Haryana ACB Trap Cases : कृष्ण कुमार सैनी, चंडीगढ़। हरियाणा में रिश्वतखोरी के खिलाफ कार्रवाई का आंकड़ा इस साल एक दशक के पुराने रिकॉर्ड को पार कर गया है। राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने 21 अक्टूबर 2026 तक 171 ट्रैप केस दर्ज किए हैं। वर्ष 2016 के बाद किसी एक साल में दर्ज मामलों की यह सबसे बड़ी संख्या है। इससे पहले 2016 में 170 ट्रैप केस दर्ज किए गए थे। खास बात यह है कि साल खत्म होने में अभी दो महीने से ज्यादा का समय बाकी है।
बिजली से लेकर पुलिस विभाग तक, कई महकमों के कर्मचारी दोषी
भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई का असर अलग-अलग सरकारी विभागों में भी दिखाई दिया है। एसीबी के आंकड़ों के अनुसार, इस साल 30 सितंबर तक दर्ज मामलों में दोषी ठहराए गए अधिकारियों और कर्मचारियों में बिजली विभाग से लेकर पुलिस, सिंचाई, शिक्षा और राजस्व विभाग तक के कर्मचारी शामिल हैं।
इस अवधि में दर्ज 21 आपराधिक मामलों में अदालतों ने कुल 26 आरोपियों को कठोर कारावास की सजा सुनाई। इनमें 23 अधिकारी-कर्मचारी और तीन निजी व्यक्ति शामिल हैं। विभागवार आंकड़ों पर नजर डालें तो पुलिस विभाग के छह और बिजली विभाग के पांच अधिकारी-कर्मचारी दोषी ठहराए गए।
इसके अलावा सिंचाई विभाग के दो, शिक्षा विभाग के दो, आबकारी एवं कराधान विभाग के दो तथा राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के दो अधिकारी-कर्मचारियों को भी सजा हुई। शहरी स्थानीय निकाय विभाग, कौशल विकास विभाग, हरियाणा वेयरहाउस और हरियाणा राज्य औद्योगिक एवं अवसंरचना विकास निगम के एक-एक कर्मचारी भी दोषियों में शामिल हैं।
30 सितंबर तक 155 ट्रैप केस, 172 आरोपी पकड़े गए
एसीबी की कार्रवाई का एक और अहम पहलू रिश्वत लेते पकड़े गए लोगों की संख्या है। ब्यूरो के अनुसार, 1 जनवरी से 30 सितंबर 2026 तक अधिकारियों, कर्मचारियों और निजी व्यक्तियों के खिलाफ कुल 191 आपराधिक मामले दर्ज किए गए। इनमें 155 ट्रैप केस थे।
इन मामलों में कुल 172 आरोपियों को रिश्वत लेते पकड़ा गया। इनमें 16 राजपत्रित अधिकारी, 131 अराजपत्रित कर्मचारी और 25 निजी व्यक्ति शामिल थे। यानी कार्रवाई का दायरा केवल सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि रिश्वत के लेन-देन में शामिल निजी व्यक्तियों पर भी शिकंजा कसा गया।
जांच के बाद विभागीय कार्रवाई की भी सिफारिश
ब्यूरो ने केवल मामले दर्ज करने तक कार्रवाई सीमित नहीं रखी। 30 सितंबर तक 88 नई जांचें शुरू की गईं। वहीं, 15 सितंबर तक उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक 61 जांचें पूरी कर ली गई थीं।
इनमें से 16 जांचों के आधार पर 74 राजपत्रित और 20 अराजपत्रित अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की सिफारिश की गई। इसके अतिरिक्त 10 जांचों में सात राजपत्रित अधिकारियों, 16 अराजपत्रित कर्मचारियों और 40 निजी व्यक्तियों के खिलाफ आपराधिक मुकदमे दर्ज करने की सिफारिश की गई।
ये आंकड़े बताते हैं कि ब्यूरो की कार्रवाई में गिरफ्तारी के साथ-साथ जांच पूरी करने और संबंधित विभागों में आगे की कार्रवाई की सिफारिश करने पर भी जोर दिया गया।
एसीबी प्रमुख की दोटूक चेतावनी
एसीबी प्रमुख डॉ. ए.एस. चावला ने भ्रष्टाचार में शामिल अधिकारियों और कर्मचारियों को सख्त चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि जो कर्मचारी जायज काम करने के बदले रिश्वत मांगते हैं, लोगों को जानबूझकर सरकारी कार्यालयों के चक्कर कटवाते हैं या अपने पद का दुरुपयोग करके उन्हें परेशान करते हैं, वे खुद को कानून की कार्रवाई से सुरक्षित न समझें।
उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और किसी को बख्शा नहीं जाएगा।
ब्यूरो ने ट्रैप केसों की बढ़ती संख्या को सरकार की भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति से जोड़ा है। वहीं, 21 अक्टूबर तक 171 मामलों का आंकड़ा पार होना इस साल की कार्रवाई का सबसे प्रमुख तथ्य बनकर सामने आया है। अब देखना होगा कि साल के बाकी दिनों में ट्रैप केसों की संख्या कहां तक पहुंचती है।
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