नई दिल्ली। अप्रैल 2027 में प्रस्तावित ‘हैपनिंग हरियाणा ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट’ से पहले हरियाणा सरकार ने निवेश जुटाने की कोशिश तेज कर दी है। इसी कड़ी में मुंबई में हुए ‘हैपनिंग हरियाणा 2.0’ के अंतरराष्ट्रीय आउटरीच कैंपेन के दूसरे दिन विभिन्न कंपनियों ने राज्य में 66 हजार करोड़ रुपये से अधिक के निवेश के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर किए। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री राव नरबीर सिंह की मौजूदगी में इन समझौता ज्ञापनों का आदान-प्रदान हुआ।

इस निवेश अभियान में मुख्यमंत्री के मुख्य प्रधान सचिव राजेश खुल्लर की भूमिका भी महत्वपूर्ण बताई जा रही है। प्रशासनिक अनुभव और नीतिगत समझ के कारण उन्हें सरकार की निवेश रणनीति को आगे बढ़ाने वाले प्रमुख अधिकारियों में गिना जाता है। राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में उन्हें हरियाणा का ‘चाणक्य’ भी कहा जाता है।

निवेश से आगे परियोजनाओं को जमीन पर उतारने की चुनौती

हरियाणा सरकार की मौजूदा रणनीति केवल निवेश प्रस्ताव जुटाने तक सीमित नहीं है। जोर इस बात पर है कि एमओयू के बाद परियोजनाएं तेजी से जमीन पर उतरें। इसके लिए विभागीय समन्वय, तेज निर्णय, नीतिगत स्थिरता और समयबद्ध क्रियान्वयन पर ध्यान दिया जा रहा है।

राजेश खुल्लर की भूमिका इसी स्तर पर अहम मानी जा रही है। मुख्यमंत्री के मुख्य प्रधान सचिव के तौर पर वे सरकार के विकास संबंधी विजन को प्रशासनिक तंत्र के जरिए आगे बढ़ाने में भूमिका निभा रहे हैं। उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के आयुक्त एवं सचिव अमित अग्रवाल और विभाग की टीम भी इस पूरी प्रक्रिया में काम कर रही है।

सरकार की कोशिश निवेशकों को केवल जमीन, प्रोत्साहन और मंजूरी उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं रखने की है। लक्ष्य निवेश को उत्पादन, रोजगार और आर्थिक गतिविधियों से जोड़ना है।

मुंबई में 66 हजार करोड़ से ज्यादा के एमओयू

मुंबई में आयोजित ‘हैपनिंग हरियाणा 2.0’ के दूसरे दिन विभिन्न कंपनियों ने 66,000 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश के लिए एमओयू किए। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री राव नरबीर सिंह की मौजूदगी में अधिकारियों और कंपनियों के प्रतिनिधियों ने समझौता ज्ञापनों का आदान-प्रदान किया।

इतनी बड़ी राशि के निवेश प्रस्ताव हरियाणा की औद्योगिक संभावनाओं और निवेश नीतियों में उद्योग जगत की रुचि को दर्शाते हैं। हालांकि, इन प्रस्तावों को वास्तविक परियोजनाओं में बदलना अब सरकार के लिए अगली बड़ी चुनौती होगी।

‘फाइल मूवमेंट’ नहीं, ‘प्रोजेक्ट मूवमेंट’ पर जोर

मुंबई में उद्योग जगत को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सरकार की कार्यशैली पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि हरियाणा निवेशकों को केवल भूमि, प्रोत्साहन और मंजूरी नहीं देता, बल्कि स्केल, स्पीड, नीति-निश्चितता और साझा समृद्धि पर आधारित रणनीतिक साझेदारी देता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ‘फाइल मूवमेंट’ के बजाय ‘प्रोजेक्ट मूवमेंट’ पर विश्वास करती है। इसका मतलब है कि निवेश प्रस्तावों को मंजूरी और प्रशासनिक प्रक्रिया से आगे ले जाकर परियोजनाओं के रूप में जमीन पर उतारने पर जोर दिया जा रहा है।

निवेशकों के लिए एमओयू के बाद जमीन, मंजूरी, आधारभूत सुविधाएं और अन्य स्वीकृतियां महत्वपूर्ण होती हैं। सरकार की मौजूदा रणनीति इन्हीं प्रक्रियाओं को तेज करने पर केंद्रित है।

पहले 1.10 लाख करोड़ के एमओयू, अब नई बड़ी खेप

हरियाणा सरकार की निवेश रणनीति के तहत इससे पहले गुरुग्राम में इंडस्ट्री पॉलिसी लॉन्च के दौरान करीब 1.10 लाख करोड़ रुपये के एमओयू हुए थे। मुख्यमंत्री के अनुसार, 123 कंपनियों में से 108 कंपनियों को जमीन उपलब्ध कराई जा चुकी है।

इसके बाद मुंबई में 66 हजार करोड़ रुपये से अधिक के नए निवेश समझौते हुए हैं। इससे अप्रैल 2027 में होने वाले प्रस्तावित ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट की तैयारियों को और गति मिली है।

अब सरकार के सामने इन निवेश प्रस्तावों को तेजी से परियोजनाओं में बदलने की चुनौती है। यही प्रक्रिया हरियाणा की निवेश रणनीति के वास्तविक परिणाम तय करेगी।

नीति से परियोजना तक होगी असली परीक्षा

बड़े निवेश सम्मेलन की सफलता केवल एमओयू की संख्या या निवेश राशि से तय नहीं होती। असली असर तब दिखता है जब निवेशक परियोजना शुरू करते हैं और उससे उत्पादन, रोजगार तथा आर्थिक गतिविधियां बढ़ती हैं।

हरियाणा सरकार की मौजूदा रणनीति में इसी दिशा में जोर दिया जा रहा है। राजेश खुल्लर की प्रशासनिक भूमिका भी इसी प्रक्रिया में महत्वपूर्ण होगी। अप्रैल 2027 के ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट से पहले सरकार का फोकस निवेशकों तक पहुंच बनाने के साथ-साथ निवेश प्रस्तावों को आगे बढ़ाने पर है।

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