राकेश चतुर्वेदी, भोपाल। बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री द्वारा महिलाओं को दी गई चेतावनी और अपील के बाद अब संत समाज से ही इस पर प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। हाल ही में साध्वी हर्षानंद गिरि का एक बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने धीरेंद्र शास्त्री के उस बयान पर बड़ा सवाल उठाया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि आश्रम आने वाली माताएं-बहनें अनजान लोगों पर भरोसा न करें और अपनी सुरक्षा खुद करें। हर्षानंद गिरि ने दो टूक कहा है कि जब आश्रम और वहां के सेवादार खुद सुरक्षित नहीं हैं, तो ऐसे स्थानों पर परिवार या बच्चों को भेजने का जोखिम क्यों उठाया जाए।

भक्त उस आश्रम पर कैसे भरोसा कर सकते

वायरल बयान में साध्वी हर्षानंद गिरि ने खुलकर अपनी बात रखी और कहा कि किसी से उनकी कोई व्यक्तिगत दुश्मनी नहीं है, लेकिन जो बयान सामने आ रहे हैं कि आश्रम में माताएं-बहनें न आएं या सेवादारों पर भरोसा न करें, वे चिंताजनक हैं। हर्षानंद गिरि ने सवाल उठाया कि अगर किसी संत को अपने ही आश्रम के सेवादारों पर भरोसा नहीं है, तो भक्त उस आश्रम पर कैसे भरोसा कर सकते हैं? उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जब कोई यह गारंटी ही नहीं ले रहा कि “तुम आओ और हम तुम्हें पूरी सुरक्षा देंगे”, तो वहां जाने का क्या औचित्य है?

आश्रम की राजनीति में क्यों पड़ना

साध्वी हर्षानंद गिरि ने स्पष्ट रूप से कहा कि हर आश्रम बुरा नहीं होता, लेकिन इस दुविधा में रहने से बेहतर है कि लोग आश्रमों में रुकने से बचें। उन्होंने सलाह दी कि मंदिर जाएं, भगवान के दर्शन करें और तुरंत अपने घर वापस लौट आएं। घर पर रहकर करें पूजा-पाठ: साध्वी ने कहा कि यदि सुरक्षित रहना है, तो अपने घर पर रहकर मंत्र जाप और पूजा-पाठ करें। खुद जिन्होंने आश्रम बनाए हैं, जब वे उन्हें नहीं संभाल पा रहे हैं, तो लोगों को आश्रम की राजनीति और पंचायत में पड़ने की कोई जरूरत नहीं है।

बयान के बाद गरमाया संतों का मुद्दा

धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की अपील के बाद हर्षानंद गिरि के इस बयान ने धार्मिक और आध्यात्मिक हलकों में एक नई बहस छेड़ दी है। एक तरफ जहां सुरक्षा को लेकर सतर्कता बरतने की बात कही जा रही है, वहीं दूसरी तरफ आश्रमों की व्यवस्था और वहां की आंतरिक सुरक्षा पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं।

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