Haryana Air Pollution : हरियाणा। नवंबर की शुरुआत के साथ ही हरियाणा में हल्की ठंड ने दस्तक दे दी है, लेकिन इसके साथ हवा की गुणवत्ता भी बिगड़ने लगी है। सुबह और शाम के समय प्रदूषण का असर ज्यादा महसूस हो रहा है। प्रदेश के कई शहरों में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) खराब स्तर पर पहुंच गया है। सबसे ज्यादा चिंता कैथल की है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 310 दर्ज किया गया। वहीं गुरुग्राम, अंबाला और कुरुक्षेत्र समेत सात शहरों की हवा खराब श्रेणी में रही।
कैथल में सबसे ज्यादा प्रदूषण, 310 दर्ज हुआ AQI
2 नवंबर शाम 4 बजे तक के प्रदूषण आंकड़ों के मुताबिक कैथल प्रदेश का सबसे प्रदूषित शहर रहा। यहां AQI 310 दर्ज किया गया। इसके बाद अंबाला में 285 और कुरुक्षेत्र में 258 सूचकांक रहा।
गुरुग्राम में AQI 246 दर्ज किया गया। वहीं पंचगांव में 214, मानेसर में 211 और यमुनानगर में 208 रहा। इन सभी शहरों में हवा की गुणवत्ता खराब श्रेणी में पहुंच गई है।
हरियाणा के इन 7 शहरों में सांस लेना हुआ मुश्किल
प्रदेश के सात शहरों में वायु प्रदूषण का स्तर खराब श्रेणी में दर्ज किया गया। इन शहरों की सूची इस प्रकार है:
| शहर | AQI |
|---|---|
| कैथल | 310 |
| अंबाला | 285 |
| कुरुक्षेत्र | 258 |
| गुरुग्राम | 246 |
| पंचगांव | 214 |
| मानेसर | 211 |
| यमुनानगर | 208 |
AQI का 300 के पार पहुंचना स्वास्थ्य के लिहाज से चिंता की बात है। ऐसे में खासकर सांस और दिल से जुड़ी परेशानी वाले लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत है।
हिसार से सोनीपत तक मध्यम श्रेणी में रही हवा
हरियाणा के कुछ अन्य शहरों में भी प्रदूषण का असर दिखाई दिया। हिसार में AQI 184, रोहतक में 174 और सोनीपत में 161 दर्ज किया गया। सिरसा में यह आंकड़ा 130 रहा।
इसके अलावा भिवानी में 112 और फतेहाबाद में 111 AQI दर्ज हुआ। इन शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में रही।
पानीपत और करनाल की हवा सबसे बेहतर
प्रदूषण के बीच पानीपत और करनाल से राहत की खबर है। पानीपत में AQI 84 दर्ज किया गया, जो संतोषजनक श्रेणी में आता है। करनाल में यह आंकड़ा 47 रहा, जबकि पलवल में 41 दर्ज किया गया। इन दोनों शहरों में हवा अच्छी श्रेणी में रही।
फरीदाबाद में AQI 115 दर्ज किया गया, जो मध्यम श्रेणी में है।
पराली और निर्माण कार्यों पर नियंत्रण की चुनौती
नवंबर में ठंड बढ़ने के साथ हवा की गति कम होने और प्रदूषक कणों के वातावरण में जमा होने से प्रदूषण की समस्या गंभीर हो सकती है। पराली जलाने और निर्माण कार्यों से उठने वाली धूल पर नियंत्रण भी जरूरी है।
प्रदूषण कम करने के लिए इन गतिविधियों पर निगरानी और रोकथाम के प्रयास किए जा रहे हैं। लोगों को भी खुले में कचरा जलाने से बचना चाहिए और धूल वाले इलाकों में सावधानी बरतनी चाहिए।
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