चंडीगढ़। हरियाणा सरकार प्रदेश में पेयजल व्यवस्था को मजबूत करने और भूजल पर निर्भरता कम करने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक कर जलघरों और पेयजल आपूर्ति की स्थिति की समीक्षा की। बैठक में पुराने जलघरों को आधुनिक बनाने के साथ ट्यूबवेल आधारित पेयजल व्यवस्था को धीरे-धीरे नहरी पानी से जोड़ने पर जोर दिया गया।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि प्रदेश के लोगों को साफ, सुरक्षित और पर्याप्त पेयजल उपलब्ध करवाना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि पेयजल से जुड़ी परियोजनाओं में केवल मौजूदा जरूरतों को नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों की जरूरतों को भी ध्यान में रखा जाए। इसके लिए जलापूर्ति के बुनियादी ढांचे को मजबूत और टिकाऊ बनाना जरूरी है।
466 पुराने वाटर वर्क्स का बदलेगा ढांचा
सरकार प्रदेश में ईंटों से बने पुराने 466 वाटर वर्क्स को चरणबद्ध तरीके से आरसीसी संरचना में बदलने की तैयारी कर रही है। इस काम पर करीब 1,000 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। आरसीसी आधारित जलघरों के निर्माण से पेयजल के भंडारण और वितरण की व्यवस्था को ज्यादा मजबूत बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिन जलघरों की संरचना पुरानी हो चुकी है, वहां प्राथमिकता के आधार पर काम शुरू किया जाए। साथ ही निर्माण कार्य में गुणवत्ता से किसी तरह का समझौता नहीं करने को कहा गया है।
ट्यूबवेल की जगह नहरी पानी पर बढ़ेगा जोर
बैठक में भूजल की गुणवत्ता और लगातार बढ़ती निर्भरता को लेकर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि कई इलाकों में भूमिगत पानी की गुणवत्ता चिंता का विषय बन रही है। ऐसे में वैकल्पिक जल स्रोतों का इस्तेमाल बढ़ाना जरूरी है।
इसी उद्देश्य से ट्यूबवेल आधारित वाटर वर्क्स को नहरी पानी आधारित व्यवस्था में बदलने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार का लक्ष्य भूजल पर दबाव कम करते हुए लोगों को बेहतर गुणवत्ता वाला पेयजल उपलब्ध कराना है।
पानी की गुणवत्ता और सप्लाई की होगी निगरानी
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि प्रदेश में पेयजल की उपलब्धता के साथ उसकी गुणवत्ता पर भी लगातार नजर रखी जाए। जलघरों, पाइपलाइन और पेयजल आपूर्ति से जुड़ी व्यवस्थाओं की नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि गर्मी या अन्य परिस्थितियों में किसी इलाके में पानी की कमी न हो, इसके लिए विभाग को पहले से तैयारी रखनी होगी। जहां व्यवस्था में खामी दिखाई दे, वहां तत्काल सुधार किया जाए।
सरकार का फोकस लंबे समय के समाधान पर
हरियाणा सरकार की इस पहल का मुख्य उद्देश्य पुराने पेयजल ढांचे को आधुनिक बनाना, भूजल पर निर्भरता घटाना और नहरी पानी के इस्तेमाल को बढ़ावा देना है। 466 वाटर वर्क्स को आरसीसी आधारित बनाने के साथ ट्यूबवेल आधारित जलापूर्ति को नहरी स्रोतों से जोड़ने की योजना से प्रदेश की पेयजल व्यवस्था को लंबे समय के लिए मजबूत करने की दिशा में काम किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पेयजल परियोजनाओं को तय मानकों के अनुसार पूरा किया जाए और जनता को स्वच्छ पानी उपलब्ध कराने में किसी भी स्तर पर लापरवाही न बरती जाए।
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