराया कि संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के लिए उनका संघर्ष जारी रहेगा. उनके बयान के बाद विरोध प्रदर्शन के संदर्भ में लोकतांत्रिक अधिकारों और आंदोलनकारियों के साथ व्यवहार को लेकर राजनीतिक चर्चा का मुद्दा सामने आया है.

