Dharm Desk – हरतालिका तीज का व्रत सौभाग्यवती महिलाओं के लिए बहुत ही खास होता है। पति की लंबी आयु और अच्छे स्वास्थ्य सुख-समृद्धि के लिए महिलाएं इस व्रत को करती है। इस दिन निर्जला व्रत धारण करती हैं और पूरे दिन भक्ति भाव में लीन रहकर भगवान शंकर तथा देवी पार्वती की उपासना करती हैं। इस विशेष अवसर पर शाम के समय मतलब प्रदोष काल में की जाने वाली पूजा बहुत फलदायी और कल्याणकारी मानी जाती है। कहा जाता है कि इस शुभ मुहूर्त में की गई आराधना और विशेष नियमों का पालन करने से साधक के जीवन के समस्त कष्ट दूर होते हैं और घर-परिवार में सुख शांति तथा समृद्धि का वास होता है।

पार्थिव शिवलिंग पूजा और प्रदोष काल का विशेष महत्व

हरतालिका तीज के दिन शुद्ध मिट्टी से पार्थिव शिवलिंग बनाकर उनका पूजन करने की प्राचीन परंपरा है। स्त्रियां पूर्ण पवित्रता और श्रद्धा के साथ प्रदोष काल में पार्थिव शिवलिंग की स्थापना करती हैं। पूजा की शुरुआत में शिवलिंग का जल, दूध, अक्षत, चंदन और रोली से नियमपूर्वक अभिषेक किया जाता है। पार्थिव शिवलिंग की पूजा को अत्यंत पुण्यदाई माना गया है। क्योंकि मिट्टी से बने शिवलिंग में साक्षात शंकर तत्व का वास माना जाता है। महिलाएं पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ शिव-पार्वती के मंत्रों का जाप करते हुए आरती उतारती हैं। यह पूजन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है।बल्कि यह मनुष्य के अंदर अनुशासन संयम और असीम आध्यात्मिक चेतना का संचार भी करता है।

दांपत्य सुख और इच्छापूर्ति के लिए करें यह विशेष कार्य

  1. प्रदोष काल में पार्थिव शिवलिंग की पूजा करते समय 1 बेलपत्र और 7 शमीपत्र पूरी श्रद्धा विधि से अर्पित करें।ऐसा करने से अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है और दांपत्य जीवन के क्लेश दूर होते हैं।
  2. पूजा के दौरान देवी पार्वती को लाल चुनरी और सुहाग की वस्तुएं अर्पित करने से वैवाहिक जीवन में मधुरता और स्थायित्व आता है।
  3. संध्या के समय जब दिन और रात का मिलन होता है प्रदोष काल उस समय एकाग्रचित्त होकर पार्थिव शिवलिंग के सामने घी का दीपक जलाकर आरती करने से आर्थिक परेशानियां दूर होती हैं और घर में सकारात्मक ऊर्जा का विस्तार होता है।