Haryana 60 Years Development : कुरुक्षेत्र। हरियाणा के 60 साल के सफर को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने प्रदेशवासियों की मेहनत और उपलब्धियों से जोड़ते हुए कहा कि मेहनती किसान, बहादुर जवान, सशक्त महिलाएं और धाकड़ खिलाड़ियों ने मिलकर हरियाणा को नई पहचान दी है। छह दशक पहले पिछड़े राज्यों में गिने जाने वाले हरियाणा ने आज देश के अग्रणी राज्यों में अपनी जगह बनाई है। मुख्यमंत्री रविवार को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के सभागार में आयोजित राज्य स्तरीय हीरक जयंती समारोह में बोल रहे थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा की तरक्की किसी एक वर्ग की वजह से नहीं, बल्कि किसानों, व्यापारियों, उद्योगपतियों, खिलाड़ियों, सैनिकों और महिलाओं के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। प्रदेश की बेटियां खेती से लेकर खेल, सेना और स्टार्टअप तक अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रही हैं। जब भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का तिरंगा लहराता है, उसमें हरियाणा की मिट्टी की मेहनत और योगदान भी शामिल होता है।
देश की अर्थव्यवस्था में हरियाणा का बड़ा योगदान
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने प्रदेश की आर्थिक उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा कि क्षेत्रफल के लिहाज से हरियाणा भले ही छोटा राज्य है, लेकिन देश की अर्थव्यवस्था में इसकी भूमिका काफी महत्वपूर्ण है। देश के कुल क्षेत्रफल में हरियाणा की हिस्सेदारी केवल 1.34 प्रतिशत है, जबकि राष्ट्रीय जीडीपी में प्रदेश का योगदान 3.6 प्रतिशत है।
उन्होंने कहा कि प्रति व्यक्ति आय के मामले में भी हरियाणा अग्रणी राज्यों में शामिल है। देश में बनने वाली हर तीन में से दो कारें, हर दूसरा ट्रैक्टर और 10 में से छह मोटरसाइकिलों का उत्पादन हरियाणा में होता है। प्रदेश की पहचान कृषि, उद्योग, खेल और बेहतर बुनियादी सुविधाओं से बनी है।
राज्यपाल बोले- संघर्ष से उत्सव तक पहुंचा हरियाणा
समारोह की अध्यक्षता करते हुए हरियाणा के राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष ने कहा कि 1966 में जब हरियाणा अलग राज्य बना था, उस समय प्रदेश के सामने कई चुनौतियां थीं। विकास की राह आसान नहीं थी, लेकिन छह दशक की मेहनत ने राज्य को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है।
उन्होंने कहा कि आज हरियाणा अपनी उपलब्धियों का उत्सव मना रहा है। इसके पीछे प्रदेश के लोगों का परिश्रम और समर्पण है। राज्यपाल ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और उनकी टीम के प्रयासों की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि कृषि से लेकर तकनीक तक हरियाणा ने अपनी मजबूत पहचान बनाई है और 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में प्रदेश की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी।
गुरुकुल कुरुक्षेत्र ने तैयार किए 100 से ज्यादा सैन्य अधिकारी
गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने गुरुकुल कुरुक्षेत्र की शैक्षणिक और अन्य उपलब्धियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पिछले 10 वर्षों में गुरुकुल ने एनडीए के माध्यम से 100 से अधिक उच्च सैन्य अधिकारी देश को दिए हैं।
इसके अलावा गुरुकुल के 150 से अधिक विद्यार्थियों ने मेडिकल, आईआईटी, एनआईटी और आईआईआईटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में जगह बनाई है। उन्होंने गुरुकुल के प्राकृतिक कृषि फार्म का भी उल्लेख किया और बताया कि यहां रसायनमुक्त खेती के जरिए किसानों को प्राकृतिक कृषि के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
स्वामी श्रद्धानंद के योगदान को किया याद
कार्यक्रम में स्वामी श्रद्धानंद को भी श्रद्धांजलि दी गई। राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष ने उनके जीवन को साहस, त्याग और राष्ट्र के प्रति समर्पण का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि स्वामी श्रद्धानंद ने शिक्षा को सामाजिक बदलाव का माध्यम मानते हुए गुरुकुल की स्थापना की थी। उनका उद्देश्य भारतीय संस्कृति, वैदिक परंपराओं और संस्कार आधारित शिक्षा को आगे बढ़ाना था।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने भी स्वामी श्रद्धानंद के योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने अशिक्षा, सामाजिक कुरीतियों और गुलामी के दौर में समाज को नई दिशा देने का काम किया। शिक्षा, सामाजिक सुधार और राष्ट्र जागरण उनके जीवन के प्रमुख उद्देश्य थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गुरुकुल की स्थापना के पीछे संस्कार, चरित्र, स्वाभिमान और राष्ट्रभक्ति पर आधारित शिक्षा की सोच थी। स्वामी श्रद्धानंद का बलिदान और उनके विचार आज भी समाज को सही दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं।
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