पंचकूला। ग्लासगो में अपने दमखम और प्रतिभा का लोहा मनवाकर तिरंगे का मान बढ़ाने वाले हरियाणा के खेल सितारों का बुधवार को पंचकूला में सम्मान किया गया। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के पदक विजेताओं के सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की और 24 खिलाड़ियों को कुल 13 करोड़ 97 लाख 50 हजार रुपये की नकद पुरस्कार राशि देकर सम्मानित किया।

मुख्यमंत्री ने खिलाड़ियों की उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि आज हरियाणा के खेल सितारे प्रदेशवासियों के सामने हैं, जिन्होंने ग्लासगो में अपनी प्रतिभा का डंका पूरी दुनिया में बजाया है। उन्होंने कहा, “हर हरियाणवी का सीना गर्व से चौड़ा है। हरियाणा की मिट्टी की सबसे बड़ी खासियत यही है कि यहां खेतों में सिर्फ अन्न नहीं उगता, यहां चैंपियन भी पैदा होते हैं।”

भारत के 39 पदकों में हरियाणा की अहम हिस्सेदारी

सीएम सैनी ने बताया कि 23वें कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत ने 13 स्वर्ण, 17 रजत और 9 कांस्य समेत कुल 39 पदक जीतकर चौथा स्थान हासिल किया। इन खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले 122 खिलाड़ियों में 24 खिलाड़ी हरियाणा के थे। प्रदेश के खिलाड़ियों ने कुल 11 पदक जीतकर एक बार फिर अपनी श्रेष्ठता साबित की।

उन्होंने ग्लासगो में तिरंगा ऊंचा करने वाले सभी पदक विजेताओं और प्रतिभागी खिलाड़ियों का अभिनंदन करते हुए कहा कि खिलाड़ियों की मेहनत और उपलब्धियां आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणा हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि इन्हीं खिलाड़ियों के दम पर भारत आने वाले समय में दुनिया की बड़ी खेल शक्ति के रूप में उभरेगा।

पदक तक सीमित नहीं, खिलाड़ी के भविष्य की भी चिंता

मुख्यमंत्री ने कहा कि जब कोई खिलाड़ी देश के लिए मैदान में उतरता है तो उसे यह चिंता नहीं होनी चाहिए कि खेल के बाद उसका भविष्य क्या होगा। प्रदेश सरकार की नीतियां केवल पदक जीतने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि खिलाड़ियों को सम्मान, सुरक्षा और अवसर देने पर केंद्रित हैं।

सरकारी सेवाओं में अवसर, खेल अकादमियों और खेल नर्सरियों का विस्तार, प्रशिक्षण सुविधाओं तथा आधुनिक खेल ढांचे का विकास इसी सोच का हिस्सा है। मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले करीब 12 वर्षों में प्रदेश के 17,544 खिलाड़ियों को 742 करोड़ रुपये की नकद पुरस्कार राशि दी जा चुकी है।

खेल प्रतिभाओं को कम उम्र से मिल रहा प्रोत्साहन

सैनी ने बताया कि प्रदेश में 8 से 14 वर्ष की आयु के खिलाड़ियों को 1,500 रुपये और 15 से 19 वर्ष के खिलाड़ियों को 2,000 रुपये मासिक छात्रवृत्ति देने का प्रावधान किया गया है। पिछले लगभग 12 वर्षों में खेल इंफ्रास्ट्रक्चर पर करीब 1,100 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।

उन्होंने बताया कि ताऊ देवीलाल खेल परिसर में लगभग 10 करोड़ रुपये की लागत से राष्ट्रीय स्तर का उन्नत वैज्ञानिक प्रशिक्षण एवं पुनर्वास केंद्र स्थापित किया गया है। इसका उद्देश्य खिलाड़ियों को आधुनिक वैज्ञानिक प्रशिक्षण के साथ बेहतर पुनर्वास सुविधाएं उपलब्ध कराना है।

2030 में भारत में होगा राष्ट्रमंडल खेलों का आयोजन
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों से वर्ष 2030 में होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी भारत को मिली है। उन्होंने खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाते हुए कहा कि जिस तरह उन्होंने ग्लासगो में तिरंगा ऊंचा किया है, उसी तरह आने वाले वर्षों में ओलंपिक के पोडियम पर भी तिरंगा ऊंचा करने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ें। उन्होंने भरोसा दिलाया कि प्रदेश सरकार खिलाड़ियों को हरसंभव सहयोग और सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।